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बांग्लादेश में हिंसा के बावजूद जीत लिया चुनाव, कौन हैं वे दो हिंदू उम्मीदवार?

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ चुनाव के दिन तक हिंसा होती रही। इसके बावजूद दो हिंदू सांसद चुने गए हैं और दोनों ही उसी पार्टी से हैं जो अब सरकार बनाने जा रही है। 

hindu mps of bangladesh

गयेश्वर रॉय और निताई रॉय चौधरी, Photo Credit: Social Media

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बांग्लादेश में पिछले कई महीनों से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। चुनाव के दिन भी एक हिंदू की हत्या कर दी गई। इसके बावजूद दो हिंदू उम्मीदवारों ने इस चुनाव में जीत हासिल की है। कुल चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है जिसमें दो हिंदू और एक बौद्ध शामिल हैं। दोनों हिंदू उम्मीदवार सरकार बनाने जा रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के हैं। इन दोनों ने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की है। अब तारिक रहमान की अगुवाई वाली BNP मंगलवार को सरकार बनाने जा रही है और तारिक प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।

 

बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले दो हिंदू नेताओं के नाम गयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं। उन्होंने ढाका की एक सीट और पश्चिमी मागुरा निर्वाचन क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी की ओर से मैदान में उतारे गए अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर जीत हासिल की। गयेश्वर रॉय बीएनपी की पॉलिसी मेकिंग कमेटी के सदस्य हैं जबकि निताई रॉय चौधरी पार्टी के प्रमुख उपाध्यक्षों में से एक होने के साथ-साथ इसके शीर्ष नेतृत्व के लिए एक वरिष्ठ सलाहकार और रणनीतिकार भी हैं।

 

कुल चार अल्पसंख्यक बने सांसद

 

तीसरे अल्पसंख्यक सांसद निर्वाचित हुए हैं साचिंग पुरू, जो बीएनपी के वरिष्ठ नेता और बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वह दक्षिणी पहाड़ी जिले बंदरबन के मरमा जनजातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें बंदरबन से चुनाव में जीत मिली है। चौथे अल्पसंख्यक उम्मीदवार दिपेन दीवान, बौद्ध बहुसंख्यक चकमा जातीय अल्पसंख्यक समूह से संबंधित हैं, जिन्होंने दक्षिण-पूर्वी रंगमती पहाड़ी जिले के एक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। हालांकि, उनकी धार्मिक पहचान अस्पष्ट है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं।

 

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बता दें कि मुस्लिम बहुल बांग्लादेश की जनसंख्या 17 करोड़ है, जिसमें हिंदुओं की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है। बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग के अनुसार, गुरुवार को हुए चुनाव में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के 79 उम्मीदवारों ने भाग लिया, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं। इनमें मुख्य रूप से हिंदू समुदाय के उम्मीदवार थे। कुल 67 उम्मीदवारों को 22 राजनीतिक दलों ने चुनाव में उतारा था  जबकि 12 उम्मीदवार निर्दलीय चुनावी मुकाबले में उतरे थे।

किसने सबसे ज्यादा टिकट दिए?

 

बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीबी) ने सबसे अधिक 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। वामपंथी झुकाव वाली पार्टी बांग्लादेश साम्यबादी दल (बीएसडी) ने आठ अल्पसंख्यक उम्मीदवारों, बांग्लादेश अल्पसंख्यक जनता पार्टी (बीएमजेपी) ने आठ, बांग्लादेश समाजतांत्रिक दल (बेसोद) ने सात अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था। बीएनपी ने छह उम्मीदवार मैदान में उतारे और जतिया पार्टी ने चार उम्मीदवार उतारे थे। जमात-ए-इस्लामी ने पहली बार किसी अल्पसंख्यक हिंदू उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा था।

 

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साल 2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की संख्या 17 थी और 2018 के चुनाव में भी इतने ही हिंदू सदस्यों ने जीत हासिल की थी। इनमें से अधिकांश शेख हसीना की अवामी लीग से संबंधित थे। तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी ने चुनावों में 49.97 प्रतिशत वोट और 209 सीट के साथ दो-तिहाई बहुमत से सत्ता हासिल की। कुल सांसदों की संख्या 300 है।

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