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गैस-तेल छोड़िए... एक और संकट आने वाला है; ईरान युद्ध ने बदले समीकरण

ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग कई संकट को जन्म देगी। ऊर्जा संकट के बाद दुनिया के सामने एक नई चुनौती खड़ी होने वाली है। 90% सल्फर का उत्पादन पेट्रोलियम के बाय-प्रोडक्ट के तौर पर होता है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से सल्फर का उत्पादन भी कम हो रहा है।

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अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध। ( Photo Credit: PTI)

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ईरान युद्ध ने दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों का यातायात सामान्य नहीं है। ईरान के हमलों के कारण खाड़ी के कई देशों ने ईंधन का उत्पादन बंद कर दिया है। असर यह है कि मांग और पूर्ति में भारी अंतर पैदा हो गया है। अमेरिका लगातार ईरान को धमकी देने में जुटा है, ताकि होर्मुज को खुलवाया जा सके। मगर ईरान झुकने को तैयार नहीं है। वहां से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल और गैस के अलावा एक और संकट खड़ा होने वाला है। शायद दुनिया की निगाह इस पर बहुत ही कम गई है।

 

मध्य पूर्व के समुद्री मार्ग पर आई रुकावट से दुनियाभर में सल्फर (गंधक) का बड़ा खतरा पैदा होने की आशंका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच ड्रोन और मिसाइल के बारिश के कारण कोई भी जहाज कंपनी वहां से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रही है। यहां से दुनियाभर में करीब 20 फीसद तेल और 20 फीसद ही प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही दुनिया को सल्फर का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। जहाज का आवागमन ठप होने से दुनिया के सामने सल्फर का संकट खड़ा हो सकता है।

 

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एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर का करीब 41 फीसद सल्फर का व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता है। ईरान युद्ध के बाद इसकी कीमतों में लगभग 25 फीसद का इजाफा हो चुका है। मध्य पूर्व में दुनिया का 24 फीसद सल्फर का उत्पादन होता है। दुनियाभर में सल्फर से ही सल्फ्यूरिक एसिड का निर्माण किया जाता है। अमेरिका अपनी जरूरत का सल्फर खुद ही उत्पादित करता है। वह अपने 90 फीसद सल्फर का इस्तेमाल सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में करता है। मगर कई देश अन्य देशों पर से आने वाले सल्फर पर निर्भर हैं। सल्फर संकट से इन देशों के औद्योगिक विकास को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि कोई देश औद्योगिक तौर पर कितना प्रगतिशील है, इसका अनुमान उसके सल्फ्यूरिक एसिड बनाने की क्षमता से लगता है। 

 


ताबा संकट: बिना सल्फ्यूरिक एसिड के शुद्ध तांबा नहीं बन सकता है। खाना से निकला अयस्क अपने साथ कई अशुद्धियां समेटे होता है। सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल करके शुद्ध तांबे को अलग किया जाता है। बाद में इसी तांबे का इस्तेमाल पावरग्रिड, ट्रांसफार्मर और मोटारों में किया जाता है। अगर सल्फर की सप्लाई चेन में रुकावट आई तो दुनिया भर में तांबा संकट पैदा होगा और बाद में यह बिजली व्यवस्था में व्यवधान के तौर पर बदल सकता है, जिससे दुनियाभर में गैस और तेल के बाद बिजली संकट भी पैदा हो सकता है।  

 

तांबे का इस्तेमाल संचार हार्डवेयर, सैन्य अड्डों और रक्षा कारखानों को चलाने में भी खूब होता है। पायने इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के मुताबिक बहरीन और कतर में दो प्रमुख अमेरिकी रडार नष्ट हुए हैं। इन्हें बदलने के लिए 30 हजार किलोग्राम से ज्यादा तांबे लगेगा। अगर जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में नष्ट हुए अन्य अमेरिकी संचार उपकरणों, सेंसरों और रडारों की मरम्मत की जाए तो हजारों किलो और तांबे की जरूरत होगी।

 

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सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल

  • डीएपी और एसएसपी जैसी खाद को बनाने में
  • कार और ट्रक की लेड-एसिड बैटरी में
  • पेट्रोलियम पदार्थों को साफ करने में
  • डिटर्जेंट, पेंट और दवाइयों के निर्माण में
  • पानी को शुद्ध करने में
  • सिंथेटिक फाइबर और प्लास्टिक बनाने में

 

कोबाल्ट संकट: सल्फ्यूरिक एसिड के बिना शुद्ध कोबाल्ट को नहीं निकाला जा सकता है। खनन से निकले कोबाल्ट के अयस्क को सल्फ्यूरिक एसिड में खोला जाता है। इससे शुद्ध कोबाल्ट अलग हो जाता है। बाद में इसी कोबाल्ट का लिथियम-आयन बैटरी में इस्तेमाल होता है। लैपटॉप, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग होता है। सल्फर आपूर्ति रुकने से कोबाल्ट से लिथियम आयन बैटरी और बाद में फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रोडक्शन पर इसका असर पड़ेगा। 

 

कोबाल्ट से विशेष मिश्रधातु का निर्माण होता है। यह धातुएं न केवल मजबूत होती हैं, बल्कि गर्मी प्रतिरोधी होती है। इन विशेष धातुओं का गैस टरबाइन, ड्रोन और जेट इंजन में किया जाता है। इसके अलावा शक्तिशाली चुंबक, पेंट, कांच और सिरेमिक व कैंसर के इलाज में काम आने वाली रेडियोथेरेपी में कोबाल्ट का इस्तेमाल होता है। 

 

सेमीकंडक्टर: सल्फर संकट का असर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पड़ेगा। सिलिकॉन वेफर्स से माइक्रोचिप्स का निर्माण होता है। इन वेफर्स की सफाई और नक्काशी में बेहद शुद्ध सल्फ्यूरिक एसिड की जरूरत होती है। यही कारण है कि सल्फर की आपूर्ति में आने वाले बाधा सेमीकंडक्टर के अलावा ऑटो मोबाइल, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि एवियोनिक्स से कंप्यूटिंग संरचना में इसका खूब इस्तेमाल होता है। 

 

मध्य पूर्व में सल्फर का उत्पादन

मध्य पूर्व दुनियाभर का करीब 24 फीसद सल्फर का उत्पादन करता है। यानी हर चार किलो सल्फर में एक किलो यही से आता है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में मध्य पूर्व में करीब 21 से 28 मिलियन टन सल्फर का उत्पादन हुआ।

 

  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • कतर
  • इराक

दुनिया के 10 सबसे बड़े सल्फर उत्पादक

दुनियाभर में सल्फर का उत्पादन खदानों से बेहद कम होता है। 90 फीसद तक सल्फर का उत्पादन तेल और गैस रिफाइनिंग से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर होता है। चीन दुनिया में सबसे अधिक सल्फर बनाता है।

 

  • चीन
  • अमेरिका
  • रूस
  • कनाडा
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • सऊदी अरब
  • जर्मनी
  • जापान
  • भारत
  • कजाखस्तान

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