ईरान में बीते कई दिनों से लगातार भारी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ये प्रदर्शन बिना रुके चल रहे हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए उनसे आंदोलन जारी रखने की अपील की है। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों में से एक युवक को फांसी दिए जाने की तैयारी की जा रही है। इस युवक का नाम इरफान सोल्तानी बताया जा रहा है।
26 वर्षीय इरफान सोल्तानी को 8 जनवरी को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। वह सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल था, इसी कारण उसे हिरासत में लिया गया।
इरफान सोलतानी ईरान के कराज शहर के फर्दिस इलाके का 26 वर्षीय युवक है। उस पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आरोप है, जिसके चलते उसे हिरासत में लिया गया था। ईरानी अदालत ने उस पर ‘मोहरेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जो ईरानी कानून में मौत की सजा वाला अपराध माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को उनको फांसी दी जा सकती है। इरफान को 8 जनवरी को हिरासत में लिया गया था और केवल चार दिनों के भीतर उसके परिवार को मौत की सजा की जानकारी दे दी गई।
मोहरेबेह यानी मौत की सजा, Photo Credit: Notebook LM
इरफान को तेहरान के पास हो रहे प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उसे न तो वकील की सुविधा दी गई और न ही निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिला। परिवार को 11 जनवरी को सजा की सूचना दी गई और सिर्फ 10 मिनट की मुलाकात की अनुमति दी गई। हेंगाओ मानवाधिकार संगठन समेत कई संगठनों का आरोप है कि हिरासत में लिए जाने के साथ ही इरफान को उसके बुनियादी कानूनी अधिकारों से वंचित कर दिया गया।
कानूनी सलाह पर रोक
उसे कानूनी सलाह लेने और अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि इरफान को किस कारण और किस एजेंसी ने गिरफ्तार किया। इरफान की बहन खुद एक वकील हैं लेकिन उन्हें केस दर्ज करने, कानूनी प्रतिनिधित्व करने या सजा को चुनौती देने से रोक दिया गया।
नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी इन ईरान (NUFD) के अनुसार, इरफान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि उसकी फांसी की सजा रोकी जाए। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है लेकिन इरफान पहला व्यक्ति होगा जिसे फांसी की सजा दी जाएगी। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि सरकार प्रदर्शनकारियों में डर फैलाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है और यह सार्वजनिक फांसी की शुरुआत भी हो सकती है। 8 जनवरी से ईरान में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, जिससे सही जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है।
सार्वजनिक फांसी की शुरुआत, Photo Credit: Notebook LM
ईरान ह्यूमन राइट्स संगठन ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। 28 दिसंबर को खराब आर्थिक हालात के विरोध में शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्द ही सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। विशेषज्ञों का मानना है कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह ईरान के धार्मिक शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।