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एफ-16 की तैनाती, क्या सोमालिया में भिड़ जाएंगे तुर्की और इजरायल; समझे पूरी कहानी

इजरायल और तुर्की के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। दुनियाभर को आशंका है कि भविष्य में यह तनातनी सैन्य टकराव में भी बदल सकती है। दोनों के बीच तनाव का हॉटस्पॉट सोमालिया बना है।

Turkey-Israel tensions

सोमालीलैंड पर तुर्की और इजरायल में तनाव। (AI Generated Image)

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पूरा मध्य पूर्व इतिहास के सबसे बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। पश्चिम में इजरायल की सेना लेबनान से गाजा और सीरिया तक बमबारी करने में जुटी है। यमन में UAE और सऊदी अरब के बीच अलग तनाव है। फारस की खाड़ी में अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा तांता लगा है। ईरान पर हमले की धमकी दी जा रही हैं। दूसरी तरफ सऊदी अरब और यमन के दक्षिण में हॉर्न ऑफ अफ्रीका का माहौल भी गर्माने लगा है। 

 

इजरायल से सोमालीलैंड को मान्यता मिलने के बाद तुर्की यहां आक्रामक हो गया है। हाल ही में सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में तुर्की ने 3 एफ-16 फाइटर प्लेन की तैनाती की है। अगर भविष्य में तुर्की ने इन विमानों से सोमालीलैंड को निशाना बनाने की कोशिश करता है तो इजरायल के साथ संघर्ष छिड़ सकता है।

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजधानी मोगादिशु के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले कुछ महीने से तुर्की के इंजीनियर कई हैंगर बनाने में जुटे थे। पिछले 10 दिनों में कई मालवाहक जहाज भी सोमलिया में उतरे। माना जा रहा है कि इन जहाजों से तुर्की ने गोला बारूद और कलपुर्जे भेजे हैं।

 

तुर्की ने सोमालिया के ऊर्जा क्षेत्र में भारी भरकम निवेश कर रखा है। उसका तर्क है कि अपने ऊर्जा निवेश को बचाने के खातिर ही विमानों की तैनाती की है। इसके अलावा अंकारा अब तुर्की, सूडान, सोमालिया, सऊदी अरब, मिस्र और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय सैन्य गठबंधन तैयार करना चाहता है, ताकि भविष्य में इजरायल की चुनौतियों से निपटा जा सके। 

क्या हासिल करना चाहता है तुर्की?

सोमालिया में तुर्की का सबसे बड़ा हित ऊर्जा का है। यहां उसकी कंपनियां कई स्थानों पर खुदाई में जुटी हैं। इसके अलावा तुर्की सोमालिया के माध्यम से हॉर्न ऑफ अफ्रीका पर अपना कंट्रोल चाहता है, क्योंकि यह विश्व व्यापार का एक अहम रूट है।

 

रेचप तैयप एर्दोगन की सरकार ने 2011 से ही सोमालिया में भारी भरकम निवेश कर रही है। सोमालिया के कई एयरपोर्ट और बंदरगाह का संचालन तुर्की कंपनियों के हाथों में है। सोमालिया की सेना का करीब एक तिहाई हिस्से को तुर्की से ट्रेनिंग मिलती है। तुर्कसोम मिलिट्री स्टेशन को भी तुर्की ही ऑपरेट करता है। तुर्की ने दुनिया का सबसे बड़ा अपना दूतावास भी सोमालिया में ही खोला है।

इजरायल के खिलाफ सोमालिया को भड़का रहा तुर्की?

इस बीच खबर आ रही है कि सोमालिया ने इजरायली एयरलाइन अरकिया को अपने हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने की मंजूरी नहीं दी है। आशंका यह है कि ये कदम तुर्की के इशारे में उठाया गया है। उधर, तुर्की ने दावा किया कि मोसाद के दो जासूसों को पकड़ने में कामयाबी मिली है। वहीं एर्दोगन की आलोचना करने वाली एक इजरायली महिला को इस्तांबुल में गिरफ्तार किया गया है। तुर्की के इन कदमों से इजरायल के साथ तनाव बढ़ने की आशंका है। 

 

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तुर्की और इजरायल के बीच कौन-कौन से मतभेद?

  • इजरायल गाजा कार्यकारी बोर्ड में तुर्की के शामिल होने के खिलाफ है। उसका मानना है कि तुर्की और कतर के शामिल होने से स्थिति बिगड़ सकती है।
  • सीरिया में तुर्की कुर्द लड़ाकों पर हमला कर रहा है, जबकि इजरायल को कुर्दों का समर्थक माना जाता है। इस मुद्दे पर भी दोनों के बीच विरोध है।
  • गाजा का मुद्दा: तुर्की ने इजरायल से व्यापार बंद किया। अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया। इजरायल ने भी इसका इसी भाषा में जवाब दिया।
  • तुर्की की सेना, लीबिया, सोमालिया, इराक और सीरिया तक हस्तक्षेप करने में जुटी है। इजरायल को यह बात भी अच्छी नहीं लग रही।
  • सोमालिया के माध्यम से तुर्की लाल सागर पर कंट्रोल चाहता है, इजरायल ऐसा कभी नहीं होने देगा।
  • तुर्की भूमध्य सागर में ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों को धमकाता है। इजरायल ने अब इनके साथ नया सैन्य संगठन बना लिया है।

 

आगे क्या हो सकता है: तुर्की और इजरायल के बीच कई मोर्चों पर तनाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। एक छोटी सी घटना दोनों देशों को सैन्य टकराव की तरफ धकेल सकती है। इजरायल जितना आक्रामक है, उतनी ही आक्रामकता से तुर्की भी अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। ऐसे में सैन्य टकराव की संभावना अधिक हो जाती है। हाल ही में एक इजरायली अधिकारी ने खुद ही कहा है कि समय तेजी से तुर्की के साथ टकराव की तरफ बढ़ रहा है, क्योंकि वह हमारी सुरक्षा का एक ठोस खतरा है।

सोमालिया में तुर्की का कितना दखल?

  • सोमलिया तुर्की से टी-129 अटाक अटैक हेलीकॉप्टर खरीदने की जुगाड़ में है। यह मल्टीरोल हेलीकॉप्टर है। इसे तुर्की की कंपनी तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने बनाया है। सोमालिया की राजधानी मोगादिशु स्थित सैन्य बेस को बनाने में तुर्की ने बड़ी मदद पहुंचाई। इसके अलावा सोमाली सेना को ट्रेनिंग और तकनीक ट्रांसफर की।

 

  • तुर्की सशस्त्र बल मौजूदा समय में तुर्की टास्क फोर्स सोमालिया कमांड के माध्यम से सोमाली सैनिकों को मिलिट्री ट्रेनिंग देते हैं। इस कमांड का संचालन तुर्की और सोमलिया की सरकार करती है।

 

  • तुर्की लगातार सोमालिया को सैन्य मदद पहुंचा रहा है। पिछले साल ही वहां मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन (UCAV) की तैनाती की थी। अंकारा की चाल सोमालिया में अपने प्रभाव के माध्यम से हॉर्न ऑफ अफ्रीका में कंट्रोल हासिल करना है।

 

  • मौजूदा समय में सोमालिया में तुर्की के बायराकतार टीबी-2 और अकिन्सी यूसीएवी ड्रोन तैनात हैं। इन्हें ए400एम सैन्य परिवहन विमान से भेजा गया था। तुर्की का तर्क है कि यह तैनाती  अल-शबाब आतंकवादी संगठन से सोमालियों को बचाने की खातिर की जा रही है।

 

  • सोमाली नेशनल आर्मी के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम मोहम्मद मोहमुद का भी संबंध तुर्की से है। उन्होंने तुर्की विश्वविद्यालय से पीजी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा तुर्की रक्षा विश्वविद्यालय में ट्रेनिंग ली।

सोमालीलैंड में इजरायल के कौन से हित?

नब्बे के दशक में सोमालिया के तानाशाह सियाद बर्रे की सत्ता ढहने के बाद देश दो हिस्सों में टूट गया। 1991 में सोमालीलैंड ने खुद को अलग देश घोषित कर दिया। अपनी सरकार, अदालत, मुद्रा, पुलिस और सेना भी स्थापित कर ली। लगभग 35 साल बाद सोमालीलैंड को देश की मान्यता देने वाला इजरायल पहला राष्ट्र बना। 

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल बगैर अमेरिकी सलाह के यह कदम नहीं उठाएगा। इजरायल के इस कदम की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को छोड़कर सभी मुस्लिम देशों ने विरोध किया। सऊदी अरब और तुर्की ने सोमालिया की अखंडता पर हमला करार दिया। खुलकर सोमालिया की सरकार का समर्थन किया।

 

सोमालिया का कहना है कि सोमालीलैंड उसका अभिन्न हिस्सा है। इजरायल ने मान्यता देकर संप्रभुता का उल्लंघन किया है। वही विशेषज्ञ मान्यता देने को इजरायल की एक सधी चाल बता रहे हैं। उनका कहना है कि सोमालीलैंड के जरिये इजरायल का हॉर्न ऑफ अफ्रीका और लाल सागर में प्रभाव पड़ेगा। वहीं यमन में हूती विद्रोहियों को काबू करने में मदद मिलेगी, क्योंकि सोमालीलैंड का समुद्री तट दक्षिणी यमन के ठीक सामने है।

UAE का एंगल भी समझिए

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को सोमालीलैंड का समर्थक माना जाता है। उसने इजरायल के कदम की निंदा तक नहीं की। बाद में तुर्की और सऊदी अरब के कहने पर सोमालिया की सरकार ने यूएई के साथ अपने सभी समझौतों को तोड़ दिया और उस पर विश्वासघात का आरोप लगाया।

 

सोमालीलैंड के ठीक सामने दक्षिण यमन में यूएई एसटीसी का समर्थन करता है। यह गुट 'साउथ अरब' नाम से एक अलग देश बनाना चाहता है। सऊदी अरब ने एसटीसी का समर्थन करने पर यूएई की न केवल आलोचना की, बल्कि एसटीसी के ठिकानों पर बमबारी भी की। बाद में यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने सऊदी अरब के कहने पर यूएई से सभी समझौते तोड़ डाले। यूएई की रणनीति सोमालीलैंड और एसटीसी के सहारे लाल सागर के दोनों तटों पर इजरायल के साथ नियंत्रण हासिल करना था।

अमेरिका भी बढ़ा रहा हवाई ताकत

हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में तुर्की की बढ़ती ताकत से न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका भी चिंतित है। यही कारण है कि अमेरिका सोमालिया सीमा के नजदीक केन्या के मांडा बे एयरबेस के एक रनवे का विस्तार कर रहा है, ताकि भविष्य में इसका व्यापक इस्तेमाल किया जा सके। इस प्रोजेक्ट पर करीब 70 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा। इस बीच खबर यह है कि इजरायल के बाद अमेरिका भी सोमालीलैंड को मान्यता देने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप खुद ही खुलासा कर चुके हैं कि अमेरिका इस पर मंथन कर रहा है। हालांकि बाद में वे अपनी बात से मुकर गए।

 

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