भारत में इन दिनों कोचिंग सेंटर्स को लेकर काफी चर्चा हो रही है। पटना दो कोचिंग सेंटर्स के बीच हुए विवाद के बाद एक बार फिर इस पूरी इंडस्ट्री को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। कभी शहर के छोटे कमरों में 10-20 बच्चों को पढ़ाने से शुरू हुआ यह कोचिंग का विचार आज एक बड़ा बिजनेस मॉडल बन चुका है। इस बिजनेस में शामिल लोग आए दिन नई गाड़ियां ले रहे हैं और बढ़िया जिंदगी जी रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था में भी इस इंडस्ट्री ने अपनी जगह बना ली है और लाखों लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है।
पिछले एक दशक में कोचिंग सेंटर्स का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है। अब बोर्ड परीक्षा से लेकर IIT-JEE, NEET, UPSC, SSC, बैंकिंग, CLAT और अब स्किल आधारित नौकरियों तक की तैयारी के लिए भी कोचिंग संस्थान खुलने लगे हैं। आज स्थिति यह है कि कोचिंग केवल पढ़ाई का विकल्प नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपये का बाजार बन चुकी है, जिसका असर परिवारों के खर्च, शहरों की अर्थव्यवस्था, रोजगार और शिक्षा मॉडल तक दिखाई देता है। कुछ लोग इसे शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी बता रहे हैं तो कुछ इसे सही भी ठहरा रहे हैं।
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हजारों करोड़ का कारोबार
देशभर में कोचिंग संस्थान काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार, देशभर में करीब 60,000 करोड़ का कोचिंग कारोबार है। अकेले बिहार में ही करीब 15 हजार करोड़ रुपये का कोचिंग कारोबार है। इसके साथ ही कोचिंग का कारोबार लगातार बढ़ भी रहा है। ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
कितने स्टूडेंट्स कोचिंग पर निर्भर?
देशभर में हो रही कोचिंग संस्थानों की बढ़ोतरी में पूर्वी भारत भी कोचिंग तेजी से बढ़ रही हैं। जहां तक स्टूडेंट की बात है तो त्रिपुरा में लगभग 79 प्रतिशत स्टूडेंट कोचिंग जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 75 प्रतिशत, उड़ीसा में 57 प्रतिशत और बिहार में 52.5 प्रतिशत स्टूडेंट कोचिंग जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर भी करीब 27 प्रतिशत छात्र कोचिंग जा रहे हैं।
अरबों में भर रहे टैक्स
देशभर में कोचिंग एक बिजनेस बन चुका है और इससे सरकार को भी काफी ज्यादा फायदा हो रहा है। पिछले कुछ ही सालों में कोचिंग संस्थानों से मिलने वाली जीएसटी केलेक्शन में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में कोचिंग संस्थानों से 2240.73 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन मिला था। यही कलेक्शन 2023-24 में बढ़कर 5517.45 करोड़ रुपये हो गया है। इससे साफ है कि कोचिंग संस्थानों से सरकार की इनकम भी लगातार बढ़ रही है।
फीस को लेकर विवाद
कई कोचिंग संस्थानों की फीस इतनी ज्यादा है कि इतने में बच्चे किसी बढ़िया कॉलेज से डिग्री कर लें। इन संस्थानों की फीस को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं, लेकिन आज के समय में ऐसा ट्रेंड बन गया है कि बिना कोचिंग के किसी परीक्षा में सफलता हासिल करना एक सपने जैसा बन गया है। सरकार ने भी इस और ध्यान दिया है। 2024 में ही सरकार ने कोचिंग सेंटर्स को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इसमें छात्रों से फीस वसूलने, छात्रों को तनाव में रखने जैसी समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। इसके अलावा अलग-अलग राज्य सरकारों ने भी कोचिंग संस्थानों के लिए गाइडलाइंस तैयार की हैं।
कोचिंग बनी समस्याएं
कोचिंग इंडस्ट्री की तेज वृद्धि के साथ कई सवाल भी सामने आए हैं। एक्सपर्ट्स ने लगातार बढ़ती फीस, शिक्षा में असमानता, स्कूल व्यवस्था पर निर्भरता कम होने, मानसिक दबाव और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता जताई है। हाल के सालों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य और कोचिंग संस्कृति को लेकर नीतिगत स्तर पर चर्चा बढ़ी है। आज भारत की कोचिंग इंडस्ट्री सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक तंत्र बन चुकी है। किसी भी परीक्षा का नतीजा आने के बाद कोचिंग संस्थानों में टॉपर्स को अपने संस्थान का दिखाने की होड़ लग जाती है और अखबारों से लेकर टीवी चैनलों तक पर विज्ञापन दिए जाते हैं। इस इंडस्ट्री को लेकर अब चिंताएं सामने आ रही हैं।