ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। समूह के सभी देशों की सहमति के बाद शनिवार को साझा घोषणापत्र जारी किया गया। इसमें गाजा युद्ध का जिक्र है। इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे का बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से हल निकले पर जोर दिया गया। ईरान पर हमले के संबंध में अमेरिका का प्रत्यक्ष कोई उल्लेख नहीं है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच कुछ मतभेद उभरे थे। हालांकि इनको दूर करने बाद ही साक्षा घोषणापत्र अपनाने पर सहमति बनी।
ब्रिक्स सम्मेलन की पहले दिन की बैठक समाप्त होने के बाद पीएम मोदी ने घोषणापत्र अपनाए जाने का एलान किया। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और ब्रिक्स के अन्य नेता मौजूद थे।
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घोषणापत्र के मसौदे पर आखिरी समय तक बातचीत चलती रही। शुरुआत में यूएई और ईरान के बीच मतभेद थे। दोनों ने अपना रुख कड़ा कर रखा था। हालांकि भारत दोनों ही देशों को सहमत करने पर कामयाब रहा। पहले दिन घोषणापत्र को अपनाए जाने को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिक्स ने पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।
गाजा से जबरन विस्थापन का विरोध
घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से गाजा में युद्धविराम को जारी रखने और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की। गाजा में फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने वाली नीतियों का विरोध किया। पिछले साल अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की।
ब्रिक्स ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के साथ-साथ फिलिस्तीनी लोगों के जायज अधिकारों, जिनमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार शामिल है, के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
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समूह ने फिलिस्तीन की पूर्ण संयुक्त राष्ट्र सदस्यता और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' के प्रति अपना समर्थन जताया। इस समाधान के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 1967 की सीमाओं (जिनमें गाजा और वेस्ट बैंक शामिल हैं) के भीतर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की बात कही गई है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम होगी।
संवाद से संघर्ष को समाप्त करने पर जोर
ब्रिक्स नेताओं ने संघर्ष को 'संवाद और कूटनीति' से समाप्त करने के भारत के रुख का समर्थन किया। लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर बल दिया। ब्रिक्स ने पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया, जो हालात को और खराब कर सकते हैं।
संप्रभुता और अखंडता का सम्मान हो
घोषणापत्र में कहा गया, 'इसके अलावा हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह पालन करने के साथ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने एवं आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। हम संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा।'
टैरिफ के बढ़ते चलन पर ब्रिक्स चिंतित
ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं होने वाली व्यापार प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बढ़ते चलन की आलोचना की। कहा कि हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।