शहर में अकेला महसूस करते हैं आप? इन ऐप्स पर पैसे देकर कर सकते हैं दोस्ती
आजकल लोग अपने अकेलेपन को मिटाने के लिए ऐप्स के जरिए अजनबियों को पैसे देकर चंद घंटों का साथ और दोस्ती खरीद रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik
आज के दौर में बड़े शहरों में एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। सड़कों पर भीड़ तो बहुत है लेकिन लोगों के दिलों में बहुत अकेलापन है। इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए अब एक नया बिजनेस शुरू हो गया है, पैसे देकर दोस्ती खरीदना। इसे 'पेड फ्रेंडशिप' कहते हैं, जहां आप किसी अजनबी को अपना दोस्त बनाने के लिए उसे सैलरी या फीस देते हैं।
बड़े शहरों में रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं जो दिन भर काम में डूबे रहते हैं। जब शाम को वे घर लौटते हैं, तो उनके पास बात करने वाला कोई नहीं होता। पुराने दोस्त अपनी जिंदगी में बिजी हैं और परिवार कहीं दूर रहता है। ऐसे में लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं और अपने खालीपन को भरने के लिए Vybout, Friendy और Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स और ऐप्स पर जाते हैं जहां 'दोस्त' किराये पर मिलते हैं।
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इन ऐप्स की शुरुआत कैसे हुई?
इसकी शुरुआत जापान जैसे देशों में 'Rent-a-Family' के कॉन्सेप्ट से हुई थी, जो धीरे-धीरे भारत पहुंचा। भारत में Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स पिछले 5-6 सालों से सक्रिय हैं लेकिन इनका असली उछाल 2020 के लॉकडाउन के बाद आया, जब लोगों ने अकेलेपन का सबसे डरावना चेहरा देखा।
1.RentAFriend
इस पूरे बिजनेस की नींव रखने वाला सबसे बड़ा नाम 'RentAFriend' है। इसकी शुरुआत 2009 में अमेरिका में स्कॉट रोसेनबाम ने की थी। स्कॉट ने महसूस किया कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां लोग सिर्फ प्लेटोनिक (बिना किसी रोमांस के) दोस्ती के लिए मिल सकें। आज यह वेबसाइट दुनिया भर में मौजूद है और भारत के बड़े शहरों में भी इसका काफी इस्तेमाल होता है। यह एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता है, जहां आप पैसे देकर हजारों 'फ्रेंड्स' की लिस्ट देख सकते हैं।

2. Friend On Rent India
भारत में जब इस तरह की चीजों को अजीब माना जाता था, तब Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स ने कदम रखा। इसकी शुरुआत लगभग 2017-18 के आसपास हुई थी। इन्होंने महसूस किया कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में IT प्रोफेशनल्स और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच अकेलापन एक बीमारी की तरह फैल रहा है। इस साइट ने लोगों को एक मौका दिया कि वे अपनी प्रोफाइल लिस्ट करें और प्रति घंटा 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक कमाएं।
3. Vybout
यह ऐप पिछले 3-4 सालों में, खासकर पोस्ट-कोविड दौर में बहुत तेजी से उभरा है। इसकी शुरुआत एक 'सोशल डिस्कवरी' प्लेटफॉर्म के तौर पर हुई थी। इसका आईडिया बहुत सिंपल था, अगर आप अकेले बोर हो रहे हैं तो आपके पास एक 'Vibe Buddy' होना चाहिए। जहां आप अपनी पसंद की एक्टिविटी (जैसे जिम, मूवी या डिनर) के लिए साथी ढूंढ सकते हैं। यह ऐप आज की जेनरेशन को बहुत पसंद आता है क्योंकि इसका इंटरफेस बहुत मॉडर्न है और यह दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में काफी एक्टिव है।

4. Friendy
इसकी शुरुआत कुछ साल पहले हुई और इसका मुख्य उद्देश्य था 'सुरक्षित दोस्ती'। अक्सर इन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे, तो Friendy ने पूरी तरह से 'वेरिफाइड' प्रोफाइल्स पर काम किया। यहां लोग सिर्फ बातचीत करने, नई भाषा सीखने या साथ में वर्कआउट करने के लिए दोस्त ढूंढते हैं।
5. 7 Cups
7 Cups पूरी तरह से 'फ्रेंड रेंटल' नहीं है, लेकिन यह इस इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा है। यह 2013 में शुरू हुआ था। यहां लोग 'Listeners' को पैसे देते हैं ताकि वे उनकी बातें सुन सकें। आज के युवा जो डिप्रेशन या स्ट्रेस से जूझ रहे हैं, वे इस ऐप पर 'पेड लिसनर्स' से घंटों बातें करते हैं।

किन शहरों में है सबसे ज्यादा क्रेज?
यह बिजनेस मुख्य रूप से उन शहरों में फल-फूल रहा है जिन्हें हम 'पैसे की दौड़ वाला शहर' कहते हैं।
मुंबई: यहां लोग काम में इतने व्यस्त हैं कि उनके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है। यहां 'Movie Companion' की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है।
बेंगलुरु: टेक हब होने के नाते यहां के युवा सबसे ज्यादा अकेलेपन का शिकार हैं। यहां लोग 'Weekend Buddies' सबसे ज्यादा रेंट पर लेते हैं।
दिल्ली-NCR: यहां दिखावे की संस्कृति ज्यादा है, इसलिए शादियों और हाई- प्रोफाइल पार्टियों के लिए 'फेक फ्रेंड्स' की बुकिंग यहां सबसे ज्यादा देखी जाती है।
क्या है इसके पीछे का सच?
यह साइलेंट 'लोनलीनेस इकॉनमी' दिखाती है कि हम अपनी भावनाओं को भी अब एक प्रोडक्ट की तरह बेच रहे हैं। यह एक ऐसा चक्र है जहां हम पैसे कमाने के चक्कर में अपनों से दूर हुए और अब उसी पैसे से किसी अजनबी का वक्त खरीद रहे हैं। ये ऐप्स भले ही आपको कुछ घंटों की खुशी दें लेकिन ये अकेलेपन का इलाज नहीं हैं, जिसे आज की पीढ़ी अपने अंदर दबाए बैठी है।
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