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खालिदा जिया के बेटे तारिक की 17 साल बाद घर वापसी, भारत पर क्या होगा असर?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की 17 साल बाद घर वापसी होने जा रही है।

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तारिक रहमान। (Photo Credit: X@trahmanbnp)

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बांग्लादेश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 'जुलाई विद्रोह' के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद से वहां हिंसा हो रही है। बांग्लादेश में जारी संकट के बीच पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की घर वापसी होने जा रही है। तारिक रहमान 17 साल से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। अब वह बांग्लादेश वापस लौटने वाले हैं। बताया जा रहा है कि तारिक रहमान 25 दिसंबर को आने वाले हैं।

 

तारिक रहमान की वापसी ऐसे वक्त हो रही है, जब बांग्लादेश में हिंसा चरम पर है और दो महीने में वहां चुनाव भी होने वाले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के बाहर होने से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को अच्छा मौका मिल सकता है। तारिक रहमान BNP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और लंदन से ही पार्टी का काम संभाल रहे हैं।

 

शेख हसीना की सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में खालिदा जिया को जेल हो गई थी। उनके बेटे तारिक रहमान लंदन चले गए थे। अब खालिदा जिया जेल से बाहर आ गई हैं तो तारिक भी घर वापसी करने जा रहे हैं। तारिक 2008 से अपने परिवार के साथ लंदन में रह रहे हैं।

 

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क्यों वापस लौट रहे हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान 17 साल से लंदन में रह रहे थे। अब 25 दिसंबर को वह बांग्लादेश लौट रहे हैं। पिछले महीने ही उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश लौटना उनकी 'इच्छा' पर निर्भर नहीं करता।

 

BNP नेता अक्सर 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देते आए हैं। वहीं, सरकार कहती है कि वह तारिक रहमान की वापसी में कोई बाधा नहीं डालेगी।

 

अब तारिक रहमान की वापसी इसलिए जरूरी हो गई थी, क्योंकि बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद यह पहले चुनाव हैं। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के यह चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। इससे BNP की राह आसान हो गई है।

 

खालिदा जिया बीमार हैं। लिहाजा अब पार्टी का दारोमदार तारिक रहमान पर ही है। तारिक रहमान की वापसी से BNP कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ जाएगा और चुनाव में उसे काफी मदद मिल सकती है।

 

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चुनाव लड़ने की है तैयारी

तारिक रहमान अब खुद को और अपनी पार्टी को 'लोकतंत्र का समर्थक' दिखा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, 'अब लोकतंत्र ही हमें बचा सकता है। BNP का हर सदस्य, लोकतंत्र की नींव को मजबूत कर सकता है।'

 

माना जा रहा है कि फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव में खालिदा जिया और तारिक रहमान, दोनों ही लड़ेंगे। खालिदा जिया बोगुरा-7 तो तारिक बोगुरा-6 सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। खालिदा जिया 1991 से 2008 तक बोगुरा-6 सीट से सांसद थीं।

 

हालांकि, शेख हसीना की पार्टी के मैदान में नहीं होने से BNP के लिए चुनाव भले ही थोड़ा आसान हो गया हो लेकिन रास्ता उतना आसान भी नहीं है।

 

इस चुनाव में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। इसके अलावा, 'जुलाई विद्रोह' से एक और नई राजनीतिक पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी का उदय भी हुआ है, जिसके नेता नाहिद इस्लाम हैं। नाहिद इस्लाम जुलाई विद्रोह के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। वह मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे लेकिन इसी साल उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

 

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भारत के लिए क्या हैं मायने?

जब से शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ है, तब से भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते खराब ही हुए हैं। बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना भी बढ़ी है।

 

बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता होना भारत के लिए फायदे का सौदा रही है। वहां किसी दूसरी और पार्टी की सत्ता में आना भारत के लिए झटका हो सकती है।

 

फरवरी में होने वाले चुनाव में अगर BNP सत्ता में आती है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनते हैं तो भी भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधरने की गुंजाइश नहीं है। तारिक रहमान कह चुके हैं कि अगर उनकी सरकार बनती हैं तो 'बांग्लादेश प्रथम' की नीति अपनाई जाएगी।

 

जब हसीना सरकार का तख्तापलट हुआ था, तब BNP को युनूस सरकार का समर्थक माना गया था। हालांकि, कुछ महीनों में समीकरण तेजी से बदले हैं। अब BNP भी युनूस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है।

 

हालांकि, तारिक रहमान की वापसी से बांग्लादेश के चुनावों पर काफी असर पड़ने की संभावना है। उनकी वापसी से जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी पार्टियों को नुकसान पहुंच सकता है। यही कारण है कि अस्थिरता का हवाला देते हुए जमात-ए-इस्लामी चुनावों को टालने की मांग कर रही है।


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