पिछले चार साल में देशभर में 111 ऐसे सांसद और विधायक रहे, जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदल ली। यह जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण में सामने आई है, जो 2022 से 2026 के बीच के आंकड़ों पर आधारित है। इसके मुताबिक, इनमें से सबसे ज्यादा नेता नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP), तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से जुड़े थे। इन तीनों से कुल मिलाकर 64 नेता निकले यानी 111 में से 58 फीसदी हिस्सा अकेले इन्हीं तीन पार्टियों का रहा।
इसके, अलावा अगर बात करें सबसे ज्यादा नेताओं को अपने साथ शामिल करने वाली पार्टी के बारे में तो इनमें नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) सबसे ऊपर रही। इस पार्टी में 29 फीसदी नेता शामिल हुए। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में 26 फीसदी और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में 18 फीसदी नेता शामिल हुए।
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ADR की रिपोर्ट क्या बताती है?
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 से अब तक मौजूदा लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए चुने गए कुल 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टी बदल ली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधानसभा के विधायक थे। यह विश्लेषण 2022 से 2026 के बीच हुए चुनावों और उपचुनावों के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नागालैंड में सबसे ज्यादा 32 यानी 29 प्रतिशत सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20 यानी 18 फीसदी सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली।

राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो इसमें नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP), ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं ने मिलकर पार्टी बदलने वाले 111 सांसदों और विधायकों में से 64 नाम शामिल हैं, यानी इन पार्टियों से कुल 58% नेताओं ने पार्टी बदली। सबसे ज्यादा पार्टी बदलने वाले नेता NDPP से चुने गए थे। इनकी संख्या 25 थी। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 और कांग्रेस के 19 नेताओं ने पार्टी बदली।
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दलबदल से गिरीं सरकारें
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत राष्ट्र समिति (BRS) से 9 नेता यानी 8 फीसदी दूसरी पार्टी में गए। आम आदमी पार्टी (AAP) और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) से 7-7 नेता यानी 6 फीसदी निकले। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से 6 यानी 5 फीसदी, जनता दल (यूनाइटेड) से पांच करीब 5 फिसदी और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) से चार यानी 4 फीसदी नेता दूसरी पार्टियों में शामिल हुए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल ही में कुछ राज्यों में सरकारें गिरने की वजह वहां के विधायकों का दलबदल ही था। इन पार्टियों से निकलकर सबसे ज्यादा नेता नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) में शामिल हुए, 32 नेता यानी 29 फीसदी इसमें आए। इसके बाद BJP में 29 यानी 26 फीसदी और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में 20 यानी 18% नेता शामिल हुए।