पिछले महीने BRICS सम्मेलन का आयोजन भारत की राजधानी दिल्ली में हुआ था। इस सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान शामिल नहीं हुए थे। इसी को लेकर अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि ऐसे फैसले बांग्लादेश के हित में नहीं हैं। उन्होंने तारिक रहमान को नसीहत देते हुए कहा है कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए अवसरों के दरवाजे खोलने चाहिए ना कि उन्हें बंद करना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां फिर से कट्टरपंथी हावी हो गए हैं।
बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना पहले ही एलान कर चुकी हैं कि वह अपने देश जरूर लौटेंगी। अब उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए लोकतंत्र की बहाली, वोटिंग अधिकार और कानून के राज की बहाली के संघर्ष का हिस्सा है। उनका कहना है कि जब वह बांग्लादेश लौटेंगी तो यह बांग्लादेश को उसके लोगों को लौटाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
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तारिक रहमान को बताया अपरिपक्व
पीटीआई-भाषा को दिए इंटरव्यू में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तारिक रहमान के इस फैसले को अपरिपक्व बताया और कहा कि इससे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा। उनके मुताबिक विदेश नीति के फैसले निजी प्रतिक्रिया या फौरन राजनीतिक लाभ देखकर लेना नुकसानदेह है।
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की भागीदारी से आर्थिक और सामाजिक विकास के नए अवसर खुल सकते थे। उनके मुताबिक इस प्रभावशाली समूह के सम्मेलन में शामिल न होकर बांग्लादेश ने यह मौका गंवा दिया। हसीना के मुताबिक ब्रिक्स केवल राजनयिक सम्मेलन नहीं, बल्कि प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच है।
बांग्लादेश को क्यों मिला था न्योता?
दरअसल, भारत ने BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को BRICS सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया था। यह समूह बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बनाया गया है। हालांकि, तारिक रहमान ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए इस सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
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इसी को लेकर अब शेख हसीना ने कहा है कि तारिक रहमान अगर नई दिल्ली में उनकी (शेख हसीना की) मौजूदगी की वजह से नहीं गए, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक दो देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति के निजी या राजनीतिक पहलुओं पर तय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार सरकार को देश के लिए अवसरों के दरवाजे खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए।
शेख हसीना ने आगे कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बांग्लादेश ने सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फैसला किया। मेरी राय में यह एक अपरिपक्व फैसला था, जो बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित में नहीं था।' उनके मुताबिक, इसमें हिस्सा लेकर बांग्लादेश अहम अनुभव हासिल कर सकता था। हसीना के मुताबिक ब्रिक्स व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक और विकास के क्षेत्रों में सहयोग के मौके देता है। उन्होंने कहा कि इस मंच पर बांग्लादेश अपने आर्थिक और सामाजिक विकास के नए अवसर तलाश सकता था। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश नीति निजी प्रतिक्रिया या तुरंत राजनीतिक लाभ को देखकर नहीं चलाई जा सकती।