भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए थे। इसके बाद भारत समेत तमाम एशियाई देशों ने अपने एयरपोर्ट पर इसकी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है ताकि बीमारी देश में न फैले। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि अभी इस जानलेवा वायरस के फैलने का खतरा कम है। भारत के खिलाफ किसी तरह की यात्रा या व्यापार पर पाबंदी की जरूरत नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेबियस ने कहा, 'निपाह वायरस के मामले दुर्लभ हैं लेकिन गंभीर भी हैं।' उन्होंने ट्वीट कर अपना पोस्ट शेयर किया है।
यह भी पढ़ें: तांबे या ग्लास की बोतल, पानी पीना किसमें ज्यादा फायदेमंद है? जानिए यहां
कितना खतरनाक है निपाह वायरस?
घेबियस ने ट्वीट में लिखा, 'भारत में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए हैं। अभी अन्य देशों में इस वायरस के मामले सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों ने रोग निगरानी और परीक्षण को बढ़ा दिया है, स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में रोकथाम और नियंत्रण उपायों का लागू किया है और जनता को सुरक्षा के बारे में जागरूक कर रहे हैं।'
WHO चीफ ने आगे कहा, 'यह वायरस आसानी से दूसरों में नहीं फैलता है इसीलिए यात्रा और व्यापार पर पांबदी लगाने की जरूरत नहीं है।'
बंगाल में दो नर्स संक्रमित
भारत में इस महीने निपाह वायरस के दो मामले सामने आए थे। दोनों मरीज नर्स है जिसमें एक पुरुष और एक महिला शामिल है। ये दोनों लोग उत्तर 24 परगाना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में काम करते हैं। दोनों में 25 दिसंबर को लक्षण दिखने शुरू हुए थे। जनवरी की शुरुआत में दोनों को आइसोलेशन में रखा गया। 13 जनवरी को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने संक्रमण की पुष्टि की थी। पुरुष की हालत में सुधार मिला जबकि महिला की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
निपाह वायरस के लक्षण
निपाह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है और निकट संपर्क या दूषित भोजन खाना खाने की वजह से हो सकता है। वायरस की वजह से बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी या मतली, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक थकान है। इन लक्षणों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। अगर कोई व्यक्ति वायरस से संक्रमित होता है तो उसके मस्तिष्क में सूजन हो जाती है और मृत्यु होने की संभावना 40% से 75% के बीच होती है।
निपाह वायरस से बचाव
निपाह वायरस का कोई स्टीक इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है इसलिए बचाव की सबसे बड़ा उपाय है। बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें, हाथों को साबुन से धोएं, अस्पताल में मास्क, ग्लव्स और सुरक्षा नियमों का पालन करें।