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मरने वाली थी महिला, 15 दिन पहले हुई शादी; मामला कोर्ट तक पहुंचा तो क्या हुआ?

30 साल साथ रहने के बाद अस्पताल में शादी करने वाले कपल को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। इसे अब अपील कोर्ट ने दोबारा जांच के लिए भेज दिया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated Image

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अमरीका के केंटकी राज्य से एक हैरान कर देने वाली खबर आई है। वहां विक्टर एलन विल्सन और बेट्टी सू कॉनराइट लगभग 30 सालों से एक-दूसरे के साथ रह रहे थे। अगस्त 2023 में बेट्टी की तबीयत बहुत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद 24 अगस्त 2023 को अस्पताल के कमरे में ही दोनों की शादी कराई गई लेकिन शादी के महज 15 दिन बाद ही बेट्टी का निधन हो गया।

 

बेट्टी के मृत्यु के बाद उनकी बेटी टोन्या हार्ट ने अस्पताल में हुई शादी को कोर्ट में चुनौती दी। बेटी का आरोप था कि उनकी मां उस वक्त फैसला लेने की हालत में नहीं थीं। साथ ही शादी का लाइसेंस भी गलत तरीके से लिया गया था। पहले एक कोर्ट ने लाइसेंस की गड़बड़ी को आधार बनाकर शादी को रद्द कर दिया था। हाल ही में केंटकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने उस फैसले को पलट दिया है और मामले को नए सिरे से जांच के लिए वापस भेज दिया है।

 

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जाने पूरा मामला?

जब बेट्टी अस्पताल में भर्ती थीं तब परिवार के अंदर ही काफी मतभेद चल रहे थे। उनकी बेटी टोन्या को कोर्ट से उनकी देखरेख का कानूनी हक मिला हुआ था। अदालत ने विल्सन और बेट्टी की दूसरी बेटी बारबरा के आने-जाने पर भी कुछ समय की बंदिशें लगा दी थीं। इसके बावजूद विल्सन ने बेट्टी से शादी करने का फैसला किया। विल्सन ने बाद में बताया कि वे दोनों इतने सालों तक केवल इसलिए शादी नहीं कर पाए थे क्योंकि बेट्टी को डर था कि शादी करने से उन्हें मिलने वाली सरकारी मदद बंद हो सकती है।

 

18 अगस्त को विल्सन अकेले जाकर काउंटी क्लर्क के ऑफिस से शादी का लाइसेंस ले आए। अगर नियम की मानें तो दोनों का वहां होना जरूरी था। इसके बाद 24 अगस्त को एक पादरी और कुछ गवाहों की मौजूदगी में अस्पताल के कमरे में शादी की रस्म निभाई गई। साथ ही शादी का प्रमाण पत्र जमा कराया गया। 8 सितंबर को बेट्टी का निधन हो गया।

मानसिक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे

शादी के समय बेट्टी की दिमागी हालत को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। उनके बेटे और बेटी का कहना था कि उनकी मां बीमारी की वजह से बहुत उलझन में रहती थीं। वे कभी-कभी अपनों को पहचान भी नहीं पाती थीं। शादी वाले दिन भी उनकी हालत ठीक नहीं थी।

 

इसके साथ ही शादी कराने वाले पादरी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर बेट्टी होश में नहीं होंगी तो वे शादी नहीं कराएंगे। उनके मुताबिक बेट्टी ने उन्हें पहचाना था और शादी के लिए सहमति जताई थी। गवाहों का भी यही कहना था कि वह उस समय होश में थीं।

 

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अपीलीय कोर्ट का नया आदेश

जुलाई 2025 में मोंटगोमरी सर्किट कोर्ट ने शादी को यह कहकर खारिज कर दिया था कि शादी का लाइसेंस नियम के खिलाफ जाकर जारी किया गया था। उस समय कोर्ट ने बेट्टी की दिमागी हालत पर कोई फैसला नहीं सुनाया था। अब अपीलीय कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि सिर्फ क्लर्क की गलती की वजह से किसी की मौत के बाद शादी को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि रस्म पूरी हुई थी और सर्टिफिकेट भी दर्ज किया गया था।

 

अदालत ने कहा कि अब निचली अदालत को सिर्फ इस बात की जांच करनी होगी कि क्या बेट्टी पर कोई दबाव था? साथ ही उनकी मानसिक स्थिति शादी के लिए सही थी या नहीं। इस जांच के बाद ही शादी के वैध होने या न होने का आखिरी फैसला लिया जाएगा।


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