रैपर से राजनेता बने बालेंद्र उर्फ बालेन शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। पिछले साल जेन जी आंदोलन के बीच 25 वर्षीय रैपर बालेन शाह का नाम चर्चा में आया था। नेपाल के युवाओं ने बालेन को प्रधानमंत्री बनने की मांग उठाई। हालांकि सुशीला कार्की को अंतरिम कमान सौंपी गई।
आंदोलन के बाद पहले चुनाव में बालेन शाह की अगुवाई वाली सियासी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला। अपने चुनाव अभियान में बालेन ने भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया। जनता को उनका सीधा साधा अंदाज खूब पसंद आया। प्रधानमंत्री बनने से पहले बालेन शाह तीन साल तक काठमांडू के मेयर रहे।
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जेन जी आंदोलन के बाद बालेन शाह ने 52 वर्षीय नेता रवि लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ज्वाइन की और 7 मार्च को नेपाल के आम चुनाव में पार्टी को प्रचंड जीत दिलाई। पार्टी ने कुल 165 में से 122 सीटों पर जीत हासिल की। भारी जीत के बाद बावजूद भी बालेन शाह के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं।
बालेन शाह के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां
- आरएसपी ने बालेन शाह को पीएम फेस के तौर पर पेश किया था। मगर उसके दोनों नेता बालेन शाह और रवि लामिछाने को सरकार चलाने का खास अनुभव नहीं है। भले ही लामिछाने कुछ समय की खातिर उप प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके हैं। लेकिन पार्टी को सरकार चलाने का अनुभव नहीं है।
- चुनाव प्रचार के वक्त बालेन शाह ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया। 2024 में उन्होंने कान फिल्म महोत्सव में हिस्सा लिया था। यहां महंगी यात्री कारण के कारण उनकी जमकर आलोचना हुई। अब नेपाल का भ्रष्टाचार निवारण आयोग मामले की जांच करने में जुटा है। बालेन के सामने खुद को सबसे बेहतर साबित करने की चुनौती है।
- बालेन शाह की पार्टी ने चुनाव में कई बड़े वादे किए। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह पर इन पर खरा उतरने की चुनौती है। पार्टी ने लोगों की आयु दोगुनी करके 3 हजार डॉलर करने का वादा किया। इसके अलावा 12 लाख नौकरियां देने का वादा किया, ताकि पलायन को रोका जा सके।
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- आरएसपी में आज बालेन शाह का कद रवि लामिछाने से बड़ा हो गया है। सबसे बड़ी चुनौती दोनों नेताओं के बीच समंजस्य बनाने की है। रवि पर सहकारी समितियों के धन के गबन का आरोप है। उन्हें पिछले साल इस मामले में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल के सपने के आगे सबसे बड़ी चुनौती रवि लामिछाने होंगे।
- मध्य पूर्व में युद्ध की वजह से नेपाल की ईंधन आपूर्ति को भी झटका लगा है। पदभार संभालते ही बालेन शाह के सामने तेल कीमतों पर न केवल अंकुश लगाने की चुनौती होगी, बल्कि इसकी उपलब्धता भी सुनिश्चित करना होगा।
- बालेन शाह ने अपने दफ्तर में एक विवादित नक्शा लगाया था। इसमें उन्होंने भारत के हिस्सों को नेपाल में दिखाया है। पिछली केपी ओली सरकार ने भी यही रणनीति अपनाई थी। उसने कई स्थानों पर सीमा विवाद पैदा करने की कोशिश की। ऐसे में बालेन शाह के सामने भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की भी कसौटी पर खरा उतरना होगा।