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G4 से L69 तक, किस आधार पर UNSC में बदलाव की कवायद कर रहे ये देश?

रूस ने भी भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन दोहराया है। G4 और L69 देश बदलाव की कवायद क्यों कर रहे हैं, पढ़ें रिपोर्ट।

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद। Photo Credit: UNSC

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। स्थायी और अस्थायी सदस्य देश चाहते हैं कि बदलती भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों की वजह से अब सदस्यता का दायरा बढ़ाया जाए। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अब तक 100 से ज्यादा देशों ने एक मत से कहा है कि अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी ढांचे में बदलाव होना चाहिए।

रूस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि परिषद में किसी भी सुधार से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए, ना कि पश्चिमी देशों को नई सीटें दी जानी चाहिए।

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सर्गेई लावरोव, विदेश मंत्री,रूस:-
हमारा सैद्धांतिक रुख यह है कि UN सुरक्षा परिषद के सुधार में पश्चिमी देशों, खासकर जर्मनी और जापान को कोई अतिरिक्त सीट नहीं दी जा सकती, क्योंकि ये दोनों देश अभी सैन्यवाद और पुरानी नीतियों की वापसी के रास्ते पर हैं। हम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के पक्ष में हैं। हम स्थायी सीट के लिए ब्राजील और भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि हमें अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को भी पूरा करना होगा। 

सर्गेई लावरोव ने G4 और L69 समूहों के प्रतिनिधित्व को बेहतर करने की मांग हमेशा से की है। संयुक्त राष्ट्र में कुल 

G4 देश कौन हैं?

ग्रुप-4 या G4 देशों में ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान शामिल हैं। ये देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। इस समूह का भी मकसद सुरक्षा परिषद में सुधार करना है। 

L69 देश कौन से हैं?

L69 विकासशील देशों का समूह है। इस समूह में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका-कैरेबियन, एशिया और प्रशांत महासागर के द्वीपीय विकासशील देशों शामिल हैं। इस समूह का मकसद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता है। अस्थायी श्रेणी में भी ये देश, अपने लिए ज्यादा जगह चाहते हैं। इस समूह का नाम 2007-08 में पेश किए गए एक ड्राफ्ट दस्तावेज 'L.69' की वजह से पड़ा। उस वक्त इसमें 22 सदस्य देश थे, अब बढ़कर 42 हो चुके हैं। 

समूह की बैठकें नियमित होती हैं। कई बार महीने में एक बार बैठक हो जाती है। भारत का स्थायी मिशन इस समूह में सचिवालय की भूमिका निभाता है। भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, रवांडा, बुरुंडी, इथियोपिया, भूटान, वेनेजुएला, मंगोलिया, निकारागुआ, फिजी, पापुआ न्यू गिनी, पलाऊ, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस, बहामास और सेशेल्स जैसे देश इस समूह में शामिल हैं।

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UNSC के मौजूदा ढांचे से दिक्कत क्या है?

चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य है। इन देशों के पास ही सिर्फ वीटो पावर है। इन देशों का आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य प्रभाव पिछले दशकों में इतना बढ़ चुका है कि सुरक्षा परिषद में इनकी मनमानी चलती है।

G4 को ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे कुछ स्थायी सदस्यों का समर्थन मिला है लेकिन लेकिन इटली के नेतृत्व वाला 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' गठबंधन और जापान के मामले में चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देश इसका विरोध करते हैं। चीन को भारत की भी स्थायी सदस्यता से दिक्कत है।

भारत दुनिया की आर्थिक और सैन्य महाशक्तियों में से एक है, फिर भी इस समूह से बाहर है। यह सुधार प्रस्ताव आज तक लागू नहीं हो पाया है। G4 देश कवायद करते ही रह जाते हैं लेकिन स्थायी सदस्यो में से कुछ देशों के एतराज की वजह से मामला अटक जाता है। 

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किस आधार पर स्थायी सीट चाहते हैं ये देश?

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सीटें हैं। चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका 5 स्थायी सदस्य हैं जो हमेशा रहते हैं। इन्हीं देशों के पास वीटो पावर भी है। 10 सीटें अस्थायी सदस्यों की हैं, जिन्हें महासभा दो-दो साल के लिए चुनती है। परिषद की इस संरचना में किसी भी बदलाव के लिए महासभा में 2-तिहाई बहुमत और सभी 5 स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी होती है।

G4 किस आधार पर चाहते हैं स्थायी सदस्यता?

चौधरी चरण विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर निखिल गुप्ता ने कहा, 'G4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। यह समूह खुद के लिए स्थायी सदस्यता की मांग करता है। इसका मुख्य तर्क यह है कि ये चारों देश जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, वैश्विक योगदान और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत तो महाशक्तियों में भी शुमार है। दलील है कि इन्हें स्थायी सीट मिलनी चाहिए। जर्मनी और जापान की दावेदारी को रूस खारिज करता है। वजह यह है कि जापान के सैन्यवाद और पुरानी नीतियों की वापसी से रूस डरता है। भारत और ब्राजील की उम्मीदवारी पर दिक्कत सिर्फ चीन को है। 

यह भी पढ़ें: UNSC में 8 बार पहुंचा भारत, फिर भी क्यों चाहिए स्थायी सीट? जानिए इनसाइड स्टोरी

L69 किस आधार पर बदलाव चाहता है?

निखिल गुप्ता ने बताया, 'L69 ग्रुप किसी खास देश के लिए सीट नहीं मांगता, बल्कि पूरी परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग करता है। इसका आधार यह तर्क है कि UNSC अब भी साल 1945 की दुनिया का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जबकि भौगोलिक और आर्थिक सीमाएं कहीं ज्यादा बदल गईं हैं। अफ्रीकी नेता बार-बार यह बात उठाते रहे हैं कि 1.6 अरब से ज्यादा आबादी वाले अफ्रीकी महाद्वीप के पास अब भी कोई स्थायी सीट नहीं है।

दोनों समूहों की मांग एक जैसी क्यों हैं?

G4 और L69 के तर्कों में एक समानता यह है कि दोनों ही परिषद को ज्यादा जवाबदेह, प्रतिनिधित्व वाल और पारदर्शी बनाने की बात करते हैं। रूस जैसे देशों ने भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है। दोनों समूह चाहते हैं कि पश्चिमी देशों को अतिरिक्त सीट देने के बजाय एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 

क्यों पूरी नहीं हो पाती है यह मांग?

निखिल गुप्ता ने बताया, 'UNSC के ढांचे में किसी भी बदलाव के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत, दो-तिहाई सदस्य देशों की मंजूरी और सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों यानी चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका की सहमति जरूरी होती है। किसी भी मुद्दे पर, किसी भी स्थायी सदस्य का वीटो, पूरी प्रक्रिया को रोक देता है। यह अलोकतांत्रिक ढांचा है, जो बदलना चाहिए। यही सबसे बड़ी अड़चन है।'

 

एक मुश्किल यह भी है कि G4 और L69 जैसे समूहों में भी आपस में पूरी सहमति नहीं बन पाती। कुछ देश जर्मनी और जापान को सीट देने का विरोध करते हैं। अफ्रीकी देशों के बीच भी इस बात पर मतभेद रहता है कि स्थायी सीट किस देश को मिले। पिछले कई दशकों से UNSC में सुधार पर चर्चा खूब हुई लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई।

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