18% ईसाई वोट के सहारे थी BJP, FCRA बिल से केरल में कर लिया 'सेल्फ गोल'?
केरल में BJP की नजर 18 प्रतिशत ईसाई वोटों पर है और इस समुदाय से बीजेपी को समर्थन भी मिल रहा है। इस बीच केंद्र सरकार ने संसद में FCRA बिल पेश कर दिया है, जिसे ईसाई समुदाय के खिलाफ बताया जा रहा है।

केरल में पीएम मोदी, Photo Credit: PTI
केरल में विधानसभा चुनावों के लिए अब कुछ ही दिनों का समय शेष रह गया है। इन चुनावों में एक तरफ कांग्रेस सरकार बनाने की कोशिश में लगी है। वहीं, लेफ्ट सरकार तीसरी जीत दर्ज करने का प्रयास कर रही है। भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में आक्रामक तरीके से प्रचार कर रही है और उन्हें उम्मीद है कि दक्षिण के इस राज्य में पार्टी को विधानसभा में एंट्री जरूर मिलेगी। भारतीय जनता पार्टी ने केरल में ईसाई वोटर्स को अपनी और करने की कोशिश की है। बता दें कि केरल में करीब 18 प्रतिशत ईसाई मतदाता हैं और 2024 के चुनाव में ईसाई वोटों के सहारे ही बीजेपी के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन अब ईसाई समुदाय के लोगों के मन में FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पेश किया। इस बिल के जरिए भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाले विदेशी फंड पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा बीजेपी की ओर से किया जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों ने FCRA संशोधन विधेयक 2026 को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया है।
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केरल से सांसद और कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, 'FCRA ईसाइयों, अल्पसंख्यकों और NGOs के खिलाफ कानून है। जो NGOs भारत के लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें इस कानून के जरिए दंडित किया जा रहा है। हम इस विधेयक को पारित नहीं होने देंगे। हम आज संसद के सामने और संसद के अंदर भी प्रदर्शन कर रहे हैं।'
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कितना अहम है ईसाई समुदाय?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल में ईसाई वोटर्स ‘X फैक्टर’ के रूप में उभर रहे हैं। केरल में करीब 18 प्रतिशत ईसाई वोटर हैं। खास बात यह है कि यह 18 प्रतिशत वोटर कुछ सीटों पर नहीं बल्कि राज्य की कई सीटों में बिखरे हुए हैं और बड़े स्तर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। ईसाई समुदाय कई धार्मिक और क्षेत्रीय गुटों में बंटा हुआ है। हर गुट की अपनी प्राथमिकताएं और राजनीतिक झुकाव हैं, जिससे एकजुट वोट बैंक की अवधारणा कमजोर हुई है। बीजेपी की नजर ईसाई समुदाय के वोटर्स पर है और लंबे समय से पार्टी इन वोटर्स तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में केरल में बीजेपी को ईसाई समुदाय का वोट भी मिला था। साइरो-मालाबार रोमन कैथोलिक चर्च से जुड़े आर्चबिशप मार जोसेफ पम्प्लानी ने लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि अगर केंद्र सरकार रबड़ की कीमतें बढ़ाती है, तो ईसाई किसान BJP को केरल से अपनी पहली संसदीय सीट जीतने में मदद करने के लिए वोट देंगे। अब तक, ईसाई किसान कांग्रेस या केरल कांग्रेस के गुटों को वोट करते आए थे। हालांकि, 2024 में बीजेपी को लोकसभा की एक सीट पर जीत मिली। इसके साथ ही बीजेपी को 16 प्रतिशत से ज्यादा वोट भी मिले, जो पिछले (2019) लोकसभा चुनाव के 12.9 प्रतिशत से करीब 4 प्रतिशत ज्यादा हैं।
2026 चुनाव में ईसाई वोटर पर बीजेपी की नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी की नजर ईसाई वोटर्स पर है। बीजेपी ने ईसाई इलाकों में खासकर मध्य केरल में आक्रामक प्रचार किया है और ईसाई दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा है, जिनमें जॉर्ज कुरियन, शॉन जॉर्ज और अनूप एंटनी जोसेफ जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं को पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा जनसमर्थन भी मिल रहा है। केरल में ईसाई समुदाय बीजेपी को एलडीएप और यूडीएप के एक विकल्प के रूप में देख रहा था और दिग्गज नेताओं को उतारने से बीजेपी की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। मध्य केरल के पथानामथिट्टा जिले में भी ईसाई समुदाय से बीजेपी को समर्थन मिल रहा है। दिग्गज ईसाई नेताओं को मैदान में उतारकर बीजेपी यह विश्वास दिलाना चाहती है कि पार्टी कांग्रेस और लेफ्ट का विकल्प हो सकती है।
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FCRA से होगा नुकसान?
ईसाई वोटरों का दिल जीतने की कोशिश के बीच बीजेपी की केंद्र सरकार ने संसद में FCRA बिल पेश कर दिया है। यह बिल ठीक चुनाव के बीच में पेश किया गया है और विपक्ष इस बिल को अल्पसंख्यकों, ईसाईयों के खिलाफ बता रहा है। बीजेपी की छवि पहले ही अल्पसंख्यक विरोधी बन चुकी है ऐसे में इस बिल से पार्टी की उन कोशिशों पर पानी फिर सकता है जो ईसाई वोटर्स को लुभाने के लिए की गई थीं।
केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल के उप महासचिव फादर थॉमस थरायिल का कहना है कि किसी भी प्रकार के घोटाले को रोकने के लिए पहले ही बहुत सख्त नियम हैं। ऐसे में FCRA बिल में नए प्रावधान लाना तर्कहीन है, जिनमें लाइसेंस रिन्यू करवाने में देरी और NGO की संपत्तियों को कब्जे में लेने का प्रावधान भी है। हालांकि, केरल बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि यह बिल ईसाईयों के खिलाफ नहीं है और विपक्ष झूठ फैला रहा है लेकिन चुनाव के बीच बीजेपी के लिए आत्मघाती फैसला हो सकता है।
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