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कोझिकोड: लेफ्ट के मजबूत किले में कैसे सेंध लगा पाएंगे UDF या बीजेपी?

कोझिकोड जिला लेफ्ट के मजबूत गढ़ की तरह है जहां उसे चुनौती देना किसी के लिए भी आसान नहीं रहा है। इस बार UDF के सामने चुनौती है कि वह यहां LDF को हराकर दिखाए।

kozhikode district of kerala

कोझिकोड जिला, Photo Credit: Khabargaon

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केरल के कोझिकोड जिले को ही पहले कालीकट के नाम से जाना जाता था। मालाबर तट पर स्थित यह जिला जमोरिन का साम्राज्य रहा है। साहित्य और कला के चलते इसे केरल का कल्चरल हब भी कहा जाता है। मसालों के लिए मशहूर इस जिले की राजनीति देखें तो यह लेफ्ट के मजबूत किले के रूप में दिखता है। यह जिला समाजवादी आंदोलन से भी काफी प्रभावित रहा है जिसके चलते केरल से बाहर प्रभाव रखने वाले कई दल भी यहां एक-दो सीटों पर चुनाव जीतते रहे हैं। 2021 में यह जिला कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) के लिए बुरे सपने की तरह साबित हुआ था।

 

मलप्पुरम, वायनाड और कन्नूर से सटा हुआ यह जिला समुद्र तट पर स्थित है और राज्य की पोर्ट सिटी के नाम से मशहूर है। वास्कोडिगामा इसी शहर में आया था और पुर्तगालियों ने इस शहर के जरिए ही मसालों का व्यापार शुरू किया था। बाद में ब्रिटिश, फ्रेंच और डच कारोबारियों ने भी यहां से जमकर कारोबार किया। काली मिर्च और इलायची जैसे मसालों के चलते यह जिला कई शताब्दियों से चीनी, अरबी और यहूदी कारोबारियों की पसंद बना रहा है। यह शहर मूर्तियों की वजह से भी खूब चर्चा में रहे है। शहर के अलग-अलग इलाकों में बनाई गई मूर्तियों के चलते ही इसे साल 2012 में 'शिल्प नगरम' नाम से नवाजा गया था।

 

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राजनीति के मामले में यह जिला लेफ्ट का गढ़ है। समाजवादी आंदोलन से निकले कई दलों ने यहां की कुछ सीटों पर लगातार जीत हासिल की है। शरद पवार की अगुवाई वाली नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) शरद पवार हो, राष्ट्रीय जनता दल हो या फिर तृणमूल कांग्रेस। अक्सर बाहर से आने वाले दलों ने सबसे पहले कोझिकोड में ही पैर जमाने की कोशिश की है।

 

दो राजस्व डिवीजन, 4 तालुका, 12 ब्लॉक, 70 पंचायत और 118 गांवों में बंटा यह जिला शहरी आबादी वाला भी है। यही वजह है कि यहां एक नगर निगम और 7 नगर पालिकाएं भी हैं। कुल 2344 वर्ग किलोमीटर में फैले इस  जिले की 13 विधानसभा सीटें वायनाड, कोझिकोड और वताकरा लोकसभा क्षेत्रों में फैली हुई हैं।

2021 में क्या हुआ था?

अगर 2021 के चुनाव परिणाम की बात करें तो UDF को कोझिकोड से तगड़ा झटका लगा था। जिले की 13 में से सिर्फ एक सीट पर UDF को जीत मिली थी। वहीं, LDF ने 9 जिलों में जीत हासिल करके अपनी बढ़त मजबूत की थी। जिले की तीन सीटों पर अन्य दलों या निर्दलीयों को जीत मिली थी। उसमें से भी कुछ जीते उम्मीदवार लेफ्ट के ही समर्थन में थे। ऐसे में अगर UDF को केरल की सत्ता तक पहुंचना है तो उसे कोझिकोड में खुद को बेहद मजबूत स्थिति में लाना होगा।

 

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विधानसभा सीटों का इतिहास

वदाकरा- कोझिकोड जिले की यह विधानसभा सीट वताकरा लोकसभा क्षेत्र में आती है। यह एक ऐसी सीट है जहां समाजवादी आंदोलन से निकले तमाम दलों का प्रभाव रहा है। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, भारतीय लोकदल, सोशलिस्ट पार्टी, जनता दल और जनता दल और जनता दल (सेक्युलर) तक ने यहां से जीत हासिल की है। इसमें भी एक रोचक बात है कि एम कृष्णन, के चंद्रशेखरन और सी के नानू ऐसे नेता रहे हैं जो पार्टी बदलकर कई बार इस सीट से विधायक बने हैं। साल 2021 में रिवॉल्युशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की के के रीमा ने यहां से जीत हासिल की थी।

 

 

कुट्टिआडी- वताकरा लोकसभा क्षेत्र में आने वाला यह विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आने के बाद से ही लेफ्ट और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के जोरदार मुकाबले वाला क्षेत्र बन गया है। अब तक के तीन चुनाव में दो बार सीपीआई और एक बार IUML ने जीत हासिल की है। पिछले दो चुनावों से यहां जीत और हार का अंतर बेहद मामूली रहा है ऐसे में यह सीट इस बार भी नजरों में रहने वाली है।

 

नादपुरम- वताकरा लोकसभा क्षेत्र में शामिल यह सीट लंबे समय से CPI का गढ़ है। सिर्फ एक बार यहां से IUML के हमीद अली शेमनाद ने जीत हासिल की है। 1970 से लेकर अब तक यहां से CPI ही जीतती आ रही है। सीपीआई के वरिष्ठ नेता बिनॉय विश्वम दो बार यहां के विधायक रहे हैं। पिछले तीन चुनाव से ई के विजयन यहां से जीतते आ रहे थे।

 

क्विलैंडी- यह विधानसभा क्षेत्र में वताकरा लोकसभा में ही आता है। कांग्रेस और लेफ्ट की रोचक टक्कर वाले इस क्षेत्र में पिछले चार चुनाव से सीपीआई ने ही जीत हासिल की है। कांग्रेस लगातार कोशिश कर रही है कि वह इस सीट पर भी जीत हासिल कर पाए। 

 

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पेरंबरा- वताकरा लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा पेरंबरा  भी लेफ्ट का गढ़ है और 1980 से लेकर आज तक सीपीएम को यहां कोई हरा नहीं पाया है। यूडीएफ की ओर से इस बार यहां IUML मैदान में है। सीपीआई ने फिर से मौजूदा विधायक टी पी रामकृष्णन को उतारा है। वहीं, IUML की फातिमा तहिलिया और बीजेपी के मोहनन मास्टर मैदान में हैं।

 

बालुसेरी- कोझिकोड लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। समाजवादी आंदोलन से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में ए सी शनमुखदास ने कुल 6 बार चुनाव जीता और 4 अलग पार्टियों से जीता। फिलहाल साल 2011 से यहां सीपीआई का कब्जा है। पिछले कुछ चुनावों से UDF ने अलग-अलग उम्मीदवारों को उतारकर देख लिया लेकिन अभी तक उसे यहां कामयाबी नहीं मिली है।

 

एलातुर- कोझिकोड जिले की कई सीटों पर ऐसे दलों का प्रभाव है जो केरल में पारंपरिक नहीं माने जाते हैं। अस्तित्व में आने के बाद से इस सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के ए के शशींद्रन लगातार तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। कई दलों ने उनके मुकाबले खूब पसीना भी बहाया लेकिन कोई भी उन्हें हराने की स्थिति में कभी नहीं दिखा है।

 

कोझिकोड नॉर्थ- कोझिकोड शहर की पहली सीट कोझिकोड नॉर्थ के नाम से जानी जाती है। पहले इसी को कालीकट-1 के नाम से जाना जाता था। साल 2008 में परिसीमन के बाद इसका नाम बदला गया। परिसीमन के बाद से अब तक यहां सीपीआई ही जीतती आ रही है। मौजूदा विधायक टी रवींद्रन के मुकाबले कांग्रेस ने के जयंत और बीजेपी ने नव्या हरिदास को मैदान में उतारा है।

 

कोझिकोड साउथ- परिसीमन से पहले यही सीट कालीकट-2 के नाम से मशहूर थी और IUML का यहां दबदबा हुआ करता था। परिसीमन के बाद के दो चुनावों में भी IUML के एम के मुनीर ने यहां से जीत हासिल की थी। अब LDF में शामिल इंडियन नेशनल लीग (INL) ने यहां अपना कब्जा जमा लिया है। 2021 में INL के अहमद देवरकोविल ने IUML की नूरबीना रशीद को चुनाव में हराया था। इस बार भी यहां मुख्य मुकाबला INL और IUML का ही है।

 

बेपोर- कोझिकोड लोकसभा क्षेत्र की बेपोर विधानसभा भी लेफ्ट का गढ़ है। 1982 से आज तक यहां सीपीएम की हार नहीं हुई है। इस दौरान सीपीएम ने कुल 6 नेताओं को यहां से चुनाव लड़वाया है। अब तक नीलांबुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतने वाले पी वी अनवर अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में हैं। वह यहां से लेफ्ट को चुनौती देने के लिए उतर रहे हैं।

 

कुन्नमंगलम- कोझिकोड लोकसभा क्षेत्र की सीट कुन्नमंगलम भी लेफ्ट बनाम IUML के संघर्ष का केंद्र रही है। 2021 में निर्दलीय उम्मीदवार रहे पी टी ए रहीम को लेफ्ट का समर्थन मिला था। वह इससे पहले भी दो बार लेफ्ट के समर्थन से जीतते आ रहे हैं।

 

कोडुवल्ली- 1977 से अब तक सिर्फ दो बार यहां लेफ्ट को जीत मिली है वरना हर बार यहां से IUML को ही जीत मिलती रही है। केरल सरकार में मंत्री रहे एम के मुनीर खुद पिछली बार इस सीट से उतरे थे और IUML के ही पूर्व नेता करात रजक को हराया था। इस बार भी इस सीट क लड़ाई बेहद अहम हो सकती है।

 

तिरुवंबदी- यह कोझिकोड जिले की इकलौती ऐसी सीट है जो वायनाड लोकसभा क्षेत्र में आती है। IUML बनाम लेफ्ट की लड़ाई का केंद्र इस सीट पर पिछले दो चुनावों से  सीपीएम जीतती आ रही है। 2021 में जीते लिंटो जोसेफ एक बार फिर से लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। वहीं, IUML ने इस बार सी के कासिम को मैदान में उतारा है। इस सीट पर इस बार टी20 पार्टी पर भी नजर रहने वाली है। यह पार्टी अब एनडीए का हिस्सा है और तिरुवंबदी सीट उसी के खाते में आई है।

 

जिले की स्थिति
क्षेत्रफल- 2344 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर-95.08%
विधानसभा-13
ब्लॉक-12
नगर पालिका-7
नगर निगम-1
गांव-118

 

विधानसभा सीटें- 13
LDF-9
UDF-1
अन्य-3

 


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