ओजोन आमतौर पर हम पृथ्वी की सुरक्षा कवच के रूप में जानते हैं। यह लेयर हमें सूर्य की हानिकारक UV किरणों से बचाती है। अब यही ओजोन जमीन के स्तर पर या हमारे घरों के भीतर पैदा हो रही है जो खतरनाक प्रदूषक बन जाती है। हालिया रिसर्च में यह बात सामने आई है कि घर के अंदर ओजोन के संपर्क में रहने से हेल्थ पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं जिनमें खून का गाढ़ा होना सबसे प्रमुख है।
एक नए अध्ययन के अनुसार, इंडोर ओजोन न केवल रेसपिरेटरी सिस्टम को प्रभावित करती है बल्कि यह सीधे हमारे खून के बहाव पर हमला करती है। जब हम सांस के जरिए ओजोन को अंदर लेते हैं, तो यह फेफड़ों में सूजन पैदा करती है और वहां से कुछ ऐसे केमिकल सिग्नल भेजती है जो खून को अधिक चिपचिपा या गाढ़ा बना देते हैं।
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इंडोर ओजोन के स्रोत
घर के अंदर ओजोन मुख्य रूप से दो तरह से आती है। पहला, बाहर के वायु प्रदूषण का कमरों के अंदर प्रवेश करना। दूसरा, घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे फोटोकॉपी मशीन, लेजर प्रिंटर, एयर प्यूरीफायर (आयनइजर वाले) और कुछ क्लीनिंग प्रोडक्ट्स की रासायनिक प्रतिक्रिया से भी ओजोन पैदा होती है।
खून गाढ़ा होने की प्रक्रिया
अध्ययन बताते हैं कि जब ओजोन शरीर में जाती है, तो यह 'सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन' पैदा करती है। इससे खून में मौजूद प्लेटलेट्स और अन्य प्रोटीन ऐक्टिव हो जाते हैं, जिससे खून का गाढ़ापन बढ़ जाता है। गाढ़ा खून नसों में आसानी से नहीं बह पाता, जिससे दिल को अधिक पंप करना पड़ता है।
हेल्थ पर प्रभाव
रक्त गाढ़ा होने से क्लॉट बनने का डर रहता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह जानलेवा हो सकता है।
यह खून में लिपिड के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है।
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बचाव के उपाय
- घरों में वेंटिलेशन सही रखें।
- उन एयर प्यूरीफायर से बचें जो ओजोन छोड़ते हैं।
- घर के अंदर सफाई के लिए कम केमिकल वाले उत्पादों का उपयोग करें।
- इंडोर पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं।