उभर रहा बांग्लादेश, तुर्की और पाकिस्तान गठबंधन, भारत की चिंता क्या?
भारत के खिलाफ तेजी से तुर्की, बांग्लादेश और पाकिस्तान गठबंधन उभर रहा है। दिन प्रति दिन यह गठबंधन न केवल मजबूत हो रहा है, बल्कि रक्षा और सैन्य सहयोग भी बढ़ रहा है।

भारत के पड़ोस में उभरता नया गठबंधन। (AI-generated image)
पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के संबंध गहरे होते जा रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अंकारा की यात्रा पर थे। उनके लौटते ही बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान तुर्की पहुंच चुके हैं। भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता में तुर्की लगातार पाकिस्तान और बांग्लादेश में अपनी दिलचस्पी दिखा रहा है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया। कुछ दिन पहले ही तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने ढाका की यात्रा की।
जनरल वाकर-उज-जमान ने जून 2024 में पहली बार बांग्लादेश सेना की कमान संभाली थी। दो साल में यह उनकी पहली तुर्की यात्रा है। आइये समझते हैं कि तुर्की बांग्लादेश में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहा है और बांग्लादेश तुर्की से क्या चाहता है, इसमें पाकिस्तान का क्या एंगल है?
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कितने दिनों का है दौरा?
जनरल वाकर-उज-जमान पांच दिन की यात्रा पर तुर्की पहुंचे है। 19 जुलाई को सुबह 6:55 बजे तुर्की एयरलाइंस के विमान से अपनी पत्नी और छह सदस्यीय आधिकारिक दल के साथ रवाना हुए। कार्यक्रम के मुताबिक बांग्लादेश सेना प्रमुख 25 जुलाई को वतन लौटेंगे। इस बीच क्षेत्र में उभर रहे बांग्लादेश-पाकिस्तान और तुर्की गठबंधन पर भारत की पैनी नजर है, क्योंकि इस गठबंधन का मकसद ढाका को भारत के प्रभाव से दूर रखना है।
आधिकारिक दल में कौन-कौन?
- जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी)
- 7 इन्फैंट्री डिवीजन
- सेना प्रमुख के सैन्य सहायक
- सेना प्रमुख के स्टाफ अधिकारी
- सेना प्रमुख के एड-डी-कैंप (एडीसी)
- 7 इन्फैंट्री डिवीजन के जीओसी के एडीसी
- सेना प्रमुख सचिवालय से एक अतिरिक्त अधिकारी
बांग्लादेश पर तुर्की इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहा?
तुर्की की सरकार का मानना है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के साथ उसके संबंध अच्छे हैं और आने वालों दिनों यह संबंध और मजबूत होंगे। पहले तुर्की पाकिस्तान की वजह से बांग्लादेश के साथ रक्षा समेत अन्य संबंध मजबूत करने से बचता रहा है। शेख हसीना के पद से हटते ही तुर्की और पाकिस्तान दोनों को ढाका के साथ संबंधों को सामान्य करने का मौका मिला।
- तुर्की का मानना है कि दक्षिण एशिया में सिर्फ एक सहयोगी पर निर्भर रहना उसकी रणनीतिक पहुंच को सीमित कर सकता है। यही कारण है कि बांग्लादेश के साथ उसके संबंध बेहतर हो रहे हैं। पाकिस्तान की अपेक्षा बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। तेजी से बढ़ रही है। पाकिस्तान की तुलना में तुर्की बांग्लादेश को बड़े बाजार के रूप में देख रहा है।
- तुर्की बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। म्यांमार में रोहिंग्यों तक पहुंच की कोशिश है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के करीब होने के कारण भी तुर्की बांग्लादेश पर अधिक दिलचस्पी दिखा रहा है। तुर्की बांग्लादेश को दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने का एक अहम केंद्र मान रहा है। यही कारण है कि भारत भी इस गठबंधन को लेकर बेहद सजग है।
- दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि मई में पहली बार बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तुर्की की यात्रा की। अगले महीने यानी जून में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ढाका पहुंचे। हालिया यात्रा में दोनों देशों ने ड्रोन तकनीक, टैंक डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और रक्षा औद्योगिक सहयोग पर फोकस किया।
तुर्की के करीब क्यों जा रहा बांग्लादेश?
शेख हसीना ने अपने शासन में सेना पर अधिक निवेश को प्राथमिकता नहीं दी। उनका झुकाव भारत के पक्ष में था। बांग्लादेश का अधिकांश भूभाग भी भारत से घिरा है। हसीना की वजह से भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते मधुर थे। मगर हसीना के पद से हटने के बाद वहां भारत विरोधी नई लहर उभरी। पहले मोहम्मद यूनुस और बाद में नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने भी भारत पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया और अपनी सेना को आधुनिक बनाना शुरू कर दिया है।
- बांग्लादेश की सेना तुर्की को एक अच्छा विकल्प मान रही है। तुर्की का कहना है कि उसके हथियार न केवल सस्ते हैं, बल्कि भरोसेमंद है। पश्चिमी देशों का रक्षा बाजार बेहद मंहगा है और हथियार खरीदने की प्रक्रिया भी लंबी-चौड़ी है। यही कारण है कि बांग्लादेश की सेना तुर्की पर अधिक भरोसा जता रही है। हालांकि एक एंगल मुस्लिम जगत का भी है। तुर्की अपने आपको इस्लामिक जगत की उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति के रूप में पेश कर रहा है। अंकारा पर ढाका की दिलचस्पी दिखाने की एक वजह यह भी है।
- बांग्लादेश की सेना ने पिछले कुछ दिनों में तुर्की से ड्रोन, छोटे हथियार, गोला-बारूद और तोपें खरीदी हैं। आज बांग्लादेश और तुर्की के बीच रक्षा संबंध बेहद मजबूत स्थिति में है। तुर्की ने हाल ही बांग्लादेश में प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने और मिलकर हथियार बनाने का भी प्रस्ताव दिया है, जबकि ऐसा ऑफर किसी पश्चिमी देश से हासिल करना बेहद कठिन है।
- बांग्लादेश की सेना मुख्यत: जमीनी हमलों पर फोकस थी। मगर कुछ वर्षों में ढाका ने हवाई क्षेत्र में अपना ध्यान केंद्रित किया। आज तुर्की बांग्लादेश को न केवल रक्षा साजो-सामान बेच रहा है, बल्कि ट्रेनिंग, तकनीकी सहायता और रक्षा-औद्योगिक संबंधों को भी बेहतर कर रहा है।
- बांग्लादेश की सेना अपने तोपखाने को अपग्रेड करना चाहती है। नए ड्रोन और बख्तरबंद वाहन खरीदने पर विचार कर रही है। ऐसे समय में बांग्लादेश सेना प्रमुख की मौजूदा यात्रा को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
बांग्लादेश में पाकिस्तान के कौन से हित?
बांग्लादेश में आज भी पाकिस्तान की छवि बहुत अच्छी नहीं है। 1971 का युद्ध अभी तक वहां की जनता नहीं भूली है। यही कारण है कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों को नॉर्मल करना और रक्षा संबंध स्थापित करना आसान नहीं है। यह बात इस्लामाबाद को भी अच्छे से पता है। अब इस्लामाबाद ने तुर्की के रास्ते ढाका में अपना दखल बढ़ाने पर फोकस किया है।
कुछ समय पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच जेएफ-17 की खरीद पर बातचीत चली। विश्लेषकों का मानना है कि इस सौदे की चर्चा के दौरान चीन के अलावा तुर्की ने भी पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाया, ताकि दक्षिण एशिया में भारत के हितों के खिलाफ बांग्लादेश और पाकिस्तान को करीब लाकर एक नया गठबंधन खड़ा किया जा सके।
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तुर्की पाकिस्तान में लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन की असेंबली यूनिट भी लगाने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि इसी प्लांट से न केवल बांग्लादेश बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों को ड्रोन की आपूर्ति की जा सकती है।
बांग्लादेश के करीब आकर पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान की रणनीति यह भी है कि भारत को पूर्व और पश्चिम दोनों मोर्चों से घेरा जा सके। बांग्लादेश में इस्लामाबाद की बढ़ती दिलचस्पी भारत के प्रभाव को संतुलित करने की एक रणनीतिक चाल है।
शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में रिश्ते बेहतर हुए हैं। पाकिस्तानी सेना के अधिकारी पहली बार भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब तक पहुंचे हैं। पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हथियार सप्लाई करने के अलावा सैन्य ट्रेनिंग देने तक की पेशकश भी की है।
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