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रूस खुद तेल बेचता है फिर भारत से क्यों मंगवा रहा है? समझिए क्या है पूरा मामला

भारत को कच्चे तेल का निर्यात करने वाले रूस में इस समय तेल की किल्लत हो गई है। ऐसे में अब भारत रूस की मदद के लिए आगे आया है।

Vladimir Putin and Narendra Modi

व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी । Photo Credit: PTI

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भारत को कच्चे तेल का निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में से एक रूस में इन दिनों पेट्रोल की कमी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और कुछ जगहों पर ईंधन की सप्लाई सीमित करनी पड़ रही है। इस बीच अब भारत रूस की मदद के लिए आगे आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए पेट्रोल मंगाना शुरू कर दिया है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन के हमलों से प्रभावित अपनी ऊर्जा व्यवस्था को संभालने के लिए भारत से गैसोलीन यानी पेट्रोल का आयात शुरू किया है। एनडीटीवी इंडिया की एक रिपोर्ट मे सूत्रों के हवाले दे दावा किया गया है कि भारत से रूस के लिए पेट्रोल की खेप भेजी गई है।

 

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इंटरनेशनल मीडिया ने की पुष्टि

भारत और रूस ने आधिकारिक तौर पर अभी तक इस बारे में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, मीडिया में यह खबरें सुर्खियों में है। प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान रॉयटर्स ने भी सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत ने रूस को 60000 मीट्रिक टन पेट्रोल भेजा है। वहीं अभी और पेट्रोल भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो अन्य जहाजों में करीब 30 हजार से 40 हजार टन तक की पेट्रोल की खेप भेजी गई है।

रूस में क्यों आई पेट्रोल की कमी?

दरअसल, रूस की कई तेल रिफाइनरियों को यूक्रेन के ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है। यूक्रेन इस समय रूस के पावर सप्लाई से जुड़े संस्थानों पर हमला कर रहा है। इन हमलों के बाद कुछ इलाकों में पेट्रोल की सप्लाई प्रभावित हुई है। गर्मियों में रूस में पेट्रोल की मांग भी काफी बढ़ जाती है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस में हर दिन करीब 1.10 लाख टन पेट्रोल की खपत होती है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी कमी का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। इसको लेकर रूस काफी चिंतित है और अब इस समस्या से निकलने के लिए भारत रूप की मदद के लिए आगे आया है। 

रूस दूसरे देशों से भी मांग रहा मदद

रूस ने अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से भी पेट्रोल आयात करने की योजना बनाई है। जानकारी के अनुसार, रूस हर महीने करीब 4 लाख टन पेट्रोल अलग-अलग देशों से मंगाने की तैयारी कर रहा है। पड़ोसी देश बेलारूस पहले से ही रूस को ईंधन भेज रहा है। रूस सरकार ने भी ईंधन संकट को देखते हुए कुछ कदम उठाए हैं। वहां की संसद ने हाल ही में ऐसे बदलावों को मंजूरी दी है, जिनसे पेट्रोल आयात आसान हो सके और ईंधन की कीमतों को कंट्रोल किया जा सके।

 

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भारत-रूस के संबंध

इस बीच भारत और रूस के बीच तेल व्यापार भी बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है। भारत को जून में रूस से करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिला है। रूस से आने वाला तेल भारत के कुल तेल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा रहा। मई में यह हिस्सा करीब 36.5 प्रतिशत था, जो जून में बढ़ गया है। 


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