हर साल 15 सितंबर तो वर्ल्ड लिम्फोमा अवेयरनेस डे मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को लिम्फोमा के बारे में जागरूक करना है। लिम्फेटिक सिस्टम एक तंत्र है जो अंगों, वेसल्स और टिश्यू से जुड़ा हुआ है जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में लिम्फेटिक कैंसर से 40,159 लोग हर साल मरते हैं।
हमारे शरीर में कैंसर की कोशिकाएं किसी भी वजह से विकसित हो सकती हैं। कई बार शरीर में अक्सर गांठ बनने लगती है जिसे लोग हल्के में लेते हैं। कई बार ये गांठे लिम्फोमा कैंसर का कारण बन सकती है।आइए इसके बारे में जानते हैं।
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क्या होता है लिम्फोमा?
शरीर में इन्फेक्शन से लड़ने के लिए कोशिकाए होती हैं जिन्हें लिम्फोसाइट्स कहा जाता है। शरीर में ये कोशिकाएं नोड्स, स्प्लीन, थाइमस और बोनमैरो में मौजूद होती है। जब लिम्फोमा की कोशिकाओं में बदलाव होने लगता है तो ये नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं जिससे शरीर के प्रभावित हिस्सों में गांठे बनने लगती हैं। ये गांठे बाद में कैंसर में परिवर्तित हो जाती है। ज्यादातर लिम्फोमा कैंसर की गांठें गर्दन, छाती, जांघे के ऊपरी हिस्से और ऑर्म पिट्स में नजर आती हैं। शरीर में सभी गांठें कैंसर का कारण नहीं होती है।
शरीर में गांठ कैसे बनती है?
इन्फेक्शन के कारण- इन्फेक्शन की वजह से लिम्फ नोड्स सूज सकते हैं। उदाहरण के लिए गले में इन्फेक्शन होने पर गले में दर्द और गांठ महसूस हो सकती है। इन्फेक्शन ठीक होते ही गांठ ठीक हो जाती है।
लिपोमा- कुछ लोगों में त्वचा के नीच फैटी टिश्यू की गांठ बन जाती है। यह गांठ छूने में नरम, हिलने वाली और दर्द रहित होती है। ज्यादातर मामलों में नॉन कैंसर होती है। कभी कभी कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती है और ट्यूमर बन सकता है। इनमें से कुछ नॉन कैंसर और कुछ कैंसर हो सकते हैं।
कब गांठ को लेकर सतर्क होना चाहिए?
जब गांठ सख्त, आसानी से न हिले और लगातार बढ़ रहा हो। इसके अलावा एकदम से वजन घटना, रात में पसीना आना, लंबे समय तक बुखार, गर्दन, कांख और जांघ में लिम्फ नोड का लगातार बढ़ाना, कमजोरी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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2025 की American Family Physician की रिपोर्ट के मुताबिक अगर 4 हफ्ते से ज्यादा लंबे समय तक गांठ बना हुआ है तो डॉक्टर से संपर्क करें। लिम्फ नोड में सूजन होने का मुख्य कारण संक्रमण ही होता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक लिम्फ नोड्स में सूजन के मामलों में कैंसर होने का खतरा 1.1% होता है। हालांकि 40 साल से अधिक उम्र में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। प्रभावित हिस्से के टिश्यू की बायोप्सी कर लिम्फोमा को पता लगाया जाता है।
बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें
हाथों को नियमित रूप से धोएं ताकि इन्फेक्शन से बचे रहेंगे। किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सावधानी रखें और साफ-सफाई रखें।
नियमित रूप से संतुलित आहार लें।
वजन को कंट्रोल में रखें।
जरूरी वैक्सीन समय पर लगवाएं।
गांठ को खुद से ठीक करने की गलती न करें।