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POJK में मार्च शुरू, 12 की मौत; पाकिस्तान ने उतारे हजारों सैनिक

संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मुजफ्फराबाद मार्च शुरू हो चुका है। पाकिस्तान की सेना हर हाल में यह मार्च खत्म करवाना चाह रही है, क्योंकि पिछले आठ दशक में यह पीओजेके में हुआ सबसे बड़ा विद्रोह है।

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पीओजेके में विरोध मार्च शुरू। (Photo Credit: Social Media)

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पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में पिछले 33 दिनों से सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का मुजफ्फराबाद मार्च शुरू हो चुका है। उधर, मंगलवार से ही पाकिस्तान सेना ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

 

अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है। पीओजेके के सभी कस्बों और शहरों को सील कर दिया गया। बड़ी संख्या में सेना ने जवानों को तैनात किया है। विरोध प्रदर्शन के सबसे बड़े गढ़ रावलाकोट में मीडिया पर बैन लगा दिया गया है। महीने भर से पीओजेके में इंटरनेट सेवा ठप है।

 

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4000 पुलिस, रेंजर्स और एफसी के जवान उतारे

संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के मुताबिक मार्च में लगभग 40,000 प्रदर्शनकारी हिस्सा ले रहे हैं। वहीं बीबीसी उर्दू के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने 4,000 रेंजर्स, पुलिस और फ्रंटियर कोर के जवानों को तैनात किया है, ताकि मार्च को रोका जा सके। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना ने खाद्य और दवाओं की आपूर्ति रोक करके मानव संकट खड़ा कर दिया है। सरकार और फौज दमन का रास्ता अपना रही है। 

 

बुधवार दोपहर को मार्च शुरू होने से पहले पाकिस्तान की सरकार और सेना ने प्रमुख रास्तों पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना जानबूझकर टकराव के मूड में है, ताकि मार्च को विफल किया जा सके।

 

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सड़क पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

इस बीच रावलाकोट और सुधनोटी में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोलीबारी की। आठ लोगों के मारे जाने की खबर है। रावलाकोट से आए पहले वीडियो में साफ दिख रहा है कि हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया है। 

चौतरफा घिरी पाकिस्तान की सेना

पाकिस्तान की सेना और सरकार चौतरफा घिर चुकी है। पीओजेके में जनता लंबे समय से सरकार के खिलाफ धरनारत है। वहीं खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में टीटीपी ने पाकिस्तान सेना की नाक में दम कर रखा है। बलूचिस्तान में हालात सबसे अधिक खराब हैं। प्रांत के एक बड़े भूभाग पर पाकिस्तान का कब्जा छिन चुका है।

 

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कई शहरों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। पंजाब में मौलाना फजल-उर-रहमान ने सेना के खिलाफ बगावत की आग फूंक दी है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के संबंध अफगानिस्तान से ठीक नहीं है। पूर्वी सीमा पर भारत के साथ तनाव जगजाहिर है। 


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