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पालक पनीर और 1.80 करोड़ का सेटलमेंट; US में 2 भारतीय छात्रों की लड़ाई की कहानी

अमेरिका को कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी में दो भारतीय छात्रों को 'पालक पनीर' को लेकर भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसे लेकर दोनों अदालत तक पहुंचे, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को सेटलमेंट करना पड़ा।

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आदित्य प्रकाश और उर्मी भट्टाचार्य। (Photo Credit: Social Media)

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कॉलेज या यूनिवर्सिटी में अक्सर कई विवाद मामले सामने आते हैं लेकिन क्या हो कि 'पालक पनीर' को लेकर विवाद इतना बढ़ जाए कि मामला अदालत तक पहुंच जाए। कुछ ऐसा ही अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर में हुआ, जहां दो भारतीय छात्रों को 'पालक पनीर' को लेकर भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामला अदालत में जाने के बाद यूनिवर्सिटी को झुकना पड़ा और उसे सेटलमेंट करना पड़ा।


यह सारा झगड़ा पालक पनीर को गर्म करने को लेकर शुरू हुआ और बाद में भेदभाव के आरोपों में बदल गया। दो भारतीय छात्र- आदित्य प्रकाश और उनकी पार्टनर उर्मी भट्टाचार्य के साथ ये सब हुआ। इसे लेकर उन्होंने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। 


माइक्रोवेव ओवन में पालक पनीर गर्म करने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा दो साल तक यूनिवर्सिटी और अदालत में चलता रहा। आखिरकार यूनिवर्सिटी ने आदित्य और उर्मी के साथ सेटलमेंट किया और उन्हें 2 लाख डॉलर (लगभग 1.80 करोड़ रुपये) का मुआवजा दिया। किचन की एक छोटी सी बात इतनी बड़ी कैसे हो गई? समझते हैं।

 

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कैसे शुरू हुआ ये सब?

मिडिल क्लास बैकग्राउंड से आने वाले हर किसी शख्स का सपना अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ने का जरूर होता है। भोपाल के रहने वाले आदित्य प्रकाश और कोलकाता की उर्मी भट्टाचार्य का भी यही सपना था। दोनों को कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलना एक सपने के सच होने जैसा था।


अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए उन्होंने अपनी सारी सेविंग्स खर्च कर दी थी। दोनों वहां से PhD कर रहे थे। पहला साल तो ठीक से बीता लेकिन अगले साल कैंपस में उनके भारतीय खाने के कारण कुछ ऐसा हुआ जिसने बहुत कुछ बदल दिया।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, एडमिशन के लगभग एक साल बाद 5 सितंबर 2023 को आदित्य प्रकाश कैंपस में स्टूडेंट्स के लिए रखे माइक्रोवेव में अपना पालक पनीर गर्म कर रहे थे। उसी समय स्टाफ के एक मेंबर ने उनसे खाने की स्मेल को लेकर शिकायत की और कहा कि अपना खाना गर्म करने के लिए माइक्रोवेव का इस्तेमाल न करें। इसे लेकर आदित्य की स्टाफ के मेंबर के साथ काफी देर तक बहस हुई।

 


हालांकि, इसके बाद उनके साथ भेदभाव होने लगा। आदित्य ने बताया कि किचन में हुई वह छोटी सी घटना बाद में 'भेदभाव और बदले की कार्रवाई' में बदल गई। सीनियर फैकल्टी ने बार-बार उन्हें बुलाया और आदित्य से कहा गया कि उन्होंने स्टाफ को 'अनसेफ' फील कराया। उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई।


आदित्य अकेले नहीं थे जिन्हें ये सब झेलना पड़ा। उनकी पार्टनर उर्मी भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि बिना बताए उनकी टीचिंग असिस्टेंटशिप छीन ली गई। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई तब हुई जब उन्होंने आदित्य को अपनी क्लास में अपने अनुभव के बारे में बोलने के लिए बुलाया। 


उर्मी ने बताया कि कछ दिन बाद उन्होंने और दूसरे स्टूडेंट्स जब कैंपस में भारतीय खाना लेकर आए तो उन पर दंगा भड़काने का इल्जाम लगाया गया।

 

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अदालत ऐसे पहुंचा मामला?

आदित्य प्रकाश ने मीडिया को बताया कि उन्होंने कानूनी कार्रवाई करने का फैसला तब किया जब यूनिवर्सिटी ने उन्हें मास्टर्स डिग्री देने से मना कर दिया। इसके बाद मई 2025 में आदित्य और उर्मी ने कोलोराडो जिले की अदालत में भेदभाव और बदले की भावना का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया।


अदालत में मामला जाने के बाद यूनिवर्सिटी पर दबाव बढ़ा और उसने आदित्य और उर्मी के साथ सेटलमेंट किया। दोनें के साथ सितंबर 2025 में सेटलमेंट हुआ और यूनिवर्सिटी ने उन्हें 2 लाख डॉलर का मुआवजा दिया। साथ ही मास्टर्स डिग्री भी दी। हालांकि, इसमें एक शर्त भी जोड़ी गई जिसके तहत आदित्य और उर्मी पर भविष्य में यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने या नौकरी करने पर रोक लगा दी गई।

भारत लौट आए दोनों

आदित्य और उर्मी हाल ही में भारत लौट आए हैं। दोनों का कहना है कि अब वे दोबारा कभी अमेरिका नहीं जाएंगे। उर्मी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए हमेशा से कुछ न कुछ शर्तें होती हैं और आपको यह बहुत जल्दी महसूस कराया जा सकता है।'


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