फ्रांस की सरकार आजकल इन दिनों मुश्किलों से गुजर रही है। फ्रांस में बच्चों की आबादी तेजी से घट रही है। जनसंख्या दर भी कम हो रही है। साल 2023 में फ्रांस में सिर्फ 6,78,000 बच्चे पैदा हुए, जो 1946 के बाद से सबसे कम संख्या है। इसका मतलब है कि पिछले साल की तुलना में जन्म दर में 6.6% की भारी गिरावट आई है। इसी वजह से राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे एक 'नेशनल इमरजेंसी' की तरह लिया है और 29 साल के युवाओं के लिए एक नया प्लान पेश किया है।
फ्रांस में पिछले कुछ सालों से बच्चे पैदा होने की रफ्तार लगातार गिर रही है। साल 2010 में फ्रांस में प्रति महिला बच्चों का औसत 2.03 था, जो अब घटकर मात्र 1.68 रह गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी देश की आबादी को स्थिर रखने के लिए यह औसत कम से कम 2.1 होना चाहिए। अगर यह गिरावट ऐसे ही जारी रही, तो आने वाले समय में फ्रांस की कामकाजी आबादी बहुत कम हो जाएगी और बुजुर्गों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा।
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29 साल की उम्र पर ही इतना जोर क्यों?
सरकार ने 29 साल की उम्र को इसलिए चुना है क्योंकि फ्रांस में पहली बार मां बनने की उम्र अब 31 साल तक पहुंच गई है। सरकार चाहती है कि युवा 30 की उम्र पार करने से पहले ही अपनी सेहत और फर्टिलिटी की जांच करा लें। इसीलिए अब 18 से 25 साल के युवाओं के लिए फर्टिलिटी चेकअप बिल्कुल मुफ्त कर दिया गया ह। इसके अलावा, सरकार ने घोषणा की है कि वह एग फ्रीजिंग यानी भविष्य के लिए एग्स को सुरक्षित रखने वाले केंद्रों की संख्या 40 से बढ़कर 70 करेगी ताकि युवाओं के इलाज के लिए 6 से 12 महीने का लंबा इंतजार न करना पड़े।
रहन-सहन पर ध्यान
फ्रांस सरकार केवल सलाह नहीं दे रही, बल्कि वह इस पर पैसा भी खर्च कर रही है। फ्रांस की सरकारी स्वास्थ्य सेवा अब 29 से 37 वर्ष की महिलाओं के लिए एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया का पूरा खर्च खुद उठाती है। एक बार एग फ्रीजिंग कराने का खर्च लगभग 3,000 से 4,000 यूरो (करीब 2.7 से 3.6 लाख रुपये) तक आता है, जिसे अब सरकार कवर कर रही है। साथ ही, 'माई फर्टिलिटी' नाम की नई सरकारी वेबसाइट पर हर साल लाखों लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।
छुट्टियों और पैसों की नई स्कीम
जन्म दर सुधारने के लिए सरकार ने 'पेरेंटल लीव' यानी माता-पिता को मिलने वाली छुट्टी के नियमों में भी बड़े बदलाव किए हैं। अब माता-पिता को बच्चे के जन्म के बाद 6 महीने की छुट्टी मिल सकेगी, जिसमें उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा सैलरी का हिस्सा दिए जाएगा। पहले यह सिस्टम काफी पेचीदा था और पैसे भी कम मिलते थे, जिसके कारण 80% माता-पिता यह छुट्टी लेने से कतराते थे। सरकार को उम्मीद है कि इस आर्थिक मदद से लोग बच्चा पैदा करने का फैसला आसानी से ले पाएंगे।
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क्या कह रही है जनता?
भले ही सरकार इसे भलाई का काम बता रही है, लेकिन फ्रांस के लोग इससे पूरी तरह खुश नहीं हैं। काफी विरोध भी हो रहा है। बहुत सारी महिलाओं और युवाओं का कहना है कि बच्चा पैदा करना उनका निजी फैसला है और सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि वे बच्चे इसलिए नहीं कर रहे है क्योंकि महंगाई बहुत बढ़ गई है और घर खरीदना मुश्किल है। उनका कहना है कि सरकार को चिट्ठी भेजने के बजाय चीजों के दाम कम करने चाहिए।