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कोडीन सीरप तस्करी: फरार दवा व्यापारी शुभम जायसवाल का पिता एयरपोर्ट से गिरफ्तार

पुलिस का कहना है कि खुफिया जानकारी के मुताबिक वह देश छोड़कर थाईलैंड या सिंगापुर भागने की कोशिश में था। इस सीरप को पीने से मध्य प्रदेश में 24 बच्चों की मौत हो गई थी।

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भोला प्रसाद । Photo Credit: AI Generated

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कोलकाता पुलिस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के कई राज्यों से जुड़े कोडीन तस्करी मामले में बड़ा खुलासा करते हुए फरार दवा व्यापारी शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया। भोला को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उस वक्त पकड़ा गया, जब सोनभद्र पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि वह देश छोड़कर थाईलैंड और फिर सिंगापुर भागने की कोशिश कर रहा था। सोनभद्र पुलिस की टीम कोलकाता पहुंच चुकी है, जो भोला को हिरासत में लेकर उत्तर प्रदेश ले जाएगी।

 

यूपी एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भोला पर सोनभद्र, वाराणसी, गाजीपुर और जौनपुर में चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह प्रतिबंधित दवाओं, खासकर कोडीन कफ सीरप की अवैध बिक्री में शामिल होने का आरोपी है। जांच में वाराणसी के व्यापारी शुभम जायसवाल को नकली कंपनियों, जाली दस्तावेजों और राज्यों के बीच माल की ढुलाई से बने बड़े नशीले पदार्थों के नेटवर्क का मुख्य सरगना पाया गया। पुलिस का कहना है कि शुभम और उसके पिता ने गाजियाबाद व वाराणसी के स्टॉक पॉइंट्स से कोडीन सीरप को झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, नेपाल और बांग्लादेश भेजने का बड़ा सप्लाई चेन तैयार किया था। नकली फर्मों का इस्तेमाल कर अवैध खेप को असली दवा के रूप में भेजा जाता था।

 

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24 बच्चों की हुई थी मौत

यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई, जिसके बाद यूपी में छापेमारी शुरू हुई। 18 अक्टूबर को सोनभद्र में छापे में स्नैक्स के कार्टनों में छिपाकर रखी गई कोडीन सीरप की 12,000 शीशियां बरामद हुईं। ट्रक ड्राइवरों ने बताया कि यह खेप जायसवाल की नकली कंपनी से गाजियाबाद के जरिए भेजी गई थीं। 

 

जांच में पता चला कि नेटवर्क में कम से कम छह कागजी कंपनियां थीं, कई परिवहन और बिलिंग दस्तावेज जाली थे, और रांची की शैली ट्रेडर्स से फर्जी इनवॉयस जारी किए जाते थे। जायसवाल हिमाचल प्रदेश के एक कारखाने से सीरप लाकर गाजियाबाद में स्टोर करता, फिर आगरा, लखनऊ और वाराणसी के रास्ते पूर्वी इलाकों व विदेशों में बेचता था।

पहले मेडिकल सप्लायर था

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘कोविड से पहले जायसवाल छोटा-मोटा मेडिकल सप्लायर था। महामारी में प्रतिबंधित दवाओं की मांग बढ़ी तो उसने स्थानीय दबंग लोगों से गठजोड़ कर अपना कारोबार तेजी से बढ़ाया।’ गाजियाबाद, वाराणसी, जौनपुर समेत कई जिलों में शुभम और भोला के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। 

 

जायसवाल की वाराणसी की दुकान न्यू वृद्धि फार्मा से बड़ी खरीदारी को जायज ठहराया जाता था, जबकि शैली ट्रेडर्स के कागजात पूरी तरह फर्जी थे। नेटवर्क प्रयागराज, लखनऊ, कौशांबी, भदोही समेत 10 जिलों में फैला है।

 

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एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एसआईटी ने पुष्टि की कि शुभम और उसका साथी आसिफ नेपाल या दुबई भाग चुके हैं। अधिकारी कहते हैं कि जांच बढ़ने पर और बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी होगी।

 

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