साल 2026 में चार मुख्य राज्यों में चुनाव होने हैं। ये राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल हैं। इसलिए वोटर्स के लिए 2021-2026 के दौरान पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल की विधानसभाओं के कामकाज के आंकड़ों का विश्लेषण को जानना जरूरी है। ऐसे में PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों ने इन राज्यों के विधानसभाओं के कामकाज का बेवरा दिया हुआ है।
यह ध्यान देने योग्य है कि मई 2021 में पश्चिम बंगाल में 17वीं, तमिलनाडु में 16वीं तथा असम और केरल में 15वीं विधानसभा का गठन किया गया था। आंकड़ों के अनुसार केरल और तमिलनाडु विधानसभा ने न केवल सत्रों की संख्या में निरंतरता बनाए रखी, बल्कि कामकाज के घंटों के मामले में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल और असम में सत्रों की अवधि और दिनों की संख्या में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
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किस विधानसभा में सबसे ज्यादा सत्र आयोजित किए?
सत्र आयोजित करने के मामले में केरल विधानसभा सबसे अधिक सक्रिय रही है। मई 2021 से नवंबर 2025 के बीच, केरल में कुल 15 सत्र आयोजित किए गए। इसके विपरीत, तमिलनाडु में अब तक 8 सत्र और पश्चिम बंगाल में 6 सत्र दर्ज किए गए हैं। वहीं, असम विधानसभा ने कुल 14 सत्र आयोजित किए हैं।
सबसे अधिक दिनों तक चलने वाली विधानसभा
जब विधानसभा में कुल कार्य दिनों की बात आती है तो केरल सबसे आगे रहा है। इसके विपरीत असम की विधानसभा में सबसे कम कार्य दिन दर्ज किए गए। 15वीं केरल विधानसभा ने कुल 192 दिनों तक काम किया। इसके बाद 17वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 162 दिनों तक काम किया गया। 16वीं तमिलनाडु विधानसभा ने 155 दिनों तक काम किया हुआ। जबकि 15वीं असम विधानसभा ने 102 दिनों तक काम किया गया।
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कुल घंटों के हिसाब से विधानसभाओं की स्थिति
इन चारों राज्यों की विधानसभा के कामकाज के घंटे को देखें तो सबसे ज्यादा काम केरल में हुआ और सबसे कम असम में। केरल की 15वीं विधानसभा में कुल 1150.3 घंटे कामकाज हुआ, जबकि 7.8 घंटे सदन स्थगित रहा। इसके बाद तमिलनाडु की 16वीं विधानसभा का नंबर आता है, जहां कुल 732.8 घंटे काम हुआ। हालांकि, इस दौरान सदन कितने घंटे स्थगित रहा, इसका डेटा उपलब्ध नहीं है।
वहीं पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा में 436.8 घंटे कामकाज हुआ लेकिन यहां 110.0 घंटे सदन स्थगित भी रहा। सबसे कम काम असम की 15वीं विधानसभा में हुआ, जहां सिर्फ 208.3 घंटे ही कामकाज हुआ और 16.5 घंटे सदन स्थगित रहा। खास बात ये है कि असम का ये आंकड़ा फरवरी 2024 से ही उपलब्ध है, यानी पूरा कार्यकाल इसमें शामिल नहीं है।