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तारापुर विधानसभा: शकुनी चौधरी के गढ़ में 15 साल से JDU का दबदबा

बिहार की तारापुर विधानसभा सीट पर पिछले 15 साल से जेडीयू का दबदबा है। आरजेडी के सामने यह सीट जेडीयू से छीनने की सबसे बड़ी चुनौती है।

Tarapur Vidhan Sabha.

तारापुर विधानसभा। ( Photo Credit: Khabargaon)

बिहार की तारापुर विधानसभा सीट मुंगेर जिले का हिस्सा है। लोकसभा चुनाव में जमुई में पड़ता है। 1951 से अब तक दो उपचुनाव को मिलाकर कुल 21 बार चुनाव हो चुके हैं। विधानसभा क्षेत्र में असरगंज, तेतिया बंबर, संग्रामपुर और खड़गपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायतें शामिल हैं। 1995 के चुनाव में तारापुर में हिंसक झड़प हुई थी। इसमें कुल 9 लोगों की जान गई थी। शकुनी चौधरी समेत 33 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

 

मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 41 किमी दूर तारापुर उप-मंडलस्तर का कस्बा है। लोगों की जीविका मुख्यत: कृषि पर आधारित है। उलई और गड़खे जैसी नदियों की कारण विधानसभा क्षेत्र की मिट्टी उपजाऊ है। तारापुर की कुल संख्या 4.56 लाख है। पहले तीन चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। 2000 में पहली बार आरजेडी ने सफलता हासिल की।

 

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मौजूदा समीकरण

तारापुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3.10 लाख मतदाता हैं। इस सीट पर कुशवाहा (कोइरी) समुदाय का दबदबा माना जाता है। यहां अनुसूचित जाति के 15.1 और 6.8 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं। तारापुर में शकुनी चौधरी का सियासी दबदबा जगजाहिर है। वह यहां से छह बार विधायक रह चुके हैं। उनकी पत्नी ने भी एक बार जीत हासिल की। 2015 के विधानसभा चुनाव में हार के ठीक चार साल बाद 2019 में शकुनी चौधरी ने सियासत से संन्यास ले लिया। उनके बेटे सम्राट चौधरी बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा के बड़े नेता हैं। 

2020 चुनाव का परिणाम

पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 25 प्रत्याशी मैदान में थे। आरजेडी ने दिव्या प्रकाश को टिकट दिया था। जेडीयू ने मेवालाल चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया। मेवालाल को कुल 64,468 वोट मिले। वहीं दिव्या प्रकाश को 57,243 मत मिले। जेडीयू प्रत्याशी ने 7,225 मतों के अंतर से चुनाव जीता। एलजेपी प्रत्याशी मीना देवी को 11,264 वोट मिले थे। 2021 में विधायक मेवालाल का अचानक निधन हो गया। उपचुनाव में भी जेडीयू प्रत्याशी राजीव कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। 

मौजूदा विधायक का परिचय

तारापुर से मौजूदा विधायक राजीव कुमार सिंह ने उपचुनाव में आरजेडी उम्मीदवार अरुण कुमार साह को हराया था। राजीव को कुल 79,090 मत मिले थे। अरुण साह के खाते में 75,238 वोट आए थे। साल 2000 में राजीव सिंह ने समता पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली। पांच साल बाद जेडीयू ने साल 2005 में उन्हें दोबारा मौका दिया। मगर उन्हें शकुनी चौधरी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

 

चुनावी हलफनामे के मुताबिक राजीव कुमार सिंह के पास दो करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। छह लाख रुपये की देनदारी है। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की है। 2021 के हलफनामे के मुताबिक उनके खिलाफ तारापुर पुलिस थाने में तीन मामले दर्ज थे।

 

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विधानसभा सीट का इतिहास

तारापुर सीट से कांग्रेस कुल पांच बार जीती है। आरजेडी को शकुनी चौधरी तीन बार जीता चुके हैं। समता पार्टी को मिलाकर जेडीयू ने सबसे अधिक छह बार जीत का परचम लहराया। सीपीआई, जनता पार्टी, शोषित पार्टी और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को एक-एक बार जीत मिली। तारापुर विधानसभा सीट पर शकुनी चौधरी का दबदबा रहा है। वह यहां से छह बार विधायक बने। बासुकीनाथ राय और तारिणी प्रसाद सिंह ने दो-दो बार फतेह हासिल की। मेवालाल चौधरी दो बार और उनकी पत्नी नीता चौधरी एक बार विधायक बनीं।

 

1952 बासुकीनाथ राय कांग्रेस
1957 बासुकीनाथ राय कांग्रेस
1962 जय मंगल सिंह कांग्रेस
1967 बीएन प्रशांत संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1969 तारिणी प्रसाद सिंह शोषित दल 
1972 तारिणी प्रसाद सिंह कांग्रेस
1977 कौशल्या देवी जनता पार्टी
1980 नारायण यादव सीपीआई
1985 शकुनी चौधरी निर्दलीय
1990 शकुनी चौधरी कांग्रेस
1995 शकुनी चौधरी   समता पार्टी
1998 पार्वती देवी (उपचुनाव) समता पार्टी
2000 शकुनी चौधरी आरजेडी
2005 (फरवरी) शकुनी चौधरी     आरजेडी
2005 (नवंबर) शकुनी चौधरी   आरजेडी
2010  नीता चौधरी जेडीयू
2015 मेवालाल चौधरी   जेडीयू
2020 मेवालाल चौधरी जेडीयू 
2021 राजीव कुमार सिंह  (उपचुनाव) जेडीयू    

 


             
               
                  
                                 
                           
                          
                         

 


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