अमेरिका के भारी दबाव के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम हो चुका है। हालांकि लेबनान पर इजरायल की भीषण बमबारी जारी है। इजरायली सेना के मुताबिक हिजबुल्लाह के 150 अधिक ठिकानों पर बमबारी की गई है। दर्जनों लड़ाकों को मारा गया है। उत्तर इजरायल में विमानों की घुसपैठ के बाद अलर्ट जारी किया गया है। इजरायली सेना का कहना है कि उत्तरी इजरायल में ज्रेइट के आसमान में शत्रु विमान की घुसपैठ का पता चला है।
इजरायल की सेना ने एक पोस्ट में बताया कि आधी रात से उसने हिजबुल्लाह के 150 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी की। दर्जनों लड़ाकों को मारा। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर बनी सहमति के बाद लेबनान पर इजरायल का यह सबसे भीषण हमला है। इजरायली सैन्य प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने कहा कि इजरायली सेना हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।
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शुक्रवार को इजरायली बमबारी में लेबनान में 47 लोगों की जान गई। 97 अन्य लोग घायल हुए। मृतकों में दो बच्चे और सात महिलाएं शामिल हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक किया। हालांकि यह नहीं बताया कि इनमें हिजबुल्लाह से जुड़े लड़ाके कितने थे। वहीं इजरायल को अपने चार सैनिकों को खोना पड़ा है।
शाम 4 बजे से युद्धविराम लागू!
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल और हिजबुल्लाह स्थानीय समयानुसार शुक्रवार शाम 4 बजे से युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। हिजबुल्लाह से जुड़े दो सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की। वहीं न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने बताया कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर हो चुका है। अधिकारी ने यह भी साफ किया कि इजरायली सेना लेबनान से वापस नहीं आएगी। हालांकि हिजबुल्लाह वापसी पर जोर दे रहा है।
युद्धविराम में ईरान ने निभाई भूमिका
ताजा युद्ध विराम की खास बात यह है कि इसमें लेबनान के अलग-थलग रखा गया। अमेरिका और कतर ने अबकी इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम कराने में तेहरान की मदद ली। पहले लेबनान के माध्यम से युद्धविराम किया गया था। यही वजह है कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने इजरायली हमलों की निंदा की और चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने युद्ध छेड़ा तो गंभीर परिणाम होंगे।
तो क्या टूट जाएगा अमेरिका-ईरान समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का अस्थायी युद्धविराम हो चुका है। मगर ईरान शर्तों के मुताबिक लेबनान में इजरायली हमले बंद कराने पर अड़ा है। इजरायल का कहना है कि किसी भी खतरे की स्थिति में उसकी सेना हमला करेगी। दूसरी मांग यह है कि लेबनान के भीतर घुसी इजरायली सेना तत्काल वापस लौटे। हिजबुल्लाह और ईरान दोनों इसी पर अड़े हैं। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि उसकी सेना वापस नहीं लौटेगी।
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इजरायली सेना के मुताबिक दक्षिणी लेबनान में उसकी सेना 10 किमी से भी ज्यादा भीतर तक घुस चुकी है। लिटानी नदी के दक्षिण में स्थित अधिकांश भूभाग पर इजरायल ने अपना वर्चस्व जमा लिया है। विश्लेषकों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर दोनों पक्ष अड़े रहते हैं तो किसी भी वक्त सीजफायर टूट सकता है।