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रेत पर बसा सऊदी अरब, समुद्र के पानी पर बसा रहा है शहर

सऊदी अरब अब तक का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सिटी बन रहा है। आइए जानते हैं कैसे बनते हैं पानी पर तैरने वाले शहर।

Image of Floating City in Saudi Arabia

सऊदी अरब में बन रहा फ्लोटिंग सिटी।(Photo Credit: neom.com)

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दुनिया लगातार बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में वैज्ञानिक और इंजीनियर नई तकनीकों की खोज कर रहे हैं, जिससे धरती पर रहने की समस्या का हल निकाला जा सके। इन्हीं तरीकों में से एक फ्लोटिंग सिटी (तैरता हुआ शहर) भी है, जो समुद्र या बड़ी झीलों पर बनाया जाता है।

 

बता दें कि सबसे अमीर देशों में से एक सऊदी अरब NEOM प्रोजेक्ट के तहत दुनिया का सबसे बड़ी फ्लोटिंग सिटी तैयार हो रही, जो पूरी तरह ग्रीन एनर्जी चलेगी।  यह प्रोजेक्ट सऊदी अरब के Red Sea में बन रहा है जो तबुक प्रांत में, अकाबा की खाड़ी के पास मौजूद है। अब सवाल आता है कि फ्लोटिंग सिटी कैसे बनती है और इसका मैकेनिज्म क्या होता है? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

 

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फ्लोटिंग सिटी का ढांचा

फ्लोटिंग सिटी समुद्र या बड़े झील या नदी पर तैरने वाले प्लेटफॉर्म पर बनाई जाती है। इन शहरों को टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें तीन तकनीक सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है।

 

इसमें सबसे ज्यादा फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होता है। यह प्लेटफॉर्म बड़े-बड़े मॉड्यूलर ब्लॉक्स से बना होता है, जो पानी पर तैर सकते हैं। इसे स्टील, कंक्रीट और हल्के वॉटरप्रूफ मटेरियल से बनाया जाता है ताकि यह लंबे समय तक पानी में स्थिर रह सके। साथ ही इसमें एयर-टाइट चेंबर्स होते हैं, जो इसे डूबने से बचाते हैं।

 

फ्लोटिंग सिटी को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि यह समुद्री लहरों, तूफान और भूकंप का सामना कर सके। यह कई छोटे-छोटे सेक्शन में बंटा होता है, ताकि किसी एक हिस्से को नुकसान पहुंचे तो इसका असर पूरे शहर पर न हो।

 

साथ ही हाइड्रोलिक पिलर यानी ज्यादा दबाव सहन करने वाले पिलर और एंकर से इसे समुद्र के तल से जोड़ा जाता है, जिससे यह संतुलित बना रहता है और तेज लहरों के दौरान भी इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

 

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कैसे होती फ्लोटिंग सिटी पर सभी जरूरतें पूरी 

सऊदी अरब में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सिटी पूरी तरह से रिन्युएबल एनर्जी पर निर्भर होगा, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे। आम तौर पर फ्लोटिंग सिटी में बिजली के लिए सोलर पैनल और विंड टर्बाइन का इस्तेमाल किया जाता है।  साथ ही वेव एनर्जी कन्वर्टर यानी समुद्री लहरों से बिजली बनाने वाले उपकरण का भी इस्तेमाल होता है। 

 

साथ ही पीने लायक पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए समुद्र के पानी को डिसेलिनेशन प्लांट से पीने लायक बनाया जाता है। इसके साथ फ्लोटिंग सिटी को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि सभी जरूरी सुविधाएं दे सके।

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