logo

मूड

ट्रेंडिंग:

दिमाग को सुन्न कर दे रहा है रील देखने का चस्का, हैरान कर देगी यह स्टडी

रील्स और शॉर्ट वीडियो की लत धीरे-धीरे आपकी याददाश्त और फोकस करने की शक्ति को खत्म कर रही है। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिजिटल नशा आपकी दिमागी सेहत के लिए बड़ा खतरा है।

AI Generated Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: AI Generated Image

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

आजकल हर हाथ में स्मार्टफोन है और हर अंगूठा बस ऊपर की तरफ स्वाइप करने में बिजी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मासूम सी दिखने वाली स्क्रॉलिंग आपके दिमाग के साथ एक खतरनाक खेल खेल रही है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) की ताजा रिपोर्ट 'डिजिटल ब्रेन इम्पैक्ट 2026' के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट यानी 15 से 60 सेकंड के वीडियो इंसानी ध्यान को दीमक की तरह चाट रहे हैं। मेटा और गूगल के इंटरनल डेटा के मुताबिक, एक औसत यूजर दिन भर में करीब 100 से ज्यादा रील्स देख डालता है। 

 

यह सिलसिला दिमाग में डोपामाइन का ऐसा तूफान लाता है कि हमें असली दुनिया और लंबी बातें बोरिंग लगने लगती हैं। रिसर्च में इसे 'शॉर्ट-सर्किट अटेंशन' का नाम दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब हमारा दिमाग किसी भी चीज पर 10 सेकंड से ज्यादा फोकस करने की ताकत खोता जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें: चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें? यहां समझिए तरीका

 

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब हम एक के बाद एक चटपटी रील्स देखते हैं, तो दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम ओवरलोड हो जाता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक न्यूरोसांइस स्टडी के अनुसार, लगातार शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग के 'प्रीफंटल कॉर्टेक्स'  में हलचल कम हो जाती है, जो हमारे फैसले लेने और कंट्रोल रखने का मुख्य केंद्र है। यह वजह है कि हम 'बस एक रील और' के चक्कर में घंटों बर्बाद कर देते हैं।

 

मेटा की 2025 की एनुअल रिपोर्ट दिखाती है कि शॉटर्स और रील्स पर बिताया जाने वाला समय पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ा है। यह डिजिटल नशा न सिर्फ हमारी नींद उड़ा रहा है, बल्कि युवाओं में चिड़चिड़ापन और किसी काम को पूरा न कर पाने की लाचारी भी पैदा कर रहा है।

कमजोर होती याददाश्त और सीखने की ताकत

गूगल के डेटा से पता चला है कि आजकल लोग कुछ भी नया सीखने के लिए लंबी किताबें पढ़ने के बजाय 30 सेकंड के वीडियो देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका हमारे दिमाग के लिए सही नहीं है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट बताती है कि जब हम जल्दी-जल्दी वीडियो बदलते हैं, तो हमारे दिमाग को उस जानकारी को समझने या याद रखने का समय ही नहीं मिलता। हम देख तो बहुत कुछ रहे हैं लेकिन असल में कुछ भी नया सीख नहीं पा रहे हैं।

 

रील्स और शॉर्ट वीडियो हमें 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' यानी तुरंत मिलने वाली खुशी के जाल में फंसा देते हैं। इससे हमारी 'डीप थिंकिंग' यानी किसी विषय पर गहराई से सोचने की शक्ति खत्म हो रही है। हमारा दिमाग अब मेहनत वाले कामों से भागने लगा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में लोगों के पास जानकारी तो बहुत होगी लेकिन उन्हें उस जानकारी की गहराई या सही मतलब पता नहीं होगा।

 

यह भी पढ़ें: गिनती के कपड़ों में भी दिखें स्टाइलिश, आखिर क्या है कैप्सूल वार्डरोब?

डिजिटल लत से बचने का क्या है रास्ता?

टेक एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों का कहना है कि अब समय आ गया है जब हमें कुछ समय के लिए स्मार्टफोन से दूरी बना लेनी चाहिए। रिसर्चगेट (ResearchGate) पर पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति दिन में केवल 30 मिनट के लिए भी फोन का इस्तेमाल बंद कर देता है, तो उसकी एकाग्रता यानी फोकस करने की शक्ति में सुधार होने लगता है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया ऐप्स के एल्गोरिदम को इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स उनसे चिपके रहें। ऐसे में अपनी दिमागी सेहत को बचाने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह यूजर्स पर है।

Related Topic:#Lifestyle News

और पढ़ें