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अब ईरान का क्या! अमेरिकी-इजरायली हमले में खामेनेई और बेटी समेत परिवार खत्म

अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर है। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दी हैं।

Ali Khamenei

अली खमेनेई, Photo Credit- Social Media

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मिडिल ईस्ट में दशकों बाद सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान में किए गए एक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई है। ट्रंप ने इसे ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा मौका बताया है। इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद और पोते की भी जान चली गई है। 

 

इजरायल ने भी इस बात की पुष्टि की हैं कि 86 वर्षीय खामेनेई अब जीवित नहीं हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मौत की पुष्टि नहीं की है लेकिन उनके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने 'ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4' के तहत इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला बोल दिया है। 

 

यह भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत, इजरायल-ट्रंप का दावा

हमले की बड़ी बातें

तेहरान में सुबह करीब 9:30 बजे खामेनेई के घर, लीडरशीप हाउस के पास भीषण धमाके हुए। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक यह बेहद शक्तिशाली हमला था जिसने पूरे परिसर को बर्बाद कर दिया। ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका भी इस ऑपरेशन में शामिल था। इस हमले के बाद ईरान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल को इस हमले की बुरी कीमत चुकानी पड़ेगी। 

खबरों की मानें तो इस हमले में सिर्फ खामेनेई ही नहीं बल्कि उनकी बेटी, दामाद और पोते की भी जान चली गई है। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि परिवार के कई सदस्य इस हमले के शिकार हुए हैं।

ईरान का जवाबी हमला

ईरान ने इजरायल पर करीब 150 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इसके अलावा बहरीन, कतर, कुवैत और यूएई में मौजूद अमेरिकी नौसेना और वायु सेना के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। हालांकि, अमेरिकी का दावा है कि उन्होंने ज्यादातर हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया है।

 

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ईरान में नेतृत्व का संकट

खामेनेई 1989 से ईरान की सत्ता संभाल रहे थे। उनकी मौत के बाद अब वहां सत्ता संभालने वाला कोई साफ चेहरा सामने नहीं है। खबरें हैं कि IRGC जल्दबाजी में नया नेता चुनने की कोशिश कर रही है लेकिन युद्ध के माहौल में संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

 

इसमें ईरान के भीतर 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं, दुबई और कुवैत जैसे शहरों में भी मिसाइलों के मलबे गिरने से इमारतों में आग लगने और नागरिकों के घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। इसकी वजह से कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने की चेतावनी दी है जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।


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