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तलाक अब 'कलंक' नहीं, दूसरी शादी का बढ़ा ट्रेंड, हर 6 में से 1 कपल खुशहाल

एक स्टडी में दावा किया गया है कि भारत में दोबारा शादी के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही अब अधिकांश लोग 29 साल की उम्र के बाद शादी कर रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, photo credit- sora

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भारत आज भी उन देशों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में लोग अरेंज मैरिज करते हैं। पहले रिश्तेदारों द्वारा रिश्ते ढूंढे जाते थे, लेकिन डिजिटल युग के कारण अब लोग ऑनलाइन ऐप का इस्तेमाल करने लगे हैं। जीवनसाथी.कॉम ने 'मॉर्डन मैचमेकिंग रिपोर्ट 2026' नाम से एक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोग अपने लिए वर या वधू की तलाश कर रहे हैं।

 

समाज में आज भी आदर्श शादी को लेकर कुछ धारणाएं हैं, जैसे 29 वर्ष की आयु से पहले विवाह कर लेना चाहिए, तलाकशुदा महिला या पुरुष से शादी नहीं करनी चाहिए। 'मॉर्डन मैचमेकिंग रिपोर्ट 2026' की हालिया रिपोर्ट इन धारणाओं से अलग है। जीवनसाथी की रिपोर्ट भारत में शादी के सामाजिक मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित करती है।

 

स्टडी में बताया गया है कि अब लोग किस प्रकार अपने जीवनसाथी की खोज कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अब विवाह की समयसीमा बढ़ गई है और पुनर्विवाह को लेकर स्वीकार्यता भी बढ़ी है।

तलाकशुदा पार्टनर से दूसरी शादी के मामले बढ़े 

दूसरी शादी और तलाक को लेकर रवैया बदल रहा है। लोग इसे अब कलंक की तरह नहीं देख रहे हैं। लोग तलाक या अपने साथी को खोने के बाद दूसरी शादी की तरफ पढ़ रहे हैं। साल 2016 में जहां सिर्फ 11 प्रतिशत लोग दूसरी शादी के लिए पार्टनर ढूंढ रहे थे, अब 16 फीसदी से ज्यादा लोग नए पार्टनर की तलाश में हैं। करीब 43 फीसदी ज्यादा लोग दूसरी शादी में जाने के लिए पार्टनर तलाश रहे हैं। 15 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो भले ही अविवाहित हैं लेकिन उन्हें शादीशुदा रहे पार्टनर से ऐतराज नहीं है।  जीवनसाथी की सफल कहानियों में से हर 6 में से 1 कहानी ऐसी है, जिसमें लोग दोबारा शादी के लिए गए हैं। 

 

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शादी में आया बदलाव

जीवनसाथी ने 13 फरवरी को एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में वर और वधू की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2025 के बीच जीवनसाथी चुनने के तरीकों में स्पष्ट बदलाव आया है। जातिगत प्राथमिकताएँ कम हुई हैं, पुनर्विवाह को लेकर स्वीकृति बढ़ी है और लोग अधिक उम्र में शादी कर रहे हैं।

 

आंकड़ों के अनुसार 2016 से 2026 के बीच पुनर्विवाह करने वालों की संख्या में 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं विवाह की औसत आयु, जो पहले 27 वर्ष मानी जाती थी, अब बढ़कर 29 वर्ष हो गई है। आजकल लोग जाति, उम्र और तलाक जैसे मानदंडों से आगे बढ़कर एक सही और आर्थिक रूप से स्थिर जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं।

 

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विवाह के लिए सही उम्र

भारत में पहले अरेंज मैरिज में अधिकतर लोग 27 वर्ष की आयु में शादी कर लेते थे। अब लोग 29 वर्ष की आयु में विवाह की तैयारी कर रहे हैं। 29 वर्ष की आयु में वर-वधू खोजने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। माना जा रहा है कि यह बदलाव इसलिए हुआ है क्योंकि लोग पहले अपने करियर और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं, उसके बाद विवाह कर रहे हैं।

 

अब 77 प्रतिशत लोग ऐप पर अपना प्रोफाइल स्वयं बना रहे हैं। पहले वर या वधू के परिवार वाले प्रोफाइल बनाते थे। इससे स्पष्ट होता है कि अब लोग अपने विवाह के फैसले स्वयं ले रहे हैं। टियर-3 शहरों में एक रोचक बदलाव यह भी देखा गया है कि वहाँ माता-पिता के बजाय भाई-बहन प्रोफाइल बना रहे हैं। वे पारंपरिक परिवार और तकनीक-आधारित विवाह प्रक्रिया के बीच डिजिटल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

जाति को प्राथमिकता में कमी

साल 2016 में 91 प्रतिशत जीवनसाथी उपयोगकर्ता जाति के आधार पर वर-वधू की तलाश करते थे। अब यह संख्या घटकर 54 प्रतिशत रह गई है। यह आंकड़ा समाज की बदलती सोच को दर्शाता है। पुनर्विवाह में बढ़ोतरी। पिछले 10 वर्षों में पुनर्विवाह करने वालों की संख्या में 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार 2016 में प्लेटफॉर्म पर 11 प्रतिशत उपयोगकर्ता दूसरी शादी की तलाश में थे, जबकि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है।

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