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हार्ट वाली बीमारियों के मरीज 3 गुना बढ़े, अस्पताल का खर्च खाली कर दे रहा जेब

NSO की ओर से जारी एक रिपोर्ट बताती है कि देश के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में हार्ट संबंधी बीमारियों का इलाज बेहद महंगा है और पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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बीते कुछ साल में हार्ट से संबंधित बीमारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। कम उम्र के लोग भी इससे प्रभावित हुए हैं। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए जिनमें कम उम्र के लोग कोई काम करते-करते अचानक हार्ट अटैक से मर गए। अब नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑर्गनाइजेशन (NSO) की एक रिपोर्ट भी इसी की पुष्टि कर रही है। NSO की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हार्ट की बीमारी के शिकार होने वाले लोगों की संख्या पिछले सात साल में तीन गुना बढ़ गई है। वहीं, इसका इलाज काफी महंगा है और सरकारी अस्पतालों में भी हार्ट से संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए कम से कम 10 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इसी इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

 

NSO की ओर से जारी 'हाउसहोल्ड सोशल कंजम्प्शन: हेल्थ' रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच किए गए सर्वे में यह सामने आया है कि प्रति एक लाख जनसंख्या में से 3891 लोग हार्ट संबंधी, 3681 लोग डायबिटीज जैसी और 1536 लोग सांस की बीमारी से ग्रसित थे। हैरानी की बात यह पाई गई कि 15 से 29 साल की उम्र के लोग भी हार्ट से संबंधित समस्याओं से जूझते पाए गए। बता दें कि साल 2025 में 15 से 29 साल की उम्र के 3.4 प्रतिशत लोग हार्ट की बीमारियों के चलते अस्पताल में भर्ती हुए।

 

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रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में हार्ट संबंधी समस्याओं से पुरुष ज्यादा प्रभावित रहे हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि देश में कुल बीमारियों में दिल की बीमारी की हिस्सेदारी अब लगभग एक चौथाई यानी 25.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2017-18 में प्रति एक लाख लोगों में से 1333 लोग है ऐसे थे जो हार्ट संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। 2025 में यह संख्या 3891 यानी लगभग 3 गुना से भी ज्यादा हो गई है।

कितनी गंभीर हो रही हार्ट की समस्या?

 

अगर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या देखें तो ग्रामीण क्षेत्र के 10.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र के 11.9 प्रतिशत मरीज हार्ट संबंधी समस्याओं के चलते ही अस्पताल में भर्ती होते हैं। यह संख्या एडमिट होने वाले प्रति 1000 व्यक्तियों के हिसाब से निकाली गई है। अगर ग्रामीण क्षेत्र में देखें तो 11.5 प्रतिशत पुरुष और 9 प्रतिशत महिलाएं हार्ट संबंधी समस्याओं का शिकार होती हैं। वहीं, शहरी क्षेत्र में 13.2 प्रतिशत पुरुष और 10.5 प्रतिशत महिलाएं हार्ट संबंधी समस्याओं का शिकार होती हैं।

 

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उम्र वर्ग के हिसाब से देखें तो 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग सबसे ज्यादा हार्ट संबंधी समस्याओं के कारण ही अस्पताल में भर्ती होते हैं। 2025 में सबसे ज्यादा 18.2 प्रतिशत लोग इसी समस्या के कारण अस्पताल तक पहुंचे।

 

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कितना होता है खर्च?

 

हार्ट संबंधी समस्याओं को कार्डियो वस्कुलर कैटगरी में रखा जाता है। इसमें हाइपर टेंशन, हृदय रोग, छाती में दर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं शामिल होती हैं। NSO की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में हार्ट संबंधी मरीजों के एडमिट होने पर औसतन 10,207 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एनजीओ या ट्रस्ट के अस्पतालों में यही खर्च 87,063 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों में यही खर्च 66,387 रुपये तक होता है।

 

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वहीं, अगर शहरी क्षेत्र के अस्पतालों की बात करें तो सरकारी में 10,666 रुपये, एनजीओ या ट्रस्ट के अस्पतालों में औसतन 49,286 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों में औसतन 1,01,099 रुपये खर्च हो जाते हैं। यह दिखाता है कि अगर एक भी शख्स हार्ट संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती होता है तो कम से कम 10 हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक एक झटके में खर्च हो सकते हैं।

किस उम्र में कितने लोग जाते हैं अस्पताल?

15 से 29 साल- 3.4%
30 से 44 साल- 7.3%
45 से 59 साल-13.9%
60 से ज्यादा-18.2%

 

 

 


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