सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष अगले चरण में दाखिल होने की कगार पर है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि तुर्की और पाकिस्तान संघर्ष में शामिल होने के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं।
24 सितंबर को न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने अपने सऊदी समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। तीनों नेताओं ने मक्का रक्षा समझौते के तहत महासचिव सचिवालय, समितियों और कार्य समूहों की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति के अलावा उनकी गतिविधियों पर चर्चा की। तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद ही सैन्य प्रमुखों की बैठक बुलाई गई।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और तुर्की के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सेलचुक बायराकतारोग्लू रियाद में आयोजित होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे। यहां उनकी मुलाकात सऊदी सेना प्रमुख से होगी। बैठक में मक्का रक्षा समझौते को लागू करने के तरीके पर चर्चा होगी।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक यह सैन्य बैठक आपात में बुलाई गई है। सऊदी अरब ने अपने दोनों सहयोगी देशों से सैन्य प्रमुखों की बैठक बुलाने का आग्रह किया था। अपने बयान में सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को समर्थन देने के तरीकों का पता लगाने के लिए एक आपातकालीन चीफ ऑफ स्टाफ बैठक की व्यवस्था पर चर्चा की गई।
पाकिस्तान और तुर्की के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सऊदी अरब को समर्थन देने वाली बात का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने समझौते को संस्थागत रूप देने की दिशा में चल रही तकनीकी वार्ताओं और समीक्षा का जिक्र जरूर किया।
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पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में सऊदी अरब के साथ मिलकर मक्का रक्षा समझौता किया था। सितंबर में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमलों की व्यापक अभियान शुरू की। कई तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रियाद तक मिसाइल और ड्रोन दागे। व्यापक संघर्ष के बावजूद पाकिस्तान और तुर्की ने अभी तक सऊदी अरब को कोई प्रत्यक्ष सैन्य सहयोग नहीं दिया है। इसके बाद से ही दुनियाभर में मक्का समझौते की व्यवहारिकता पर सवाल उठने लगे थे। अब इन देशों पर समझौते की विश्वसनीयता को भी कायम रखने का दबाव है।
तुर्की और पाकिस्तान खुलकर हूती विद्रोहियों का नाम लेने से बच रहे हैं। दोनों ही देशों को संघर्ष में घसीटे जाने का डर सता रहा है। इसका संकेत खुद हूती विद्रोहियों ने दिया था। विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने हाल ही में कहा था कि अगर पाकिस्तान और तुर्की युद्ध का हिस्सा बनते हैं तो उनसे कठोर हाथों से निपटा जाएगा।