आज के बदलते लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच महिलाओं की हेल्थ को लेकर एक रिसर्च स्टडी सामने आई है। जामा कार्डियोलॉजी की रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन महिलाओं को 40 साल की उम्र में मेनोपॉज होता है, उनमें दिल की बीमारी होने का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है। जिन महिलाओं को 12 महीने तक पीरियड नहीं आता है उस स्थिति को मेनोपॉज कहा जाता है। मेनोपॉज अक्सर 45 से 50 की उम्र में होता है लेकिन आज के दौर में 40 की उम्र में भी मेनोपॉज होने लगा है, जिसके परिणाम में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
यह रिसर्च नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है, जिसमें 1964 से लेकर 2018 के बीच करीब 10,000 महिलाओं की हेल्थ रिपोर्ट पर नजर रखी गई। इन रिपोर्ट्स में पाया गया कि जिन महिलाओं को 40 साल से पहले कोई दिल की बीमारी नहीं थी, उन्हें 40 की उम्र में मेनोपॉज होने के बाद दिल की बीमारी होने लगी। इसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने दावा किया कि कम उम्र में मेनोपॉज वाली महिलाओं में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
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रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पहले कम उम्र में मेनोपॉज होने वाली केवल 1 प्रतिशत महिलाओं को हार्ट डिजीज का खतरा था लेकिन अब यह खतरा 3 से 4 फीसदी तक बढ़ गया है। अब सवाल उठता है कि ऐसी क्या वजह है जिससे महिलाओं को कम उम्र में मेनोपॉज होता है और यह भी कि मेनोपॉज होने से दिल की बीमारी का खतरा क्यों बढ़ता है।
मेनोपॉज से कैसे होती है दिल की बीमारी?
महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन तेजी से गिरने लगता है। एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल की रक्षा करता है। मेनोपॉज होने के बाद इसकी कमी के कारण हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की गिरावट से महिलाओं के शरीर में कई दिक्कतें हो सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य- एस्ट्रोजन की कमी से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड प्रेशर की समस्या- एस्ट्रोजन की कमी से खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।
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एस्ट्रोजन की कमी कैसे दूर करें?
जिन महिलाओं को कम उम्र में मेनोपॉज हो जाता है, उन्हें फाइटोएस्ट्रोजन युक्त आहार लेना चाहिए, जो शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को सपोर्ट करता है। इसके लिए महिलाओं को अलसी के बीज, तिल, चना, मसूर, राजमा, अनार, सेब और गाजर का सेवन करना चाहिए। ये आहार शरीर में एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को एक्टिवेट करने में मदद करते हैं और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।