नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को जिंदा बचा लिया गया है। पहले शख्स का नाम संजय शाह है, जो परियोजना में मैकेनिकल फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। दूसरे शख्स हैं कबीर महर्जन, जो मैकेनिकल सुपरवाइजर थे। संजय साह के लिए यह दूसरी जिदगी से कम नहीं था, उन्होंने बताया कि वह जिंदगी और मौत के बीच अनिश्चित इंतजार करते हुए 'हरे कृष्ण महामंत्र' का जाप करते रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बचाव अभियान एक अहम कामयाबी के बाद चलाया गया था जिसमें बचाव दल के लोगों ने सुरंग के अंदर से आवाजें सुनीं और वहां फंसे लोगों से संपर्क साधा। आवाजें सुनाई देने के बाद नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स ने उन तक पहुंची और उन्हें बचा लिया। संजय सिंह से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अभी भी टनल के भीतर कई अन्य जिंदगियां जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं।
कैसे किया गया रेस्क्यू?
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के विधायक राम न्यौपाने ने कहा कि पुलिस और आर्मी की टीम ने कुछ दिन पहले टनल के अंदर से आवाजें सुनीं, जिससे उम्मीद जगी कि फंसे हुए मजदूर जिंदा हैं। फिर उनसे संपर्क साधा गया। आवाजें सुनाई देने के बाद नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स ने उन तक पहुंचने की कोशिशें तेज कर दी। बचाव दल ने आवाज लगाई कि घबराएं नहीं हम आपको बचाने आए हैं, अंदर से जवाब मिला ठीक है।
बचाव कर्मियों ने पुष्टि की है कि अंदर एक से ज्यादा लोग फंसे हैं। 26 अगस्त को त्रिशूली नदी घाटी में अचानक आई बाढ़ से 1,294 लोगों की मौत हो गई और पनबिजली परियोजनाओं और मुख्य सड़क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा है। उसके बाद से खोज दल मुश्किल हालात में उन लोगों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं जो सुरंगों और अन्य ढांचों में फंसे हो सकते हैं।
संजय ने क्या बताया?
संजय ने बताया कि जैसे ही बाढ़ का पानी और मलबा टनल में घुसने लगा हालात बिगड़ने लगे। संजय ने बताया कि एक सीनियर अधिकारी होने के नाते 'कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी मेरी थी, इसलिए सबको बचाने की जिम्मेदारी भी मेरी थी। बाकी लोगों को सुरक्षित जगहों की ओर भेजा, लेकिन इसी चक्कर में वे खुद टनल के अंदर करीब 170 मीटर की दूरी पर 3 से 4 लोगों के साथ फंस गए'
9 दिनों तक अंधेरे में बिना खाए-पिए जिंदा रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे लगातार 'हरे कृष्ण महामंत्र' का जाप करते रहे, जिससे उन्हें जिंदा रहने की ताकत मिली, 'मैं पूरे समय महामंत्र का जाप करता रहा।'