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पूर्वी मेदिनीपुर: BJP और TMC में कांटे की टक्कर, अबकी कौन मारेगा बाजी?

पूर्वी मेदिनीपुर जिले की 16 विधानसभा सीटों पर बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। 2021 में यहां 10 सीटों पर टीएमसी और छह पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था।

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पूर्वी मेदिनीपुर जिला। (Photo Credit: Khabargaon)

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1 जनवरी 2002 को मेदिनीपुर जिले अलग करके पूर्वी मेदिनापुर जिले का गठन किया गया। तामलुक इसका जिला मुख्यालय है। जिले का इतिहास मयूर ध्वज वंश के राजा ताम्रध्वज से जुड़ा है। जिला मुख्यालय तामलुक का नाम भी संस्कृत शब्द 'ताम्रलिप्त' से निकला है। इसका अर्थ 'तांबे से भरा' हुआ होता है।

 

तामलुक प्राचीन काल से ही एक बंदरगाह शहर रहा है। इस कारण यहां व्यापार भी खूब फला फूला। महाभारत में इस जगह का ताम्रलिप्ता, ब्रिटिश शासन में तामोलुक और ऐतिहासिक साक्ष्यों में तामलिका के नाम से उल्लेख मिलता है। जैन ग्रंथों में ताम्रलिप्ति का उल्लेख वेंगा राज्य की राजधानी के तौर पर किया गया है।

 

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भौगोलिक तानाबाना कैसा है?

माना जाता है कि तामलुक का प्राचीन बंदरगाह आज भी नदी के नीचे दबा है। एक समय यह व्यापार का सबसे अहम केंद्र था। यह जिला दक्षिण में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में सुवर्णरेखा और पूर्व में रूपनारायण नदी से घिरा है। यहां द्वारकेश्वर और शिलाई नदियों का रूपनारायण नदी में संगम होता है। जिले का अधिकांश भूभाग इंडो-गंगा मैदान और पूर्वी तटीय मैदान में बंटा है पश्चिम-पूर्व और उत्तर का हिस्सा समतल मैदान है। वहीं दक्षिण में बंगाल की खाड़ी का तटीय मैदान। जिले में जलोढ़ मिट्टी अधिक पाई जाती है। हल्दी, रूपनारायण, रसूलपुर, बागूई और केलेघाई जिले की प्रमुख नदियां हैं।

 

जिले के उत्तर और पश्चिम में पश्चिमी मेदिनीपुर जिले की सीमा लगती है। उत्तर-पूर्व में हावड़ा है। पूर्व में हुगली नदी के दूसरी तरफ दक्षिण 24 परगना जिले की सीमा लगती है। जिले के दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पश्चिम में ओडिशा की सीमा पड़ती है। जिले में अधिकांश आबादी बांग्ला और ओडिशा सीमा से सटे क्षेत्र में उड़िया भाषा बोली जाती है। 

पूर्वी मेदिनीपुर जिले पर एक नजर

पूर्वी मेदिनीपुर जिला चार तहसीलों में विभाजित है। कुल 25 और 29 पुलिस थाने हैं। मौजूदा समय में यह जिला बर्दवान मंडल का हिस्सा है। 2006 में पंचायती राज मंत्रालय ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले को देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में शामिल किया था। जिला कुल 4,736 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। 50 लाख की जनसंख्या वाले इस जिले की 87.66 फीसद साक्षरता दर है। चार तहसील और कुल 25 ब्लॉक है। जिले भर में कुल 29 थाने भी हैं। 2007 में जिले के नंदीग्राम में पुलिस फायरिंग में 14 किसानों की जान गई। बाद में यह बड़ा सियासी मुद्दा बना था।  

 

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जिले की 16 विधानसभा क्षेत्र तामलुक और कांथी लोकसभा सीटों में विभाजित हैं। बीजेपी के अभिजीत गांगोपाध्याय तामलुक से मौजूदा सांसद है। वहीं कांथी से बीजेपी के ही सौमेंदु अधिकारी सांसद हैं। पूर्वी मेदिनीपुर जिले की सियासत में सुवेंदु अधिकारी परिवार का खूब दबदबा है। 

विधानसभा सीटें

  • तामलुक
  • पांस्कुरा पुरबा
  • पांस्कुरा पश्चिम
  • मोयना
  • नंदकुमार
  • चांदीपुर
  • महिसदल
  • हल्दिया
  • नंदीग्राम
  • पटास्पुर
  • भगवानपुर
  • एग्रा
  • कांथी उत्तर
  • खेजुरी
  • कांथी दक्षिण
  • रामनगर

विधानसभाओं पर एक नजर

तामलुक विधानसभा: यहा सबसे अधिक 8 बार कांग्रेस जीती। चार बार सीपीआई का कब्जा रहा। 2001 में निर्बेद रॉय ने पहली बार टीएमसी का खाता खोला। 2011 और 2021 के चुनाव में टीएमसी के डॉ. सौमेन महापात्रा यहां से जीते। 2016 में सीपीएम की टिकट पर अशोक कुमार डिंडा ने विधानसभा चुनाव जीता था। 

 

पांस्कुरा पुरबा: बीजेपी को अभी तक यहां एक भी बार जीत नहीं मिली है। पहले तीन चुनाव में कांग्रेस का दबदबा रहा। 1967 से 1972 तक सीपीआई की गीता मुखर्जी लगातार चार बार विधायक बनीं। 2001 में बिप्लब रॉय चौधरी ने टीएमसी को पहली जीत दिलाई। मौजूदा समय वह यहां से दूसरी बार विधायक हैं। 

 

पांस्कुरा पश्चिम विधानसभा: सबसे अधिक छह बार सीपीआई ने जीत हासिल की। 2011 से टीएमसी का कब्जा है। आजादी के बाद पहले तीन चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों पर लोगों ने भरोसा जताया। बाद में दो चुनाव बांग्ला कांग्रेस ने जीते।

 

मोयना विधानसभा: तामलुक लोकसभा क्षेत्र में आने वाली मोयना सीट से अशोक डिंडा मौजूदा विधायक हैं। पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। सीपीआई की टिकट पर सबसे पहली बार कनाई लाल भौमिक मोयना से विधायक बने थे।

 

नंदकुमार विधानसभा: 2011 से इस सीट पर टीएमसी का दबदबा है। टीएमसी नेता सुकुमार डे यहां से तीन बार के विधायक हैं। पार्टी ने इस बार भी उन्हीं को ही टिकट दिया है। विधानसभा क्षेत्र में नंदकुमार सामुदायिक विकास खंड, तामलुक सामुदायिक विकास खंड की बिष्णुबरह एक, पदुमपुर एक और पदुमपुर द्वितीय ग्राम पंचायतें आती हैं।

 

महिषादल विधानसभा: 1951 के चुनाव में यहां की जनता ने निर्दलीय प्रत्याशी कुमार देबा प्रोसाद गर्गा पर भरोसा जताया था। 2011 से टीएमसी जीतती आ रही है। 2011 और 2016 में टीएमसी की टिकट पर डॉ. सुदर्शन घोष दस्तीदार ने चुनाव जीता। 2021 में पार्टी ने तिलक कुमार चक्रवर्ती को उतारा तो वह भी जीतकर विधानसभा पहुंचे। 

 

हल्दिया विधानसभा: यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2011 में पहली बार टीएमसी के सेउली साहा ने चुनाव जीता। तापसी मंडल यहां से बार की विधायक हैं। पहली बार 2016 में सीपीएम से विधायक बनीं। 2020 में बीजेपी ज्वाइन कर ली। 2021 में चुनाव जीतने के बाद 2025 में टीएमसी का दामन थाम लिया।  

 

नंदीग्राम: इसकी गिनती बंगाल की हाई प्रोफाइल सीटों में होती है। 1951 से 1967 तक विधानसभा सीट नंदीग्राम उत्तर और नंदीग्राम दक्षिण में विभाजित थी। 1967 में नंदीग्राम विधानसभा बनी। सीपीआई नेता भूपाल चंद्र पांडा यहां से सबसे अधिक पांच बार विधायक बने। 2016 से सुवेंदु अधिकारी विधायक हैं। उनके आने से जिले में बीजेपी का जनाधार बढ़ा है।

 

चांदीपुर विधानसभा: यह विधानसभा क्षेत्र कांथी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2011 से यहां सिर्फ टीएमसी को जीत मिली है। बीजेपी के सामने उसकी यह पकड़ तोड़ने की चुनौती है। 2011 और 2016 में अमिया कांति भट्टाचार्जी और 2011 में सोहम चक्रवर्ती ने जीत हासिल की थी। 

 

पताशपुर विधानसभा: यहां से टीएमसी के ज्योतिर्मोय कर दो और उत्तम बारिक एक चुनाव जीते हैं। बाकी किसी भी दल का खाता नहीं खुला। यह विधानसभा सीट कांथी लोकसभा क्षेत्र में आती है। निर्वाचन क्षेत्र में पताशपुर प्रथम सामुदायिक विकास खंड, पताशपुर द्वितीय सामुदायिक विकास खंड की खरग्राम, पनचेत, पतासपुर, दक्षिण खंडा और श्रीरामपुर ग्राम पंचायतें आती हैं।

 

कांथी उत्तर विधानसभा: मौजूदा समय पर यहां बीजेपी का कब्जा है। लोकसभा में यह कांथी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। 2011 और 2016 में दो बार टीएमसी की बनश्री मैती यहां से विधायक बनीं।

 

भगवानपुर विधानसभा: 2011 और 2016 में टीएमसी के अर्धेन्दु मैती दो बार विधानसभा चुनाव जीते। 2021 में बीजेपी के रवींद्रनाथ मैती ने उन्हें बड़े अंतर से शिकस्त दी। 

 

खेजुरी विधानसभा: यह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और कांथी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। टीएमसी नेता रणजीत मंडल दो बार विधायक बने। 2011 में उनकी जगह पार्टी ने पार्थ प्रतिम दास को टिकट दिया। बीजेपी के संतनु प्रमाणिक ने बड़े अंतर से हराते हुए सीट अपने नाम की। 

 

कांथी दक्षिण विधानसभा: इस सीट पर सबसे अधिक पांच बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सुधीर चंद्र दास ने जीत हासिल की। बाद में यहां अधिकारी परिवार का दबदबा देखने को मिला। टीएमसी की टिकट पर सुवेंदु अधिकारी और दिब्येंदु अधिकारी यहां से चुनाव जीत चुके हैं। मौजूदा समय में बीजेपी नेता अरुप कुमार दास कांथी दक्षिण से विधायक हैं।

 

रामनगर विधानसभा: टीएमसी के अखिल गिरी मौजूदा विधायक हैं। 2021 में उन्होंने बीजेपी के स्वदेश रंजन नायक को हराया था। अखिल गिरी पहली बार 2001 में विधायक बने थे। 2011 से वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। 

 

एग्रा विधानसभा: 2021 में टीएमसी के तरुण मैती ने जीत हासिल की थी। 2006 में टीएमसी के ही सिसिर कुमार अधिकारी यहां से विधायक बने। बाद में वह लोकसभा चुनाव जीत तो 2009 के उपचुनाव में समारेस दास को जनता ने विधायक चुनाव। वे 2009 से 2016 तक तीन बार विधायक रहे। 

जिले की स्थिति

क्षेत्रफल- 4,736 वर्ग किमी
साक्षरता दर- 87.66%
विधानसभा सीटें- 16
नगर पालिका- 5
ब्लॉक- 25
ग्राम पंचायत- 223
गांव- 3500

 


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