यूरोपीय देश पोलैंड में गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और राष्ट्रपति कारोल नावरोकी के बीच सत्ता को लेकर टकराव बढ़ गया है। शुक्रवार रात राजधानी वारसॉ में स्थित संवैधानिक ट्रिब्यूनल के मुख्यालय को भारी पुलिस बल और हथियारों से लैस सुरक्षा कर्मियों ने घेर लिया।
यह तब हुआ जब देश के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी सेनेगल की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे थे, उन्होंने अपनी यात्रा बीच में ही रोक दी और बीच रास्ते से ही वापस वारसॉ लौट पड़े। इसपर विपक्ष ने टस्क सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और तख्तापलट जैसे हालात पैदा करने का आरोप लगाया है।
यह भी पढ़ें: अलास्का में एक ही नाम के 3 कैंडिडेट, भड़के ट्रंप ने दिए जांच के आदेश
कोर्ट ने कहा तख्तापलट जैसे हालात
सरकार और राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी गुट के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। देश के संवैधानिक न्यायाधिकरण (constitutional tribunal) के मुख्य न्यायाधीश बोगदान स्विएचकोव्स्की को सस्पेंड किए जाने के बाद, वहां दंगा-रोधी पुलिस तैनात कर दी गई। स्विएचकोव्स्की को हटाए जाने के विरोध में विपक्षी 'लॉ एंड जस्टिस' पार्टी (PiS) के समर्थक कोर्ट की इमारत के बाहर जमा हो गए, जहां दर्जनों पुलिसकर्मी तैनात थे।
कोर्ट के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटनाक्रम को तख्तापलट (coup d'etat) करार दिया गया और दावा किया गया कि स्विएचकोव्स्की अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं।
सरकार और राष्ट्रपति के बीच टकराव क्यों बढ़ा?
यह विवाद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी पार्टी PiS के बीच चल रही लड़ाई का हिस्सा है। यह लड़ाई न्यायाधीशों की नियुक्ति और अदालतों की स्वतंत्रता को लेकर है। PiS की सरकार के कार्यकाल में यूरोपीय संघ ने कई बार चिंता जताई थी कि संवैधानिक न्यायाधिकरण सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है। इस दौरान कोर्ट ने कई ऐसे फैसले भी दिए, जिनमें यूरोपीय संघ के कानूनों के बजाय पोलैंड के कानूनों को प्राथमिकता दी गई।
2023 के चुनाव के बाद सत्ता में आए डोनाल्ड टस्क ने यूरोपीय संघ के साथ विवाद खत्म करने और देश में कानून का शासन मजबूत करने का वादा किया था। लेकिन राष्ट्रपति नवरोकी ने संवैधानिक न्यायाधिकरण के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित नामों को मंजूरी नहीं दी। इससे सरकार और राष्ट्रपति के बीच टकराव और बढ़ गया।
सरकार और विपक्ष ने क्या कहा?
देश के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि देश में कानून का शासन बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। टस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'PiS के नेतृत्व में कई साल तक अराजकता रही। उसके बाद व्यवस्था सुधारना मुश्किल और कभी-कभी दर्दनाक प्रक्रिया है। इसके लिए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।'
दूसरी ओर, PiS के समर्थक कोर्ट के बाहर जमा हुए और प्रधानमंत्री टस्क के खिलाफ नारे लगाए। AFP के एक पत्रकार के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने टस्क गद्दार है के नारे लगाए। कुछ लोग हाथों में माला और धार्मिक तस्वीरें लेकर प्रार्थना करते भी नजर आए।
मुख्य न्यायाधीश को क्यों सस्पेंड किया गया?
संवैधानिक न्यायाधिकरण की जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने इस निलंबन की घोषणा की। न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल वाल्डेमार ज़ुरेक ने कहा कि उन्होंने स्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचान्स्की को मिली कानूनी छूट (legal immunity) को हटाने की मांग की थी।
यह कदम पोलैंड की शीर्ष अदालत के गठन और कामकाज को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बीच उठाया गया है। सरकार उन जजों को हटाने की कोशिश कर रही है, जिन्हें पिछली 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) सरकार के कार्यकाल (2015 से 2023) के दौरान नियुक्त किया गया था।