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तनाव को कम करने के लिए शुरू हुआ क्राइंग क्लब, जानें रोने के फायदे

हम सभी जानते हैं कि रोने से मन हल्का होता है। क्या आप जानते हैं रोना हमारे लिए थेरेपी की तरह काम करता है। इस बात का जिक्र कई रिसर्च में भी किया गया है।

crying help to cure mental stress

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Freepik)

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रोना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब भी हम दुखी होते हैं या किसी बात से आहत होते हैं तो रोना आ जाता है। हम सभी जानते हैं कि रोने से मन हल्का हो जाता है। इससे हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पर पड़ता है। क्या आप जानते हैं कि साल 2017 में सूरत में हेल्दी क्राइिंग क्लब की शुरुआत हुई थी। यहां महीने में एक बार आकर आप दिल खोलकर रो सकते हैं। मुंबई में हाल ही में क्राइंग क्लब की शुरुआत हुई है। यह क्लब जापान के rui Katsu से प्रेरित है। rui Katsu जापान में एक प्रकार की थेरेपी होती है जहां पर लोग आकर रोते हैं। रोने से तनाव कम होता है और भावनात्मक रूप से स्वस्थ महसूस करते हैं।

 

रोना सिर्फ एक भावना नहीं है। कई शोधों में इस बात की पुष्टि हुई है कि रोने से तनाव कम होता है। 2019 में PubMED स्टडी में पाया गया था कि इमोशनल वीडियो देखते समय रोने से ब्रीथिंग बेहतर होती है। यह हमारे दिल की धड़कनों के लिए भी फायदेमंद होता है। खासतौर से आंसू में स्ट्रेस हार्मोन होते हैं जो दिमाग और शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है।

 

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रोने के फायदे

शरीर को डिटॉक्स करता है

 

आंसू तीन प्रकार के होते हैं

  • रिफ्लेक्स आंसू - ये आंसू किसी भी प्रकार के धूल या धूएं को आंखों से बाहर निकालने का काम करते हैं।
  • लगातार बहने वाले आंसू- ये आंसू आंखों में नमी बनाए रखते हैं और उन्हें संक्रमण से बचाने का काम करते हैं।
  • भावनात्मक आंसू- ये आंसू तब निकलते हैं जब आप परेशान, दुखी या बेहद खुश होते हैं।
  • मन शांत होता है - रोने से मन शांत होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि रोने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होते हैं। इस वजह से हमें अंदर से राहत मिलती है।
  • दर्द को कम करता है - जब आप लंबे समय तक रोते हैं तो आपके शरीर से ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है। ऑक्सीटोसिन ऐसे केमिकल्स को रिलीज करता है जो शारीरिक और भवानात्मक दोनों तरह के दर्द को कम करने का काम करता है। ऑक्सीटोसिन की वजह से आपको शांति और सुकून का अनुभव होता है।
  • भावनात्मक संतुलन को बनाए रखता है- केवल दुखी होने पर रोना नहीं आता है। कभी कभी बहुत ज्यादा खुशी, डर या तनाव में होने पर भी रो सकते हैं। येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक रोने से इमोशनल बैलेंस मेंटेन रहता है। यह अपनी भवानाओं को व्यक्त करने का एक तरीका होता है।

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कब लेनी चाहिए डॉक्टर की मदद?

 

जब भी आप सुखी या दुखी होते हैं तो रोना आ जाता है। रोने में कोई बुराई नहीं है। रोने से मन हल्का होता है लेकिन आपको जरूरत से ज्यादा रोना आ रहा है तो डॉक्टर की मदद लेने की जरूरत है। यह डिप्रेशन का लक्षण भी हो सकता है।

 

डिप्रेशन के अन्य लक्षण

  • हर वक्त दुखी रहना
  • चिड़चिड़ापन महसूस होना
  • भूख ना लगना
  • वजन का बढ़ना या घटना
  • रात को नींद ना आना
  • शरीर के हिस्सों में दर्द रहना
  • आत्महत्या का ख्याल आना


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