सीरिया में शुरू हुई नई जंग, अमेरिका, इजरायल और तुर्की किसके साथ?
सीरिया जंग के मुहाने पर खड़ा है। इजरायल से अमेरिका तक तनाव है। ट्रंप को तुरंत अपना विशेष दूत दमिश्क भेजना पड़ा। अलेप्पो शहर में भीषण गोलाबारी के बीच हजारों लोग अपने घरों से भाग रहे हैं।

सीरिया में नई जंग शुरू। ( Photo Credit: SANA)
बशर अल असद के पदस्थ होने के बाद सीरिया एक और जंग के मुहाने पर खड़ा है। सीरिया की सेना और कुर्द गुटों की सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के बीच अलेप्पो में भीषण जंग जारी है। ताजी झड़प की शुरुआत मंगलवार को हुई। अब तक 22 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हजारों लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हैं। सीरिया की सेना ने एसडीएफ लड़ाकों को अलेप्पो के शेख मकसूद क्षेत्र को खाली करने का आदेश दिया है। कुर्द लड़ाकों ने साफ कहा कि वह अपना इलाका नहीं छोड़ेंगे। दूसरी तरफ सीरियाई सेना उन्हें घेरने में जुटी है। मौजूदा परिस्थितियों में जंग के फैलने की आशंका है।
अलेप्पो शहर में शुक्रवार को भी जंग जैसे हालात हैं। लगातार गोलीबारी हो रही है। सीरिया की सेना गोला-बारूद और भारी सैन्य वाहनों के साथ अलेप्पो के शेख मकसूद की तरफ बढ़ रही है। पिछले साल मार्च में सीरिया सरकार और एसडीएफ के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत 2025 के आखिरी तक एसडीएफ को सीरियाई सेना में शामिल होना था। मगर यह समझौता टूट गया है। पिछले दो दिन से अलेप्पो में भीषण गोलीबारी का दौर जारी है।
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एसडीएफ को अमेरिका का समर्थन
कुर्द लड़ाकों वाले एसडीएफ को अमेरिका का खुला समर्थन है। इन लड़ाकों ने अमेरिका की मदद से आईएसआई के खिलाफ कई वर्षों तक जंग लड़ी और पूर्वी सीरिया के एक बड़े भूभाग पर कब्जा किया। कुर्दों के कंट्रोल वाले इलाके में तेल के हुए हैं। यही कारण है कि अमेरिका इनको समर्थन देने में अधिक दिलचस्पी दिखाता है। अमेरिका ने कुर्द इलाके में अपने करीब 900 सैनिकों को तैनात कर रखा है, ताकि आईएसआई को रोका जा सके।
एसडीएफ का मुखिया कौन?
साल 2017 में कुर्दिश पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स ने सीरिया के रक्का शहर को आईएसआईएस से कब्जा मुक्त कराया था। मौजूदा समय में मजलूम अब्दी एसडीएफ के कमांडर-इन-चीफ हैं। दुनिया उन्हें मजलूम कोबानी के नाम से भी जानती हैं। वर्तमान में एसडीएफ नॉर्थ एंड ईस्ट सीरिया के ऑटोनॉमस एडमिनिस्ट्रेशन की मुख्य सशस्त्र सेना है। साल 2015 में आईएस के खिलाफ लड़ाई के उद्देश्य से इसकी नींव रखी गई थी।
तुर्की कुर्द लड़ाकों के खिलाफ क्यों?
अमेरिका जहां एसडीएफ का समर्थक है तो वहीं तुर्की इनका विरोधी है। तुर्की की सरकार एसडीएफ को आतंकवादी कहती है। मध्य पूर्व में कुर्दों की संख्या करीब 3 करोड़ है। यह सीरिया, ईरान, इराक और तुर्की तक फैले हैं। हर पांच में से एक कुर्द तुर्की में रहता है। 1984 से ही कुर्दों ने दक्षिण-पूर्वी तुर्की में विद्रोह छेड़ रखा है। तुर्की और कुर्दों के बीच लड़ाई में अब तक 40 हजार लोगों की जान जा चुकी है। तुर्की की सरकार कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) को आंतकी संगठन मानती है। उसका यह भी मानना है कि तुर्क कुर्दों का संबंध सीरियाई कुर्दों से है। यही कारण है कि तुर्की की सरकार सीरियाई कुर्दों के खिलाफ भी सैन्य अभियान चलाती रहती है।
https://twitter.com/Terror_Alarm/status/2009616560219206031
सीरिया सरकार और कुर्दों के बीच कौन सा समझौता हुआ था?
पिछले साल मार्च महीने में एक समझौता हुआ था। इसमें सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस समेत पूर्वोत्तर सीरिया के सभी सैन्य संस्थानों को सीरिया सरकार में विलय करना था। इसमें गैस फील्ड, सीमा चौकी, एयर पोर्ट और ऑयल फील्ड को भी शामिल किया गया था। इस समझौते का मकसद सीरिया को एक सरकार के अधीन एकजुट करना था। समझौते में कहा गया कि कुर्द नागरिक सीरिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्हें नागरिकता मिलेगी। संवैधानिक अधिकार मिलेंगे। इसके बाद कुर्द लड़ाकों की फोर्स एसडीएफ ने समझौते का समर्थन किया।
सीरिया: कहां-किसका कब्जा?
सीरिया के अधिकांश भूभाग पर राष्ट्रपति अहम अल-शरा की सेना और गठबंधन बलों का नियंत्रण है। पूर्वोत्तर सीरिया का ज्यादातर हिंसा कुर्द लड़ाकों के सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस के कब्जे में है। जॉर्डन से लगी सीमा के पास कुछ हिस्से पर द्रूज समुदाय का कंट्रोल है। वहीं गोलान हाइट्स और उसके आसपास कुछ भूभाग पर इजरायल ने अपना नियंत्रण जमा रखा है। सीरियाई का अब कोई भी हिस्सा आईएसआई के कब्जे में नहीं है।
https://twitter.com/SDF_Syria/status/2009647255096008871
ताजा झड़प की वजह
सीरिया की सरकार हर हाल में पिछले साल का समझौता लागू करना चाहती है। मगर कुर्द लड़ाके पीछे हट रहे हैं। इसके बाद सीरिया की सेना ने अलेप्पो शहर घेर लिया, ताकि कुर्द लड़ाकों पर दबाव बनाया जा सके। वहीं कुछ लोगों को मानना है कि कुर्द लड़ाके संशय में है कि समझौते की शर्तों को सीरिया की सरकार पूरा करेगी भी या नहीं? पिछले दो दिनों की भीषण गोलीबारी के बाद शुक्रवार सुबह युद्धविराम का ऐलान हो चुका है। सीरिया की सरकार ने एसडीएफ को अशरफियेह और शेख मकसूद जिले को छोड़ने की समय सीमा दी है। वहीं कुर्द लड़ाकों ने इलाका छोड़ने से मना कर दिया है।
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कुर्द प्रशासन ने सीरिया पर क्या आरोप लगाया?
कुर्द प्रशासन की वरिष्ठ अधिकारी एल्हम अहमद ने सीरिया सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सीरियाई अधिकारियों ने अलेप्पो के कुर्द इलाकों पर हमला करके युद्ध का रास्ता चुना है। सरकार हमलों के माध्यम से उन समझौतों को खत्म करना चाहती है जो पहले ही हो चुके हैं। हम अब भी शांति और संवाद के माध्यम से समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। मगर सरकार कोई समाधान नहीं चाहती है।
दुविधा में क्यों फंसा अमेरिका?
मौजूदा समय में अमेरिका दुविधा में फंसा है। दरअसल, वह कुर्दों की एसडीएफ के अलावा सीरिया की सरकार में बैठे अहमद अल-शरा का भी समर्थन करता है। अगर किसी गुट को नुकसान पहुंचता है तो अप्रत्यक्ष तौर पर यह अमेरिका के हितों के खिलाफ होगा। यही कारण है कि अमेरिका ने शुक्रवार को अपने दूत टॉम बैरक को सीरिया की राजधानी दमिश्क रवाना किया। अमेरिका पूरी ताकत के साथ दोनों गुटों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है।
https://twitter.com/MahendraKanwat_/status/1781154106671079584
कुर्दों के साथ इजरायल के क्या हित छिपे?
इजरायल न केवल सीरिया बल्कि इराक में भी कुर्दों का समर्थन करता है। इजरायल इन्हें एक रणनीतिक एसेट मानता है, जिनका तुर्की के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। इराक में कुर्दों के अलग देश कुर्दिस्तान का इजरायल खुलकर समर्थन करता है। इसकी एक वजह यह है कि इजरायल अपनी जरूरत का करीब 77 फीसदी तेल कुर्द इलाकों से आपूर्ति करता है। अगर रिश्ते बिगड़े तो इजरायल की तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। इजरायल कुर्दों की खातिर अलग देश की वकालत इस रणनीति से भी करता है कि जरूरत पड़ने पर तुर्की, सीरिया और ईरान को काबू में किया जा सकता है।
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