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ईरान को मिला धोखा? पाकिस्तान में बातचीत की आड़ में बन रहा वेनेजुएला वाला प्लान

अमेरिका अब ईरान के खिलाफ वेनेजुएला वाली स्ट्रैटजी पर काम कर रहा है, ताकि उसकी नौसैनिक और आर्थिक नाकाबंदी एक साथ की जा सके। इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद से ट्रंप बेहद नाराज हैं।

Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप। (Photo Credit: PTI)

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी नेताओं के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिका का कहना है कि ईरान के कारण बातचीत फेल रही। वहीं ईरान अमेरिका नेताओं पर आरोप मढ़ रहा है। खबरों के मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार न बनाने का दबाव बनाया। हालांकि इस पर ईरान राजी नहीं हुआ। अब खबर यह आ रही है कि एक तरफ जहां पाकिस्तान में बातचीत चल रही थी तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के खिलाफ वेनेजुएला वाली स्ट्रैटजी पर काम करना शुरू कर दिया है।

 

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बताया कि ईरान के साथ उनकी 21 घंटे बातचीत चली। हालांकि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की बात से इंकार कर दिया। इसी कारण कोई समझौता नहीं हो सका। वैंस के बयान के कुछ घंटे बाद ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक नया खुलासा किया।  एक लेख शेयर करते हुए उन्होंने यह बताने की कोशिश की अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने का विकल्प खुला है। 

 

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ईरान की आर्थिक नाकाबंदी पर विचार

पिछले साल अमेरिका की नौसेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की थी। अब ईरान के खिलाफ भी इसी रणनीति पर मंथन चल रहा है। ट्रंप ने जो लेख साझा किया उसका शीर्षक है, 'अगर ईरान नहीं झुकता है तो राष्ट्रपति के पास ट्रंप का हथियार: नौसैनिक नाकाबंदी है।' अमेरिका के कई जंगी जहाजों ने महीनों तक वेनेजुएला की नाकाबंदी की। वेनेजुएला के तेल टैंकरों को जबरन जब्त किया। इससे उसकी अर्थव्यवस्था चरमरागई और अंत में 3 जनवरी को एक ऑपरेशन में निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया गया।

भारत और चीन पर अमेरिका की निगाह

जस्ट द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड फोर्ड इन दिनों यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य नौसैनिक पोतों के साथ फारस की खाड़ी में है। गेराल्ड ने ही वेनेजुएला की नाकाबंदी की। हाल ही में आग लगने के कारण विमानों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद इसे मरम्मत को भेजा गया था। मरम्मत से लौटने के बाद ईरान के खिलाफ मिशन में जुट चुका है। लेख में यह भी बताया गया है कि चीन और भारत जैसे ईरान के प्रमुख तेल स्रोतों में से एक को काटकर अमेरिका तेहरान पर रणनीतिक दवाब बढ़ा सकता है।

 

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बढ़ गया जंग का खतरा

28 फरवरी की तड़के अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान पर हमला किया था। दोनों देशों के बीच करीब 40 दिनों की जंग चली। पाकिस्तान की मध्यस्थता पर दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ। शनिवार को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। यहां दोनों देशों के बीच समझौते पर 21 घंटे तक वार्ता चली। मगर यह बेनतीजा रही। वार्ता विफल होने के बाद दुनियाभर में दोबारा जंग शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। 


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