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ईरान ने खाड़ी के हर देश पर दागी मिसाइलें, ओमान को क्यों छोड़ दिया?

ईरान और इजरायल के बीच जंग के हालात में पूरा खाड़ी देश प्रभावित हो रहा है। वहीं ओमान अपनी दशकों पुरानी तटस्थ नीति और ईरान के साथ मजबूत रिश्तों के कारण पूरी तरह शांत और सुरक्षित है।

Oman amid Iran-Isarel war

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच ओमान, Photo credit- Social Media

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ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी को सीधा संघर्ष शुरू हो गया जिस कारण दुनिया के आधे से ज्यादा देशों में जंग जैसे हालात है। दुबई से लेकर दोहा तक हर तरफ सायरन और मिसाइल की आवाजें सुनाई दे रही थी लेकिन इस भारी तनाव के बीच खाड़ी का एक देश ओमान बिल्कुल अलग नजर आया। ओमान पर न तो कोई हमला हुआ और न ही वहां युद्ध जैसी अफरा-तफरी दिखी। आखिर क्या वजह है कि ईरान ने बाकी पड़ोसियों को निशाना बनाया लेकिन ओमान को छूना भी जरूरी नहीं समझा?

 

इसका जवाब ओमान की उस गहरी कूटनीति और इतिहास में छिपा है, जिसकी वजह से इसे 'मिडिल ईस्ट का स्विट्जरलैंड' कहा जाता है। ईरान और ओमान के बीच का यह भरोसा रातों-रात पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसकी जड़ें 50 साल पुरानी हैं।

 

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50 साल पुराना रिश्ता

ओमान और ईरान का रिश्ता 1970 के दशक से चला आ रहा है। उस समय ओमान के सुल्तान काबूस बिन सैद के खिलाफ विद्रोह हुआ था, जिसे दबाने के लिए ईरान के शाह ने अपनी सेना भेजी थी। उस मदद ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा का एक ऐसा मजबूत बंधन बनाया जो आज तक नहीं टूटा। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद जब दुनिया के कई देशों ने ईरान से मुंह मोड़ लिया, तब भी ओमान ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा।

क्यों खास है ओमान की कूटनीति?

ओमान 'खाड़ी सहयोग परिषद' (GCC) का हिस्सा तो है लेकिन उसने कभी भी सऊदी अरब या अन्य पड़ोसियों की तरह ईरान विरोधी रुख नहीं अपनाया। ओमान ने हमेशा ईरान और अमेरिका जैसे दुश्मनों के बीच एक ब्रिज का काम किया है। 2015 की न्यूक्लियर डील हो या वर्तमान संकट, ओमान ही वह जगह है जहां पर्दे के पीछे बातचीत संभव हो पाती है।

 

ईरान जानता है कि अगर उसने ओमान पर हमला किया, तो वह अपने उन गिने-चुने दोस्तों में से एक को खो देगा जो मुश्किल वक्त में दुनिया से बात करने का रास्ता खोलते हैं।

 

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भूगोल और अर्थव्यवस्था

ईरान और ओमान दोनों मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की निगरानी करते हैं। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यहां शांति बनाए रखना दोनों की मजबूरी भी है और जरूरत भी। साथ ही, प्रस्तावित ईरान-ओमान गैस पाइपलाइन जैसी योजनाओं के जरिए ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की उम्मीद रखता है।

 

ईरान के अन्य देशों के साथ विवाद की बड़ी वजह वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता रही है लेकिन ओमान ने खुद को इन विवादों से पूरी तरह दूर रखा है। जैसा कि ओमान के पूर्व सुल्तान काबूस ने कहा था, उनकी विदेश नीति सच्चाई, न्याय और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित है।


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