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दिनकर ने संगीत की बाज़ीगरी से रूबरू करवाया, मशहूर नाटकों ने किया मंत्रमुग्ध

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित नाट्य निर्माण सीजन 2 के दौरान कई बेहतरीन नाटक पेश किए गए और कलाकारों ने अपनी कला से हर किसी को मोहित कर लिया।

artists at stage

नाटक प्रस्तुत करते कलाकार, Photo Credit: BAFTA

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उत्तर भारत की लोकप्रिय नाट्य संस्था बफ्टा के तीन दिवसीय नाट्य उत्सव नाट्य निर्वाण सीज़न 2 के दूसरे दिन यानी 28 मार्च को पेश हुई फैज अहमद फैज पर आधारित दास्तान 'हम देखेंगे', जिसमें अजय जैन और गुन्जन जैन ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा निर्देशक शुभम तिवारी के निर्देशन में बनी यह दास्तान फैज की नजमों और गजलों से सुसज्जित तो थी ही, दास्तानगोई की पुरानी परंपरा और वेशभूषा से भी अलग नए कलेवर मे पेश हुई। दिनकर पांडे ने इसमें संगीत निर्देशन किया जो सराहनीय रहा। 

 

प्रसिद्ध शायर फैज के जीवन के विभिन्न आयामों पर रोशनी डालने वाली और उनकी रूमानियत और क्रान्तिकारी सोच से ओतप्रोत शायरी की खूबियों की परत दर परत खोलती इस दास्तान ने संगीत एवं गायिकी के जरिए दर्शकों से खचाखच भरे संत गाडगे प्रेक्षागृह मे खूब वाहवाही बटोरी और स्टैंडिंग ओवेशन हासिल किया।

 

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कई नाटकों ने बनाया माहौल

 

इसके बाद शाम 7 बजे शुरू हुआ भोपाल से आया  नामी-गिरामी  रंगकर्मी आशीष पाठक का लिखित नाटक 'अगरबत्ती'। रोंगटे खड़े करने वाले इस बड़ी कास्ट के नाटक ने 1981 के बहमई कांड और चंबल इलाके की महिलाओं के संघर्ष, उनकी पीड़ा और न्याय पाने की उनकी ताकत और हौसले पर भरपूर रोशनी डाली और दर्शकों की भरपूर तालियां बटोरी। कलाकारों के मन को छूने वाले अभिनय, प्रकाश , ध्वनि और वेशभूषा के बेहतरीन संयोजन ने खूब सराहना बटोरी। नाटक ने जात-पात और मर्द-औरत के भेद को लेकर सवाल भी उठाए।

 

नाट्य उत्सव के दूसरे दिन बफ्टा के संस्थापक और नाटककार तारिक खान, अध्यक्ष डॉक्टर अफरोज जहां, रंगमंच और फिल्मों के पुरोधा जावेद सिद्दीकी, वरिष्ठ निर्देशक सलीम आरिफ , अनिल रंजन भौमिक और लखनऊ के वरिष्ठ नाटककार विशेष रूप से मौजूद रहे।

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