नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में दुनियाभर के कई बड़े नेता भारत पहुंचे थे। इस सम्मेलन के दौरान विदेशी नेताओं के लिए डिनर का आयोजन किया गया था लेकिन यह डिनर विवादों में आ गया है। विवादों में आने की वजह सिर्फ इतनी है कि डिनर में सिर्फ वेज यानी शाकाहारी खाना रखा गया था और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आया। इस पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारे तक में बहस हो रही है। डिनर मेन्यू को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद और चर्चा में आ गया है।
असदुद्दीन ओवैसी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की पहचान केवल एक तरह के खान-पान से नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं और खान-पान की परंपराओं से बनती है। भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के करीब 20 प्रतिशत लोग शाकाहारी हैं। उन्होंने कहा कि देश की विविधता में अलग-अलग संस्कृतियां, धर्म, भाषाएं और खान-पान की आदतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि कितने लोगों को BRICS के डिनर का मेन्यू पसंद आया या नहीं आया।
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क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
की ओर से विदेशी नेताओं के लिए आयोजित गाला डिनर के मेन्यू को लेकर शुरू हुआ। इस डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसा गया था। मेन्यू में भारतीय शाकाहारी व्यंजनों को प्रमुखता दी गई थी। मेन्यू में खांडवी, पनीर लबाबदार, मिलेट पुलाव, कश्मीरी मोरेल्स, खुम्ब गलौटी और जलेबी जैसे व्यंजन शामिल थे। इसके जरिए भारतीय शाकाहारी भोजन की विविधता और पारंपरिक व्यंजनों को विदेशी मेहमानों के सामने पेश किया गया।
पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना होने लगी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि भारत में 80 प्रतिशत लोग नॉन-वेज खाना खाते हैं। इसके साथ उन्होंने भारतीय नॉन-वेज खाने की तारीफ करते हुए अपनी बहन के छोले-भटूरे का भी जिक्र किया था।
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। बीजेपी ने कांग्रेस पर BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में परोसे गए भोजन को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि विपक्ष और राहुल गांधी को BRICS में कोई और कमी नजर नहीं आई तो वे अब खाने के मेन्यू को लेकर राजनीति करने लगे हैं।
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ओवैसी ने क्या कहा?
असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे विवाद पर कहा, '20 प्रतिशत लोग वेज खाते हैं। UCC की बात जब आती है तो बहुसंख्यकों का खाना, अल्पसंख्यकों पर लागू किया जाता है। भारत की विविधता में अलग-अलग संस्कृतियां, धर्म, भाषाएं और खान-पान की आदतें शामिल हैं। मुझे नहीं पता कि कितने लोगों को यह पसंद आया या नहीं।' असदुद्दीन ओवैसी ने ने कहा कि BRICS में किन मु्द्दों पर बात हुई इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा, 'हमने जिस डिजिटल करेंसी के मुद्दे पर चर्चा की थी, उसका कोई जिक्र नहीं हुआ। हमें नहीं पता कि चीन के साथ क्या बातचीत हुई, या चीन के कब्जे वाली उस जमीन का क्या होगा जहां हम पहले गश्त करते थे।' इसके साथ ही ओवैसी ने ईरान और UAE का एक साथ बैठकर बात करने को अच्छा बताया।