केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सल की समस्या और आदिवासी विकास के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि 70 साल में 60 साल तक कांग्रेस का शासन था। उसने आदिवासी विकास के लिए कुछ नहीं किया। वहीं नक्सल की समस्या को खत्म करने के लिए भी कुछ नहीं किया। लोकसभा में 'देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने की कोशिश पर हुई बहस के जवाब में अमित शाह ने कहा आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में एक स्कूल बनाने की मुहिम चली। हर गांव में राशन की दुकान खोलने का अभियान चला। हर तहसील-पंचायत पर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बने। आधार और राशन कार्ड बने। पांच किलो अनाज मिल रहा है। गैस के चूल्हे वितरित हो रहे हैं।
'आज बस्तर विकसित हो रहा है'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं, जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे कि 70 से अब तक विकास क्यों नहीं हुआ। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर और गैस मिला। शुद्ध पानी और पांच लाख तक बीमा हुआ। प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज मिला। ये बस्तर वाले क्यों छूट गए? शाह ने आगे कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी। इसलिए वहां विकास नहीं होता था। आज आतंक की परछाई हट रही है और बस्तर विकसित हो रहा है।'
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हथियार उठाने वाले को हिसाब चुकाना होगा: शाह
शाह ने कहा, 'हथियारी मूवमेंट के वकील बनने वाले कहते हैं कि हम अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। संविधान को मानोगे या नहीं। अन्याय के खिलाफ उपाय हमारे संविधान में निहित है। अदालतें बनी हैं। विधानसभा, जिला पंचायत, तहसील पंचायतें बनी हैं। यह पूरी व्यवस्था को नकार करके हाथ में हथियार उठा लोगो। ऐसा कैसे चलेगा? यह नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा उसे हिसाब चुकता करना पड़ेगा। इस तरह से नहीं चलेगा।'
अमित शाह ने पूछा कि 75 साल में 60 साल कांग्रेस ने शासन किया तो आदिवासी अभी तक विकास के लिए क्यों बच गए हैं? विकास तो अब मोदी सरकार कर रही है। 60 साल तक घर नहीं दिया। पानी नहीं दिया। स्कूल, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधा नहीं पहुंचने दी। अब आप हिसाब मांग रहे हो। थोड़ा सा अपने गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन है?
नक्सल हिंसा में 20 हजार की गई जान
लोकसभा में गृह मंत्री ने बताया कि 12 राज्य 'रेड कॉरिडोर' बन चुके थे। यहां कानून का कोई राज नहीं था। 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीने को मजबूर थे। नक्सली हिंसा के कारण पांच हजार सुरक्षाकर्मी समेत 20,000 लोगों की जान गई। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यह स्वीकार किया था कि देश के सामने कश्मीर और पूर्वोत्तर की समस्याओं से भी बड़ी चुनौती नक्सलवाद है, लेकिन कांग्रेस ने इस दिशा में कुछ नहीं किया।
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हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी
पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। अंतिम तारीख से एक दिन पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर बहस हुई। शाह ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो, जम्मू-कश्मीर या पूर्वोत्तर... मोदी सरकार किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने माओवादियों के खिलाफ मिली सफलता का श्रेय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों खासकर कोबरा और सीआरपीएफ, सुरक्षा एजेंसियों, छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और आदिवासियों को दिया।
नक्सलवाद को फैलाने के पीछे वामपंथी विचारधारा
गृह मंत्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं फैला। वामपंथी उग्रवाद ने यह सुनिश्चित किया कि पूरा इलाका वर्षों तक गरीब बना रहे। नक्सलवाद को फैलाने के पीछे वामपंथी विचारधारा है, न कि विकास की मांग। नक्सलियों ने समानांतर सरकार चलाई, विकास कार्यों को रोका और लोगों को वोट डालने से रोका। गृह मंत्री ने विपक्ष पर हमला बोला और कहा कि उन्होंने भगत सिंह और बिरसा मुंडा की तुलना उन नक्सलियों से की, जिन्होंने बेगुनाहों की हत्या की।