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24 दिनों की जंग, सिर्फ तबाही, ईरान से जंग हारे ट्रंप-नेतन्याहू? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका, ईरान में अपनी ताकत झोंक चुका है। डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह युद्ध भारी पड़ रहा है। इजरायल की मंशा अभी जंग खत्म करने की नहीं है।

Benjamin Netanyahu and Donald Trump

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

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अमेरिका, इजरायल और ईरान की जंग थम नहीं रही है। 24 दिनों बाद भी हालात वैसे ही हैं, जैसे 28 फरवरी को जंग के पहले दिन थे। इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं, जवाब में ईरान येरुशलम और खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को तबाह कर रहा है। अब ईरान, खाड़ी के देशों में मोजूद पेट्रोलियम संसाधनों को खत्म करने की योजना बना रहा है। यह जंग, अब डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि खत्म हो, निर्णायक फैसला हो, इजरायल की दूर-दूर तक ऐसी मंशा नहीं हैं।

ईरान ने लगातार  इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और पड़ोसी देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए हैं। इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, खाड़ी में तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। मध्य पूर्व में असुरक्षा अपने चरम पर है। अमेरिकी सैनिकों और आम  नागरिकों की भी मौत हुई है। 24 घंटे में जंग खत्म कर 'सत्ता व्यवस्था' बदलने का दावा करने वाले ट्रंप, 23 दिन बाद भी जंग नहीं खत्म कर पाए हैं, न ही अगले 23 दिनों में ऐसा होता नजर आ रहा है। 

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अमेरिका में महंगा हो गया तेल

अमेरिका ने युद्ध जल्द खत्म करने की बात कही है, लेकिन इजरायल ज्यादा हमले जारी रखना चाहता है। तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल महंगा हो गया है। अमेरिका इस जंग में अपनों की नाराजगी झेल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

ट्रंप जल्द युद्ध खत्म करना चाहते हैं, इजरायल नहीं

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन उन्होंने कोई साफ समयसीमा नहीं बताई। इजरायल ने कहा है कि वह ईरान पर और ज्यादा हमले बढ़ाएगा। इजरायल लेबनान बॉर्डर से हिजबुल्लाह को भी हटाने की कोशिश कर रहा है, जिससे लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं। अमेरिका उसमें भी सीधे शामिल नहीं है। इजरायल, जंग जारी रखना चाहता है, डोनाल्ड ट्रंप, अब खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।

मसूद पेजेश्कियन, राष्ट्रपति, ईरान:-
ईरान को दुनिया के मानचित्र से मिटाने का भ्रम एक इतिहास रचने वाले राष्ट्र की इच्छा के खिलाफ हताशा को दिखा रहा है। धमकियां और आतंक केवल हमारी एकता को मजबूत करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट उन लोगों को छोड़कर सभी के लिए खुला है, जो घुसपैठ करते हैं। हम युद्ध के मैदान में इन बेबुनियाद धमकियों का मजबूती से सामना करेंगे।

Strait of Hormuz
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं अमेरिका। Photo Credit: PTI

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तेल और गैस ठिकाने हो रहे हैं तबाह

अमेरिका और इजरायल ने ईरान की तेल और गैस प्लांट पर हमले शुरू किए हैं। साउथ पार्स गैस फील्ड को इजरायल ने तबाह किया है। ईरान ने जवाब में कतर समेत अन्य देशों की एनर्जी साइट्स पर हमले किए हैं। इससे दुनिया में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। अमेरिका ने कुछ ईरानी तेल पर पाबंदी हटाने की बात कही है, जिससे कीमतें कम हों

अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर 200 अरब डॉलर का बोझ

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब जंग के लिए अमेरिका को कांग्रेस से 200 अरब डॉलर अतिरिक्त मांगने पड़ेंगे। राष्ट्रीय कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने यहां तक कहा है कि बुरे लोगों को मारने के लिए पैसा लगता है।

खाड़ी के देशों में नहीं थम रही है तबाही। Photo Credit: PTI

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ईरान की सेना तबाह, सरकार बरकरार

अमेरिका-इजरायल ने दावा किया है कि ईरान की मिसाइल, एयर फोर्स और नेवी ज्यादातर नष्ट हो चुकी है। हजारों टारगेट हिट किए गए, कई जहाज डुबोए गए। ईरान की सरकार अभी भी चल रही है। नए सुप्रीम लीडर के तौर पर खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना गया है। वह सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। अमेरिका का दावा है कि वह जख्मी हो चुके हैं। 

ईरान, तेल डिप्लोमेसी से अमेरिका को हराएगा?

ईरान ने होर्मुज ब्लॉक करने की कोशिश की, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है। ईरान ने कई तेल टैंकरों पर हमले किए। इससे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। अमेरिका में गैस की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। इस जंग से अमेरिका भी परेशान है और भारत जैसे देश भी।

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ईरान ने पड़ोसियों पर भी हमले किए

ईरान ने सिर्फ अमेरिका-इजरायल पर नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे कई पड़ोसी देशों पर ड्रोन-मिसाइल हमले किए। इससे खाड़ी के देशों में बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिका के प्रति भरोसा भी कम हुआ है।

दुबई के एयरपोर्ट तक, ईरान के निशाने पर हैं। Photo Credit: PTI

अमेरिकी सैनिकों की मौत और ग्राउंड फोर्स

कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले से 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए, इराक में एक रिफ्यूलिंग प्लेन क्रैश से 6 और मौतें हुईं हैं। अमेरिका ने कहा है कि यह सिर्फ हवाई जंग हो रही है लेकिन अब मरीन यूनिट्स भेजी जा रही हैं। ट्रंप ने जमीन पर सैनिक नहीं भेजने की बात कही है। हालात ऐसे ही रहे तो उन्हें अपनी सेना उतारनी पड़ सकती है। 

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अमेरिका अकेला, इजरायल नाकाम, क्या-क्या हुआ?

डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और अन्य देशों से होर्मुज में मदद मांगी, लेकिन किसी ने अमेरिका की मदद करने की नहीं ठानी। कई देशों ने अमेरिका का प्रस्ताव ही ठुकरा दिया। डोनालड् ट्रंप ने इन देशों को कायर कहा है। इजरायल भी कमजोर हुआ है लेकिन अकेले ही जंग जारी रखने की बात दोहरा चुका है। बेंजामिन नेतन्याहू ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। उन्हें कामयाबी नहीं मिली है।

रूस के तेल से प्रतिबंध हटा रहे ट्रंप

जंग का असर ऐसा हुआ है कि अमेरिका, रूसी तेल से प्रतिबंध हटा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक भी अमेरिका ने टाल दी है। 


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