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'कहीं अखंड भारत का हिस्सा न बना दे', UAE-भारत के बढ़ते संबंध से पाकिस्तान परेशान

पाकिस्तान ने यूएई और भारत के बीच गहरे होते संबंधों को लेकर चिंता जतायी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंध परेशानी की कारण बन सकते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated

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पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने मंगलवार को कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गहरे होते रिश्ते से भविष्य में बड़े भू-राजनीतिक प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि दोनों देशों के बढ़ते संबंध पाकिस्तान के लिए समस्या बन सकते हैं।

 

दुनिया न्यूज से बात करते हुए मुशाहिद हुसैन ने पाकिस्तान के यूएई को अरबों डॉलर के कर्ज चुकाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह कर्ज चुकाना कोई मजबूरी नहीं है, बल्कि यह एक 'मुसीबत में फंसे भाई' की मदद है। उन्होंने दावा किया कि यूएई क्षेत्रीय संघर्षों और विदेश में पैसे भेजने के कारण परेशानी में है। इसलिए पाकिस्तान को ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हुए उसकी मदद करनी चाहिए।

 

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कहा- पाकिस्तान से हैं संबंध

मुशाहिद हुसैन ने कहा कि शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के समय से पाकिस्तान और यूएई के पुराने संबंध हैं। पाकिस्तान ने यूएई को बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसमें उसके सैनिकों को प्रशिक्षण देना भी शामिल था। 

 

उन्होंने कहा, 'अब वे फंस गए हैं और लाचार हो गए हैं।' उन्होंने यूएई के यमन और सूडान जैसे संघर्षों में शामिल होने और विदेश में बड़े वित्तीय खर्च का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हवाला देते हुए कहा कि खाड़ी देश से बड़ी मात्रा में पैसा बाहर जा रहा है। उन्होंने भारत में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीयों की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी, 'ध्यान रखें कि उनके साथ दोस्ताना संबंध आपको अखंड भारत का हिस्सा न बना दें।'

3.5 अरब डॉलर की उधारी

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान यूएई को करीब 3.5 अरब डॉलर लौटाने की तैयारी कर रहा है। यह पैसा 2019 में अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए पाकिस्तान को बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (भुगतान संतुलन) के लिए दिया गया था। पाकिस्तानी अधिकारी इसे 'राष्ट्रीय गरिमा' का मामला बता रहे हैं। हालांकि, इस चुकौती से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, जो फिलहाल करीब 16.3 अरब डॉलर के आसपास है।

 

यह चुकौती अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के साथ भी जुड़ी हुई है। इसमें चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे सहयोगियों से अरबों डॉलर की बाहरी मदद जुटानी होगी।

वॉशिंगटन से भी आलोचना

इसी बीच, वॉशिंगटन से भी पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति की आलोचना हो रही है। पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को कमतर बताते हुए कहा कि पाकिस्तान अक्सर अपनी ताकत बढ़ा-चढ़ाकर बताता है और ईरान संकट से जुड़ी किसी भी अमेरिकी कार्रवाई में इसका कोई खास रोल नहीं होगा।


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क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर धमकी दी है। ऐसे में पाकिस्तान को वित्तीय दबाव, क्षेत्रीय गठबंधनों और कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

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