सूडान से सोमालिया और यमन तक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक 'जंग' शुरू हो चुकी है। पर्दे के पीछे लड़ी जा रही इस जंग में रियाद हर कीमत पर क्षेत्र में अपना वर्चस्व बरकरार रखना चाहता है। अब सऊदी अरब सोमालिया पर संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के साथ संबंध तोड़ने का दबाव बना रहा है। नतीजा यह हुआ कि हाल ही में सोमालिया ने UAE के साथ सुरक्षा और बंदरगाह समझौतों को कैंसिल कर दिया। सोमालिया ने यूएई पर संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया, क्योंकि यमन के अलगाववादी एसटीसी नेता ऐदारौस अल-जुबैदी को यूएई के एजेंटों ने सोमालीलैंड के रास्ते अबू धाबी भेजा था, जबकि सोमालिया सोमालीलैंड को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है।
अब ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि सऊदी अरब एक नया सैन्य गठबंधन बना रहा है, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के प्रभाव को कम किया जा सके। गठबंधन में मिस्र और सोमलिया शामिल होंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह सैन्य गठबंधन पाकिस्तान-सऊदी अरब सुरक्षा समझौता का हिस्सा होगा या नहीं। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान-सऊदी अरब डिफेंस पैक्ट में तुर्की और मिस्र भी शामिल होने की कोशिश में है। सोमालियाई राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद जल्द ही सऊदी अरब जाएंगे। यहां सैन्य गठबंधन पर चर्चा होगी। अगर यह सभी देश एक साथ आते हैं तो अरब जगत में संयुक्त अरब अमीरात अलग-थलग पड़ जाएगा।
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सऊदी अरब और UAE कहां-कहां आमने-सामने?
सूडान: यूएई और सऊदी अरब के बीच सूडान में भी एक जंग जारी है। यहां सऊदी अरब सूडान की सरकार के साथ है, जबकि यूएई रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के साथ है। यूएई के दखल के बाद आज सूडान दो हिस्सों में बंट गया है। रियाद की अबू धाबी से नाराजगी के पीछे एक यह भी वजह है।
यमन: हाल ही में यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। 30 दिसंबर को सऊदी अरब ने यमन के मुकाला बंदरगाह पर बमबारी की। रियाद ने यूएई पर दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एसटीसी) को समर्थन देने का आरोप लगाया। एसटीसी दक्षिण यमन का एक अलगाववादी समूह है। यह साउथ सऊदी अरब नाम से एक अलग देश बनाना चाहता है। जबकि सऊदी अरब इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। सऊदी अरब के कहने पर यमन ने यूएई से अपनी सेना बुलाने को कहा और रक्षा समझौता भी रद्द कर दिया।
सोमालिया: यहां सऊदी अरब सोमालिया की सरकार का समर्थन करता है। जबकि यूएई के सोमालीलैंड के साथ संबंध अच्छे हैं। अबू धाबी ने सोमालीलैंड के बेरबेरा और पुंटलैंड के बोसासो बंदरगाह पर भारी निवेश कर रखा है। इजरायल ने जब सोमालीलैंड को देश के तौर पर मान्यता दी तो सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों ने इसकी निंदा की। मगर यूएई ने कोई बयान नहीं जारी किया।
मिस्र ने किया UAE के खिलाफ बड़ा खेल!
मिस्र साल 1950 से ही एक सैन्य गठबंधन बनाना चाहता है। इसका लक्ष्य इजरायल के हमलों से मध्य पूर्व की रक्षा करना था। मगर उस वक्त कतर और यूएई ने इस पर रोक लगा दी थी। हाल ही में मिस्र को एक अवसर दिखा। उसने सऊदी अरब को खुफिया जानकारी भेजी कि UAE यमन में एसटीसी का समर्थन कर रहा है। उसे हथियार मुहैया करवा रहा है।
मिस्र ने यह सोची समझी रणनीति के तहत किया, ताकि सऊदी अरब के साथ रिश्तों को बेहतर किया जा सके, भले ही इसके लिए उसे UAE का बलिदान ही क्यों न देना पड़े। उधर, तुर्की भी मिस्र के साथ रिश्तों को मजबूत बना रहा है, ताकि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन में उसको भी जगह मिल सके।
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इजरायल के करीब आ रहा यूएई
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इजरायल के साथ मिलकर यूएई एक नई क्षेत्रीय व्यवस्था बना रहा है। रणनीति सऊदी अरब को अलग-थलग करने की है। यही कारण है कि सऊदी अरब एक ऐसा सैन्य गठबंधन बना रहा, जिससे भविष्य में इजरायली आक्रामकता से निपटा जा सके। हाल ही में सऊदी अरब ने अमेरिका से F-35 फाइटर जेट खरीदने की मंशा जताई, लेकिन इजरायल ने खुलकर इसका विरोध किया।
कैसे खुली अरब देशों की नींद?
हमास और हिजबुल्लाह से लड़ाई के बावजूद इजरायल का क्षेत्र में प्रभाव पड़ रहा है। लेबनान और सीरिया के एक बड़े हिस्से तक इजरायल की पहुंच है। गाजा और वेस्ट बैंक पर भी वह अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। बेंजामिन नेतन्याहू कई बार ग्रेटर इजरायल की बात कर चुके हैं। यह इलाका मिस्र में नील नदी से इराक में यूफ्रेट्स नदी तक फैला है।
इजरायल लगातार अरबों की भूमि पर अपना नियंत्रण जमा रहा है। 9 सितंबर 2025 को इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा पर जब हमला किया तो खाड़ी देश की नींद खुली। वह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका के अलावा अन्य विकल्प तलाशने लगे। अगर सऊदी अरब कोई क्षेत्रीय सैन्य गठबंधन बनाने में कामयाब होगा तो यह न केवल इजरायल बल्कि यूएई के भी खिलाफ होगा।