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1322 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस

सीबीआई ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के खिलाफ एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कर्ज मामले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। उन पर अपनी कुल संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर लोन लेने का आरोप है। समझते हैं पूरा मामला।

Essel- Zee Group Founder Subhash Chandra

एस्सेल ग्रुप-जी के चेयरमैन सुभाष चंद्रा। (Photo Credit-Social Media)

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( CBI ) ने सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के विरुद्ध एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ लगभग 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

 

सुभाष चंद्रा एस्सेल समूह के संस्थापक है। हाल ही में पर्सनल इनसॉल्वेंसी केस में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 22,006 करोड़ के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का फैसला सुनाया था। इसके बाद सुभाष चंद्रा चर्चा में आए थे। हालांकि बाद में एनसीएलटी की पांच सदस्यीय बैंच ने 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी।

 

 

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एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) ने 31 अगस्त को मामला दर्ज कराया। इसमें सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनियों पर लोन के मामले में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, कदाचार और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया। कंपनी ने बताया कि इस वजह से उसे 1322 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

 

एफआईआर में आईपीसी की धारा 120बी को धारा 409 और 420 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने बताया कि दो ऋण सुविधाएं सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी पर थीं। एक ऋण सुविधा 500 करोड़ और दूसरी 480 करोड़ रुपये की थी।

 

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कंपनी का आरोप है कि लोन के समर्थन में दिए गए नेट-वर्थ प्रमाणपत्र में सुभाष चंद्रा की कुल संपत्ति लगभग 59,113 करोड़ दी। मगर दूसरे प्रमाणपत्र में यह घटकर 40,562 करोड़ रुपये हो गई।

 

कंपनी ने आगे कहा कि व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा ने दोनों प्रमाण पत्रों में बताई गई नेटवर्थ से इनकार कर दिया और कहा कि 2024 में उनकी कुल संपत्ति सिर्फ 31.79 करोड़ रुपये थी। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड का आरोप है कि ऋण हासिल करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर संपत्ति को दिखाने वाले दस्तावेजों को तैयार किया गया और उन्हें पेश किया गया। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने ऋण के दुरुपयोग और सुभाष चंद्रा व उनकी कंपनियों पर मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया।

इन कंपनियों को दिलाया गया कर्ज

एफआईआर में आरोप लगाया गया कि सुभाष चंद्रा ने उधार लेने वाली कंपनियों वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व उनके अधिकारियों और निदेशकों के साथ मिलीभगत कर एलआईसीएचएफएल को धोखा दिया। इस मिलीभगत के जरिए इन कंपनियों को ऋण जारी करवाए गए। बाद में इसका कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। 

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