आज के दौर में थकान मिटाने का सबसे आसान तरीका एक चमकता हुआ एनर्जी ड्रिंक का कैन लगता है। विज्ञापन की दुनिया हमें यकीन दिलाती है कि ये ड्रिंक्स हमें तुरंत चुस्त-दुरुस्त बना देंगे लेकिन विज्ञान की दुनिया कुछ और ही कहानी बयां करती है। दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में साफ तौर पर चेतावनी दी है कि एनर्जी ड्रिंक्स का बढ़ता चलन भविष्य में एक बड़ी स्वास्थ्य त्रासदी बन सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि यह शरीर के नेचुरल सिस्टम को पूरी तरह हिला कर रख देती है। यह केवल प्यास बुझाने वाला डिंक्र नहीं, बल्कि रसायनों का एक ऐसा कॉकटेल है जो हमारे दिल और दिमाग पर सीधा हमला करता है।
यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी (EFSA) की रिपोर्ट के अनुसार, एक स्वस्थ युवा के लिए एक बार में 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन का सेवन हृदय प्रणाली (Cardiovascular system) पर बुरा प्रभाव डालता है। एनर्जी ड्रिंक्स में अक्सर यह सीमा पार हो जाती है, जिससे पैनिक अटैक और घबराहट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
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दिल और धड़कनों पर मंडराता खतरा
भारत के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी (पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया) का कहना है कि इन ड्रिंक्स को पीने के कुछ ही मिनटों के भीतर दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में ऐसे कई मामलों का जिक्र है जहां स्वस्थ युवाओं को सिर्फ एनर्जी ड्रिंक के अधिक सेवन के कारण 'हार्ट फेलियर' जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, जब हम अचानक बहुत सारा कैफीन और शुगर शरीर में डालते हैं, तो हमारी ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

चीनी का भारी डोज और बीमारियों का डर
इन ड्रिंक्स में चीनी की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि एक कैन पीना मतलब कई चम्मच चीनी एक साथ खा लेना है। हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट में यह विस्तार से बताया गया है कि एनर्जी ड्रिंक्स में इस्तेमाल होने वाली 'लिक्विड शुगर' सीधे लिवर पर दबाव डालती है। इससे शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है और बहुत कम उम्र में ही लोग टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ ही, मेयो क्लिनिक के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें मौजूद पदार्थ शरीर से पानी सोख लेते हैं, जिससे किडनी पर ज्यादा बोझ पड़ता है और डिहाइड्रेशन की समस्या पैदा हो जाती है। यह शरीर के भीतर के अंगों को धीरे-धीरे खोखला करने जैसा है।
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दांतों और हड्डियों पर बुरा असर
यह सिर्फ दिल या लिवर ही नहीं, ये ड्रिंक्स आपके दांतों के भी गला सकती हैं। दांतों के डॉक्टरों की संस्था अकादमी ऑफ जनरल डेंटिस्ट्री की रिपोर्ट कहती है कि एनर्जी ड्रिंक्स में बहुत ज्यादा एसिड होता है। यह एसिड दांतों की ऊपरी परत को धीरे-धीरे खत्म कर देता है, जिससे दांत कमजोर होकर टूटने लगते हैं। साथ ही, इनमें मौजूद कैफीन शरीर से कैल्शियम को बाहर निकाल देता है, जिससे हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं।

असली ताकत का सही रास्ता
डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि थकान मिटाने के लिए इन रसायनों वाले ड्रिंक्स के बजाय कुदरती चीजों का सहारा लें। नारियल पानी, ताजे फलों का रस या सिर्फ सादा पानी पीना ही सबसे बेहतर है। शरीर को असली एनर्जी अच्छी नींद और पौष्टिक खाने से मिलती है, न कि किसी फैक्टरी में बने रंगीन पानी से। विज्ञापनों की चमक-धमक में आकर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना समझदारी नहीं है। सेहत अनमोल है, इसे बचाकर रखना ही असली समझदारी है।