नदिया जिले में BJP और TMC में होगी करीबी टक्कर, कैसा है जिले का सियासी गणित?
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में इस बार बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। 2021 के विधानसभा चुनावों में इस जिले की 17 सीटों में से 9 पर टीएमसी और 8 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी।

नदिया जिला, Photo Credit: Khabargaon
पश्चिम बंगाल का नदिया जिला राज्य के सबसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिलों में से एक माना जाता है। यह जिला बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है और बंगाल के सांस्कृतिक विकास में इसकी बड़ी भूमिका रही है। पूर्व में इसकी सीमा बांग्लादेश से लगती है, पश्चिम में बर्धमान और हुगली जिले से, उत्तर और उत्तर पश्चिम में मुर्शिदाबाद जिले और दक्षिण और दक्षिण पूर्व में उत्तर 24 परगना जिले से लगती है। यह जिला हावड़ा, कोलकाता और नई जलपाईगुड़ी (एनजेपी) को जोड़ने वाले मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है। इसके साथ ही भारत और बांग्लादेश को जोड़ने वाला प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय रेल लिंक नादिया जिले से होकर गुजरेगा, जिसमें गेडे भारतीय सीमा पर अंतिम रेलवे स्टेशन होगा।
नदिया जिले का नाम नवद्वीप यानी नया द्वीप से पड़ा है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह जिला गंगा की बदलती धाराओं से बना है। यह क्षेत्र प्राचीन समय से ही धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। महान वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु का जन्म भी इसी जिले में हुआ था, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
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इतिहास
नदिया जिले का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र बंगाल के प्रमुख सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्रों में शामिल था। नवद्वीप में नव्य-न्याय दर्शन का विकास हुआ और यह लंबे समय तक शिक्षा का केंद्र रहा। इस जिले को 'ऑक्सफोर्ड ऑफ बंगाल' भी कहा जाता है क्योंकि इसी जिले में शिक्षा और दर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र विकसित हुआ था। माना जाता है कि यह क्षेत्र प्राचीन गौड़ राज्य का हिस्सा था और बाद में पाल और सेन वंश के शासकों ने इस पर राज किया। सेन वंश के समय में ही नवद्वीप एक महत्वपूर्ण शैक्षणित और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा यहां नव्य-न्याय दर्शन का विकास हुआ, जिससे यह पूरे भारत में मशहूर हुआ।
मौजूदा समय में नदिया जिले का प्रशासनिक मुख्यालय कृष्णानगर में है। कृष्णानगर को अंग्रेजों ने प्रशासनिक मुख्यालय बनया था। हालांकि, नदिया जिले के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 1947 में उस समय आया जब भारत के दो टुकड़े हुए। नदिया जिला का एक बड़ा हिस्सा विभाजन के समय पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में चला गया था।
मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था
मौजूदा समय में नदिया बंगाल के महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिलों में से एक है। नदिया जिले में कुल 4 सब-डिवीजन हैं, जिनमें कृष्णानगर सदर, तेहट्टा, रानाघाट, कल्याणी शामिल हैं। इस जिले में लगभग 18 ब्लॉक यानी प्रशासनिक इकाइयां हैं, जिनमें कृष्णानगर-1, कृष्णानगर-2, नाकाशिपारा, चापड़ा, तेहट्टा-1, तेहट्टा-2, रानाघाट-1, रानाघाट-2, हांसखाली, शांतीपुर, चकदह, हरिंगहाटा, करिमपुर-1, करिमपुर-2 प्रमुख ब्लॉक हैं। नदिया जिला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। इस जिले में दो लोकसभा सीटें (कृष्णानगर और रानाघाट) और 17 विधानसभा सीटें हैं।
धार्मिक स्थल- नदिया जिले में कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं, जिनमें चैतन्य महाप्रभु का जन्मस्थान नवद्वीप धाम, मायापुर इस्कॉन मंदिर, शांतीपुर के प्राचीन मंदिर, कृष्णानगर के राजबाड़ी मंदिर शामिल हैं। यह जिला वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
सामाजिक ताना-बाना
साल 2011 की जनगणना के अनुसार नदिया जिले की कुल जनसंख्या 51,67,600 है। इसमें 26,53,768 पुरुष और 25,13,832 महिलाएं शामिल हैं। इस जिले की साक्षरता दर 66.14 प्रतिशत है। लिंगानुपात की बात करें तो यहां 1000 पुरुषों पर लगभग 947 महिलाएं हैं।
हिंदू – 72.15 प्रतिशत
मुस्लिम – 26.76 प्रतिशत
प्रमुख भाषा- बंगाली
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नदिया जिले की राजनीति
नदिया जिले में दो लोकसभा और 17 विधानसभा की सीटें हैं। कृष्णानगर लोकसभा सीट के अंतर्गत करिमपुर, तेहट्टा, पलाशीपारा, कालिगंज, नाकाशिपारा, चापड़ा, कृष्णानगर उत्तर और कृष्णानगर दक्षिण विधानसभा सीटें आती हैं। इसके अलावा रानाघाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नवद्वीप, शांतिपुर, रानाघाट उत्तर पूर्व, रानाघाट उत्तर पश्चिम, रानाघाट दक्षिण, चकदह, कल्याणी (एससी), हांसखाली (एससी) और हरिंगहाटा (एससी) सीटें आती हैं।
नदिया जिला राजनीतिक रूप से काफी अहम है। बंगाल के अन्य जिलों की तरह नदिया में भी 2011 से पहले लेफ्ट का वर्चस्व था। साल 2011 में हुए ऐतिहासिक चुनावों में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने 30 साल की लेफ्ट फ्रंट सरकार को उखाड़ फेंका था। 2011 का चुनाव नदिया जिले की राजनीति में भी टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। टीएमसी ने जिले की ज्यादातर सीटों (12 सीट) पर जीत दर्ज की वहीं लेफ्ट सिर्फ 5 सीटों पर ही जीत पाया। इसके बाद 2016 के चुनाव में टीएमसी ने 17 में से 13 सीट पर जीत दर्ज की और लेफ्ट और कांग्रेस मिलकर सिर्फ 4 सीटों पर जीत दर्ज कर पाए।
2021 के विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस तरह साल 2011 के विधानसभा चुनाव टर्निंग प्वाइंट साबित हुए, उसी तरह 2021 के चुनावों में भी बंगाल की राजनीति में नया ट्रेंड देखने को मिला। केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के चुनावों में अपना पूरा दम लगा दिया और इसका असर जमीनी स्तर से लेकर विधानसभा तक देखने को मिला। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। कांटे की इस टक्कर में टीएमसी को 9 सीट और बीजेपी को 8 सीटों पर जीत मिली। इसके साथ ही कांग्रेस और लेफ्ट पूरी तरह से हाशिए पर चले गए। नदिया उन चंद जिलों में से एक जिला रहा जहां बीजेपी ने टीएमसी को कड़ी टक्कर दी है।
लोकसभा स्तर पर भी यह जिला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कृष्णानगर और रानाघाट सीटों पर लगातार मुकाबला बना रहता है। 2021 के विधानसभा चुनावों का ट्रेंड 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जारी रहा। जिले की दो सीटों में मामला फिफ्टी-फिफ्टी रहा। कृष्णानगर से टीएमसी की तेज-तर्रार महिला नेता महुआ मोइत्रा ने अपनी सीट बरकरार रखी और रानाघाट से बीजेपी के जगन्नाथ सरकार ने जीत दर्ज की। नदिया जिले में 2021 और 2024 में हुए चुनावों की तरह 2026 के विधानसभा चुनावों में भी कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।
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नदिया एक नजर में
- क्षेत्रफल – 3,927 वर्ग किलोमीटर
- जनसंख्या- 51,67,600
- लोकसभा सीटें - 2 (कृष्णानगर और रानाघाट)
- विधानसभा सीटें – 17
- नगर पालिका – कृष्णानगर, रानाघाट, कल्याणी समेत कई अन्य
- नगर निगम – 1 (कल्याणी)
- ब्लॉक – 18
- ग्राम पंचायत – 100 से ज्यादा
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